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How Larijani was Killed?: दो हफ्ते तक अमेरिका-इस्राइल की पकड़ से रहे दूर; फिर कैसे मारे गए ईरान के नंबर-2 नेता

स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: Kirtivardhan Mishra Updated Wed, 18 Mar 2026 07:53 PM IST
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सार

28 फरवरी को अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद, अली लारिजानी ईरान का नेतृत्व करने वाले शीर्ष नेता बन गए थे। इसी के साथ वे इस्राइल की हिट लिस्ट में भी सबसे ऊपर थे। इस्राइल और अमेरिका की तरफ से ईरान के शीर्ष सैन्य और राजनीतिक नेतृत्व को खत्म करने का जो अभियान चलाया है, लारिजानी की हत्या उसी का एक निर्णायक हिस्सा है।

How Ali Larijani Was Killed in US Israel Attack on Iran War West Asia conflict Top Leadership of Iran Killed i
ईरान संघर्ष। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

इस्राइल और अमेरिका की तरफ से ईरान के खिलाफ युद्ध को आज 19 दिन हो चुके हैं। इस बीच इस्राइल-अमेरिका ने अब तक ईरान की लगभग पूरे शीर्ष नेतृत्व पर हवाई हमले किए हैं और इनमें पहले दिन सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई से लेकर 18वें दिन ईरान में नंबर-2 माने जाने वाले अली लारिजानी तक की जान गई है। इस्राइली राष्ट्रपति बेंजामिन नेतन्याहू ने दावा किया है कि लारिजानी की मृत्यु के बाद अब ईरान का पूरा नेतृत्व बिखर चुका है और अब उसे उम्मीद है कि ईरान में जनता सत्ता को अपने हाथ में ले लेगी। 
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नेतन्याहू के इस बयान से साफ है कि ईरान में लारिजानी का कद कितना बड़ा था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अपने इस कद के कारण ही लारिजानी शुरुआत से ही अमेरिका और इस्राइल की रडार पर थे, लेकिन दोनों ही देश बीते दो हफ्तों में उन पर हमले का मौका हासिल नहीं कर पाए थे। इसके बाद 16 मार्च की देर रात जैसे ही इस्राइल को लारिजानी की गतिविधि के बारे में जानकारी मिली, उन्हें निशाना बनाया गया। 
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सवाल-दर-सवाल जानते हैं कि अमेरिका-इस्राइल ने इस ऑपरेशन को कैसे अंजाम दिया...

इस्राइल ने लारिजानी को निशाने पर क्यों रखा था?

अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, युद्ध शुरू होने से पहले ही खामेनेई ने कथित तौर पर लारिजानी को एक ऐसी योजना तैयार करने का काम सौंपा था जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि इस्राइल और अमेरिका के किसी भी बड़े हमले (जिसमें शीर्ष नेतृत्व की हत्या भी शामिल हो) की स्थिति में ईरान की मौजूदा व्यवस्था बनी रहे बचा रहे। ऐसे में जब इस्राइल और अमेरिका के संयुक्त सैन्य अभियान में खामेनेई की मृत्यु हुई तो लारिजानी खुद-ब-खुद ईरान में दूसरी सबसे ताकतवर शख्सियत बन गए। 

यह भी पढ़ें: Iran-Israel: इस्राइल के हमले में अली लारिजानी और कमांडर सुलेमानी की मौत, ईरानी सरकारी मीडिया ने की पुष्टि

इस्राइल ने अली लारिजानी के खिलाफ कैसे चलाया अभियान?


1. ईरान की धरती पर खुफिया संसाधनों का इस्तेमाल
लारिजानी का पता लगाने के लिए इस्राइल ने बड़े पैमाने पर खुफिया संसाधनों को तैनात कर दिया था। बताया जाता है कि लारिजानी इस्राइली रडार और खुफिया तंत्र से बचने के लिए खुद काफी सतर्क थे। द यरुशलम पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, लारिजानी को लंबे समय से अंदाजा था कि इस्राइल उनके पीछे अपने खुफिया संसाधनों को लगा चुका है। इसलिए वे बीते दो हफ्तों से लगातार अपनी गुप्त लोकेशन बदल रहे थे।

हालांकि, इस्राइल ने अपने हवाई और ईरान में आधारित मानवीय खुफिया तंत्र के आधार पर उनका पता लगा लिया। इसे इस्राइल ने अपनी विशेष ट्रैकिंग क्षमता बताया। हालांकि, कुछ अपुष्ट एक्स और फेसबुक पोस्ट में इससे जुड़ी कॉन्स्पिरेसी थ्योरी भी हैं। इनमें दावा किया गया है कि इस्राइली जासूसी एजेंसी- मोसाद का एक 20 वर्षीय एजेंट लारिजानी के करीब ही मौजूद था और उसने लारिजानी की अंगूठी से अपनी एक हूबहू दिखने वाली अंगूठी को बदल लिया था। इस अंगूठी में ट्रैकिंग के लिए सिग्नल मौजूद थे, जिनके जरिए लारिजानी की लोकेशन की सही जानकारी मिली। हालांकि, इन दावों को लेकर कोई भी साक्ष्य सामने नहीं आए हैं। 

2. जानकारी मिलते ही तुरंत लिया गया फैसला
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस्राइल को अपने खुफिया तंत्र के जरिए 16 मार्च को लारिजानी के गुप्त ठिकाने की जानकारी मिली थी। इसमें सामने आया था कि वे तेहरान के पास पारदिस इलाके में अपनी बेटी के एक घर में छिपे हैं। इस खुफिया जानकारी मिलते ही इसे बिना किसी देरी के शीर्ष अधिकारियों के पास पहुंचाया गया। इसके बाद इस्राइली डिफेंस फोर्स के प्रमुख- लेफ्टिनेंट जनरल इयाल जमीर और राजनीतिक नेतृत्व ने तेजी से निर्णय लेते हुए अभियान को हरी झंडी दिखाई।

3. 1,600 किलोमीटर दूर हवाई मिशन को मंजूरी
लारिजानी की लोकेशन की खुफिया जानकारी की पुष्टि होने के बाद शीर्ष अफसरों ने इस्राइली वायुसेना के लड़ाकू विमानों को 1,600 किलोमीटर दूर ईरान में इस अहम मिशन को अंजाम देने के लिए तुरंत रवाना कर दिया। लोकेशन की सटीक जानकारी होने की वजह से इस्राइली वायुसेना ने लारिजानी की बेटी के घर पर एक सटीक हवाई हमला किया, जहां वे उस समय मौजूद थे। इस हमले के दौरान लारिजानी के बेटे और कई सलाहकार भी उनके साथ ही मौजूद थे। इस्राइली हमले में उनकी मौत की बात भी सामने आई है।

यह भी पढ़ें: Attack on Larijani: IDF का दावा- हमले में ईरानी सुरक्षा प्रमुख लारिजानी की मौत, कमांडर सुलेमानी भी मारे गए

हमलों में अब तक ईरान के कौन से शीर्ष नेताओं की मृत्यु हुई?

28 फरवरी से जारी अमेरिका-इस्राइल के हमलों में ईरान के कई शीर्ष नेताओं और सैन्य अधिकारियों की मृत्यु हुई है। 

28 फरवरी

  • अयातुल्ला अली खामेनेई, ईरान के सर्वोच्च नेता
  • अली शामखानी, शीर्ष सुरक्षा सलाहकार
  • मोहम्मद पाकपुर, ईरान रेवोल्यूशनरी गार्ड कोर के कमांडर
  • अब्दुलरहीम मौसवी, सशस्त्र बलों के चीफ ऑफ स्टाफ
  • अजीज नसीरजादेह, तत्कालीन रक्षा मंत्री

इनके अलावा, सर्वोच्च नेता के मुख्य सैन्य सचिव मोहम्मद शिराजी, सैन्य खुफिया प्रमुख सालेह असदी, ईरान के परमाणु अनुसंधान संगठन (एसपीएनडी) के अध्यक्ष हुसैन जबल अमेलियन और पूर्व अध्यक्ष रजा मुजफ्फर-निया, पुलिस खुफिया प्रमुख गुलामरेजा रजाइयां और सैन्य जनरल मोहसिन दरेबाघी, बहराम हुसैनी मुतलाक की भी मौत हुई।

तीन मार्च

मजीद इब्न अल-रजा: इन्हें 28 फरवरी के हमले के बाद नया रक्षा मंत्री नियुक्त किया गया था।
रजा खजाई: आईआरजीसी की विशेष 'कुद्स फोर्स' के शीर्ष सदस्य।

आठ और 12 मार्च के हमले

  • बेरूत में हुए हमलों में आईआरजीसी और कुद्स फोर्स के कई अधिकारियों की जान गई। इनमें वरिष्ठ वित्तीय अधिकारी मजीद हसीनी, लेबनान कोर के खुफिया प्रमुख अली रजा अजहर, फलस्तीन कोर के खुफिया प्रमुख अहमद रसूली और खुफिया अधिकारी हुसैन अहमदलू शामिल थे।
  • 12 मार्च को लेबनान में हिजबुल्ला के अंदर आईआरजीसी मिसाइल यूनिट के संचालन कमांडर अबू धर मोहम्मदी मारे गए।


17 मार्च के हमले

अली लारिजानी: राष्ट्रीय सुरक्षा प्रमुख और खामेनेई के बाद ईरान के सबसे प्रमुख नेता।
गुलामरेजा सुलेमानी: बसीज अर्धसैनिक बलों के कमांडर, जिन्हें दूसरे ठिकाने पर निशाना बनाया गया।


18 मार्च के हमले

इस्राइल ने यह भी दावा किया है कि उसने हालिया हवाई हमलों में ईरान के खुफिया मंत्री इस्माइल खतीब को भी मार गिराया है। 

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