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युद्ध का दंश: गाजा मददगारों ने इस्राइल पर लगाए प्रताड़ना के आरोप, अंधेरे कंटेनर और बिजली के झटकों का किया दावा
Sun, 09 Aug 2026 06:29 AM IST
शिवम गर्ग
द न्यूयॉर्क टाइम्स, पेरिस/इस्तांबुल।
द न्यूयॉर्क टाइम्स, पेरिस/इस्तांबुल।
Published by: शिवम गर्ग
Updated Sun, 09 Aug 2026 06:29 AM IST
सार
गाजा में मानवीय सहायता पहुंचाने की कोशिश कर रहे ग्लोबल सुमुद फ्लोटिला के कार्यकर्ताओं ने इस्राइली हिरासत में गंभीर प्रताड़ना के आरोप लगाए हैं। क्या आरोपों की जांच में सच सामने आएगा? क्या यह युद्ध कानून का उल्लंघन है? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...
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प्रताड़ना के आरोप
- फोटो : अमर उजाला प्रिन्ट/एजेंसी
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विस्तार
मई मध्य में ग्लोबल सुमुद फ्लोटिला संगठन के कुछ कार्यकर्ता समुद्र के रास्ते सहायता लेकर गाजा की नाकाबंदी तोड़ने की कोशिश कर रहे थे। इसी दौरान इस्राइली सैन्य बलों ने उन्हें हिरासत में ले लिया। छूटने के बाद 24 में 22 कार्यकर्ताओं ने दावा किया कि उन्हें हिरासत में बुरी तरह प्रताड़ित किया गया। लात-घूंसों से पीटा गया, अंधेरे कंटेनरों में रखा गया। यही नहीं, उन्हें बिजली के झटके दिए गए और उनका यौन उत्पीड़न भी किया गया।
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पीड़ितों ने बताया कि मई मध्य में लगभग 50 नौकाओं से 400 से अधिक कार्यकर्ता तुर्किये से रवाना हुए थे। उनका इरादा युद्धग्रस्त गाजा के लोगों के लिए भोजन और आवश्यक मानवीय सहायता पहुंचाना था। गाजा तट से काफी पहले अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में ही इस्राइली नौसेना के कमांडो ने इस बेड़े को अपने कब्जे में ले लिया।
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कार्यकर्ताओं को पहले इस्राइली जहाजों पर और बाद में दक्षिणी इजरायल के अश्दोद बंदरगाह पर लगभग तीन दिनों तक हिरासत में रखा गया। इस्राइल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-ग्वीर ने इस दौरान सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी जारी किया गया, जिसमें वह हिरासत में लिए गए कार्यकर्ताओं का मजाक उड़ाते नजर आए थे। इस बीच, इस्राइल ने कार्यकर्ताओं के लगाए आरोपों को निराधार बताया है।
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यौन उत्पीड़न का भी आरोप
ऑस्ट्रेलियाई फिल्म निर्माता और कार्यकर्ता जूलियट लैमोंट ने आरोप लगाया कि उन्हें एक शिपिंग कंटेनर के अंदर गंभीर रूप से पीटा गया और यौन उत्पीड़न किया गया। वहीं, इतालवी कार्यकर्ता डेरियो कैरोतेनुतो ने बताया कि उन्हें और अन्य लोगों को बेहद तंग जगहों पर फर्श पर सोने के लिए मजबूर किया।
युद्ध के नियमों के उल्लंघन की हो रही जांच
फ्रांस, इटली और ऑस्ट्रेलिया के अधिकारियों इस घटना की कड़ी आलोचना की है। साथ ही घटना की औपचारिक जांच भी शुरू कर दी है। जिनेवा कन्वेंशन और अंतरराष्ट्रीय कानून के विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो यह युद्ध के नियमों और मानवीय कानूनों का स्पष्ट उल्लंघन है।
चिकित्सा रिपोर्ट में हुई उत्पीड़न की पुष्टि
हिरासत से रिहा होने और तुर्किये और अन्य यूरोपीय देशों लौटने के बाद, कई कार्यकर्ताओं को तुरंत अस्पतालों में भर्ती कराना पड़ा। छह कार्यकर्ताओं के उपलब्ध कराए गए मेडिकल रिकॉर्ड और अस्पतालों की रिपोर्ट से उत्पीड़न का खुलासा होता है। इनकी पसलियों और रीढ़ की हड्डी में फ्रैक्चर पाया गया। वहीं, बिजली के झटके देने के भी साफ संकेत मिले।