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UN: 'जबरन कब्जे वाले इलाके खाली करो', पीओके पर भारत की पाकिस्तान को फटकार; सुनाई खरी-खरी

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, संयुक्त राष्ट्र Published by: लव गौर Updated Thu, 26 Feb 2026 10:16 AM IST
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सार

UN Human Rights Council: वैश्विक मंच पर भारत ने पाकिस्तान को एक बार फिर तगड़ी फटकार लगाई है। संयुक्त राष्ट्र में भारत ने जम्मू-कश्मीर और पीओके को लेकर पाकिस्तान पर जमकर हमला बोला। इतना ही नहीं पीओके के जबरन कब्जा किए गए इलाकों को खाली करने की सख्त चेतावनी दी। 

India strongly reprimanded Pakistan at United Nations over Jammu and Kashmir and PoK
संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान को फटकार - फोटो : PTI/ANI
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विस्तार

भारत ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 61वें सत्र में पाकिस्तान को करारा जवाब देते हुए तगड़ी फटकार लगाई है। भारत ने इस्लामाबाद पर दुष्प्रचार फैलाने का आरोप लगाया और जोर देकर कहा कि जम्मू और कश्मीर का विकास पथ पाकिस्तान की आर्थिक समस्याओं के बिल्कुल विपरीत है।
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उच्च स्तरीय सत्र के दौरान भारत की फटकार
23 फरवरी से 31 मार्च तक आयोजित हो रहे सत्र में 25 फरवरी को आयोजित उच्च स्तरीय सत्र के दौरान भारत के जवाब देने के अधिकार का प्रयोग करते हुए भारत की प्रतिनिधि अनुपमा सिंह ने पाकिस्तान और इस्लामिक सहयोग संगठन (ओआईसी) द्वारा लगाए गए आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि इस समूह ने खुद को एक सदस्य देश के लिए 'प्रतिबिंब कक्ष' के रूप में इस्तेमाल होने दिया है।
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पाकिस्तान का लगातार दुष्प्रचार ईर्ष्या से भरा: भारत
अनुपमा सिंह ने कहा कि हम इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हैं। साथ ही यह भी जोड़ा कि पाकिस्तान का लगातार दुष्प्रचार ईर्ष्या से भरा हुआ है। सिंह ने भारत के उस चिरस्थायी रुख को दोहराया कि जम्मू और कश्मीर 'भारत का अभिन्न और अविभाज्य अंग था, है और हमेशा रहेगा।' उन्होंने कहा कि भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम और अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार, 1947 में इस क्षेत्र का भारत में विलय पूरी तरह से कानूनी और अपरिवर्तनीय था। उन्होंने कहा, 'इस क्षेत्र से संबंधित एकमात्र लंबित विवाद पाकिस्तान द्वारा भारतीय क्षेत्रों पर अवैध कब्जा है और उन्होंने इस्लामाबाद से अपने नियंत्रण वाले क्षेत्रों को खाली करने को कहा।

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के नियमित सत्र के उच्च स्तरीय खंड में, जिनेवा में प्रथम सचिव अनुपमा सिंह ने कहा, 'पाकिस्तान और ओआईसी द्वारा उच्च स्तरीय खंड के दौरान उठाए गए मुद्दों के जवाब में भारत को अपने उत्तर देने के अधिकार का प्रयोग करने के लिए विवश होना पड़ा है। हम इन आरोपों को स्पष्ट रूप से खारिज करते हैं। 

ओआईसी पर भी साधा निशाना
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के दुष्प्रचार को दोहराकर, ओआईसी यह प्रकट करता है कि वह किस हद तक एक सदस्य देश के प्रभाव में आ गया है, और उस देश की राजनीतिक बाध्यताओं के लिए एक प्रतिध्वनि कक्ष बनकर रह गया है। पाकिस्तान का निरंतर दुष्प्रचार ईर्ष्या से भरा है। हम इसे महत्व नहीं देना चाहते, लेकिन तथ्यों के आधार पर इसका खंडन करने के लिए हम कुछ बिंदु उठाएंगे। 

उन्होंने आगे कहा कि  जम्मू और कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य अंग था, है और हमेशा रहेगा। पाकिस्तान की किसी भी प्रकार की मनगढ़ंत बयानबाजी या दुस्साहसी दुष्प्रचार इस अटल तथ्य को नहीं बदल सकता कि जम्मू और कश्मीर का भारत में विलय 1947 के भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम और अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार पूरी तरह से कानूनी और अपरिवर्तनीय था। वास्तव में, एकमात्र लंबित मुद्दा यह पाकिस्तान द्वारा भारतीय क्षेत्रों पर अवैध कब्जा है। हम पाकिस्तान से जबरन कब्जे वाले क्षेत्रों को खाली करने का आह्वान करते हैं। 

ये भी पढ़ें: UN: 'अवैध रूप से कब्जाए इलाकों में मानवाधिकार उल्लंघन बंद करे पाकिस्तान', यूएन में गूंजा पीओके का मुद्दा

जम्मू-कश्मीर ने खारिज किया दुष्प्रचार
 
उन्होंने कहा कि जम्मू और कश्मीर में आम चुनाव और विधानसभा चुनावों में रिकॉर्ड मतदान इस बात का प्रमाण है कि वहां की जनता ने पाकिस्तान द्वारा प्रचारित आतंकवाद और हिंसा की विचारधारा को खारिज कर दिया है और विकास और लोकतंत्र के पथ पर आगे बढ़ रही है।

उन्होंने आगे कहा, 'अगर पिछले साल जम्मू और कश्मीर में उद्घाटन किया गया दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे पुल, चेनाब रेल पुल, फर्जी माना जाता है, तो पाकिस्तान को हकीकत की दुनिया में रहना चाहिए या शायद उसे यह अविश्वसनीय लगता है कि जम्मू और कश्मीर का विकास बजट आईएमएफ से मांगे गए हालिया राहत पैकेज से दोगुने से भी अधिक है।

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