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Cyber Attacks: गूगल का चीन के वैश्विक जासूसी नेटवर्क का खुलासा, 53 देशों में की थी साइबर हमलों की कोशिश
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क
Published by: पवन पांडेय
Updated Thu, 26 Feb 2026 06:18 AM IST
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सार
गूगल ने एक खतरनाक अंतरराष्ट्रीय साइबर जासूसी नेटवर्क को ध्वस्त करने का दावा किया है। तकनीकी कंपनी ने दावा किया कि चीन से जुड़े एक हैकिंग समूह ने विश्व भर के 42 देशों के कम से कम 53 प्रमुख संगठनों के डेटा में सेंध लगाई थी।
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विस्तार
तकनीकी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी गूगल ने एक बेहद संगठित और खतरनाक अंतरराष्ट्रीय साइबर जासूसी नेटवर्क को ध्वस्त करने का दावा किया है। बुधवार को गूगल ने बताया कि चीन से जुड़े एक हैकिंग समूह यूएनसी2814 (जिसे गैलियम भी कहा जाता है) ने दुनिया भर के 42 देशों के कम से कम 53 प्रमुख संगठनों के डेटा में सेंध लगाई थी।
यह भी पढ़ें - US-Iran Talks: परमाणु वार्ता से पहले ट्रंप सरकार का बड़ा कदम, ईरान पर नए प्रतिबंध; 30 लोग और कंपनियां शामिल
गूगल थ्रेट इंटेलिजेंस ग्रुप के मुख्य विश्लेषक जॉन हल्टक्विस्ट ने कहा कि यह एक विशाल जासूसी तंत्र था, जिसका उद्देश्य वैश्विक स्तर पर व्यक्तियों और विशिष्ट संस्थानों की निगरानी करना था। यह समूह लगभग एक दशक से सक्रिय है।
गूगल का दावा: किसी उत्पाद की तकनीकी खामी नहीं...
वैसे, गूगल ने स्पष्ट किया कि यह किसी उत्पाद की तकनीकी खामी नहीं, बल्कि प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग था। हैकरों ने ग्रिडटाइड नामक एक गुप्त बैकडोर स्थापित किया था, जिससे उन्हें लोगों के नाम, फोन नंबर, जन्म तिथि, मतदाता पहचान पत्र और नेशनल आईडी जैसे बेहद निजी डेटा तक पहुंच मिल गई थी।
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कॉल डेटा रिकॉर्ड की चोरी करना था उद्देश्य
हल्टक्विस्ट ने कहा कि जासूसी नेटवर्क विशेष रूप से सरकारी संस्थाओं और दूरसंचार कंपनियों को अपना निशाना बनाता रहा है। हालांकि, गूगल ने तत्काल कार्रवाई करते हुए हैकिंग समूह की ओर से नियंत्रित क्लाउड प्रोजेक्ट को बंद कर दिया है और उनके इंटरनेट बुनियादी ढांचे को निष्क्रिय कर दिया है। हमलों का उद्देश्य कॉल डाटा रिकॉर्ड और एसएमएस संदेशों की चोरी करना था।
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गूगल थ्रेट इंटेलिजेंस ग्रुप के मुख्य विश्लेषक जॉन हल्टक्विस्ट ने कहा कि यह एक विशाल जासूसी तंत्र था, जिसका उद्देश्य वैश्विक स्तर पर व्यक्तियों और विशिष्ट संस्थानों की निगरानी करना था। यह समूह लगभग एक दशक से सक्रिय है।
गूगल का दावा: किसी उत्पाद की तकनीकी खामी नहीं...
वैसे, गूगल ने स्पष्ट किया कि यह किसी उत्पाद की तकनीकी खामी नहीं, बल्कि प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग था। हैकरों ने ग्रिडटाइड नामक एक गुप्त बैकडोर स्थापित किया था, जिससे उन्हें लोगों के नाम, फोन नंबर, जन्म तिथि, मतदाता पहचान पत्र और नेशनल आईडी जैसे बेहद निजी डेटा तक पहुंच मिल गई थी।
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कॉल डेटा रिकॉर्ड की चोरी करना था उद्देश्य
हल्टक्विस्ट ने कहा कि जासूसी नेटवर्क विशेष रूप से सरकारी संस्थाओं और दूरसंचार कंपनियों को अपना निशाना बनाता रहा है। हालांकि, गूगल ने तत्काल कार्रवाई करते हुए हैकिंग समूह की ओर से नियंत्रित क्लाउड प्रोजेक्ट को बंद कर दिया है और उनके इंटरनेट बुनियादी ढांचे को निष्क्रिय कर दिया है। हमलों का उद्देश्य कॉल डाटा रिकॉर्ड और एसएमएस संदेशों की चोरी करना था।
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