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Thailand: थाईलैंड के पूर्व PM थाकसिन शिनावात्रा को मिली शाही माफी, पैरोल खत्म होने से पहले ही मिल गई रिहाई
पीटीआई, बैंकॉक
Published by: Devesh Tripathi
Updated Wed, 03 Jun 2026 01:52 PM IST
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सार
थाईलैंड के पूर्व प्रधानमंत्री थाकसिन शिनावात्रा ने शाही माफी मिलने के बाद अपनी जेल की सजा से जुड़ी सभी कानूनी जिम्मेदारियां पूरी कर ली हैं। उनकी पैरोल समय से पहले समाप्त कर दी गई। 76 वर्षीय नेता 2001 से 2006 तक प्रधानमंत्री रहे थे और सैन्य तख्तापलट के बाद लंबे समय तक निर्वासन में रहे थे।
थाईलैंड के पूर्व पीएम थाकसिन शिनावात्रा
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
थाईलैंड के पूर्व प्रधानमंत्री थाकसिन शिनावात्रा ने बुधवार को अपनी जेल की सजा से जुड़ी सभी कानूनी जिम्मेदारियों को औपचारिक रूप से पूरा कर लिया। शाही माफी मिलने के बाद उनकी चार महीने की पैरोल समय से पहले खत्म कर दी गई।
दो दशकों से अधिक समय तक थाई राजनीति में एक प्रभावशाली व्यक्ति रहे 76 वर्षीय अरबपति और लोकप्रिय नेता को पिछले महीने बैंकॉक की जेल से रिहा किया गया था। तब से इस बात का अनुमान लगाया जा रहा है कि वह सत्तारूढ़ गठबंधन का हिस्सा फिएउ थाई पार्टी पर अपना मजबूत प्रभाव जारी रख सकते हैं। हालांकि, उनके परिवार ने कहा है कि वह राजनीति से पीछे हटना चाहते हैं।
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थाईलैंड के राजा ने दी शाही माफी
थाईलैंड के राजा महा वाचिरालोंगकोन द्वारा जारी किया गया माफी आदेश मंगलवार देर रात रॉयल गजट में प्रकाशित हुआ। यह बुधवार को प्रभावी हो गया। थाईलैंड एक सांविधानिक राजशाही है, जिसमें राजा को दोषी अपराधियों की माफी पर अंतिम निर्णय लेने का अधिकार है।
राजा का यह निर्णय रानी सुतिदा के जन्मदिन के अवसर पर लिया गया था। यह विशिष्ट शर्तों को पूरा करने वाले योग्य दोषियों पर व्यापक रूप से लागू हुआ। थाकसिन पूर्ण रिहाई के लिए योग्य थे, क्योंकि उन्हें पैरोल पर रिहा किया गया था और उनकी सजा में एक वर्ष से कम का समय बचा था।
सैन्य तख्तापलट के बाद निर्वासन में रहे
थाकसिन एक दूरसंचार दिग्गज थे, जिन्होंने 1998 में अपनी खुद की राजनीतिक पार्टी की स्थापना की थी। उन्होंने 2001 से 2006 तक प्रधानमंत्री के रूप में कार्य किया, जब एक सैन्य तख्तापलट ने उन्हें विदेश में रहते हुए सत्ता से बेदखल कर दिया था।
शिनावात्रा के सत्ता से बेदखल होने के लगभग दो दशकों तक राजनीतिक ध्रुवीकरण जारी रहा। हालांकि उनके स्वनिर्वासित काल में भी उनसे जुड़े दल बार-बार सत्ता में लौटते रहे। उनकी लोकलुभावन नीतियों को गरीब मतदाताओं (विशेष रूप से ग्रामीण उत्तरी और पूर्वोत्तर क्षेत्रों में) का भरपूर समर्थन मिला। लेकिन उनकी लोकप्रियता और कभी-कभी उनके कठोर रवैये ने उनके समर्थकों और देश के शहरी अभिजात वर्ग, राजशाही समर्थकों और सेना के बीच गहरी दरारें पैदा कर दीं।
भ्रष्टाचार के आरोपों में मिली थी सजा
थाकसिन को भ्रष्टाचार से संबंधित आरोपों के लिए एक साल की सजा के आठ महीने काटने के बाद 11 मई को रिहा किया गया था। उनकी पैरोल की शर्तों के तहत, उन्हें एक इलेक्ट्रॉनिक निगरानी ब्रेसलेट पहनना आवश्यक था और मूल रूप से उन्हें चार महीने की पैरोल पर रहने का कार्यक्रम था।
शिनावात्रा के वकील ने एसोसिएटेड प्रेस को पुष्टि की कि थाकसिन अपने कानूनी दायित्वों से पूरी तरह मुक्त हो गए हैं। हालांकि, उन्होंने कहा कि उनके ब्रेसलेट को हटाने के लिए कुछ प्रक्रियाएं हैं, जिनमें कई दिन लग सकते हैं। उन्हें अपने स्वयं के व्यावसायिक हितों को लाभ पहुंचाने के लिए अपने पद का इस्तेमाल करने और सरकार को नुकसान पहुंचाने वाली एक राज्य लॉटरी परियोजना को अवैध रूप से मंजूरी देने से जुड़े आरोपों में दोषी ठहराए जाने के बाद जेल भेजा गया था।
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आठ साल की सजा को राजा ने किया एक साल, अब मिली शाही माफी
उन्हें मूल रूप से 2023 में आठ साल की जेल की सजा सुनाई गई थी, लेकिन राजा द्वारा सजा को एक साल तक कम कर दिया गया था। उन्हें चिकित्सा आधार पर बैंकॉक के पुलिस अस्पताल के एक कमरे से इसे पूरा करने की अनुमति दी गई थी। अनुचित विशेष व्यवहार प्राप्त करने के विरोध के बाद सुप्रीम कोर्ट ने सितंबर 2025 में थाकसिन को जेल में अपनी सजा काटने का आदेश दिया था।