विदेशी पैसे पर भारत का 'पहरा': FCRA के समर्थन में अमेरिका में भारत के राजदूत; बताया क्यों जरूरी है नया कानून?
भारत के अमेरिका में राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने FCRA में प्रस्तावित 2026 के बदलावों का बचाव करते हुए कहा है कि विदेशी फंडिंग को नियंत्रित करना राष्ट्रीय सुरक्षा और पारदर्शिता से जुड़ा एक संप्रभु कदम है। उन्होंने अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और अन्य देशों में लागू विदेशी वित्तीय प्रवाह से जुड़े कानूनों का हवाला दिया।
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विस्तार
अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने कहा है कि फॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) एक्ट (FCRA) में किए गए बदलावों का मकसद विदेशी फंडिंग में ज्यादा पारदर्शिता लाना है। उन्होंने उम्मीद जताई कि संगठन तय प्रक्रिया का पालन करते हुए ही विदेशी धन प्राप्त करेंगे। रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कई पोस्ट के जरिए क्वात्रा ने कहा कि सार्वजनिक और राजनीतिक क्षेत्रों में विदेशी वित्तीय प्रवाह को नियंत्रित करना राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं के मद्देनजर उठाया गया एक संप्रभु कदम है। उन्होंने इस संदर्भ में अमेरिका सहित कई देशों में लागू ऐसे ही कानूनों का भी हवाला दिया।
अमेरिका में विदेशी फंडिंग को लेकर कौन से कानून लागू हैं?
क्वात्रा ने कहा कि अमेरिका में 1938 से FARA (फॉरेन एजेंट्स रजिस्ट्रेशन एक्ट) और 2010 से FATCA (फॉरेन अकाउंट टैक्स कंप्लायंस एक्ट) लागू है। ऑस्ट्रेलिया ने 2018 में और कनाडा ने 2024 में कानून बनाया। UK की योजना जुलाई 2025 में लागू हुई। EU अभी कानून बना रहा है।
अमेरिकी सांसद की चिंता के बाद क्वात्रा ने क्या कहा?
क्वात्रा का एक्स पर यह बयान एक अमेरिकी सांसद द्वारा FCRA में किए गए संशोधनों पर चिंता जताए जाने के कुछ दिनों बाद आया। अमेरिकी सांसद ने दावा किया था कि इन बदलावों से भारतीय सरकार को चर्चों और चैरिटी संस्थाओं पर नियंत्रण करने की अनुमति मिल जाएगी।
रजिस्ट्रेशन रद्द होने पर संपत्तियों का क्या होता है?
क्वात्रा ने कहा कि जब किसी संगठन का FCRA रजिस्ट्रेशन रद्द या सरेंडर किया जाता है, तो उसके पास मौजूद विदेशी योगदान और उससे बनाई गई संपत्ति पहले से ही राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में आ जाती है। उन्होंने कहा कि यह प्रावधान 2010 से लागू है।
2026 के बिल में नया क्या जोड़ा गया है?
क्वात्रा ने कहा कि 2026 का बिल जो नई चीज जोड़ता है, वह है उन संपत्तियों की सुरक्षा के लिए एक अधिकृत अथॉरिटी और वापसी का एक रास्ता। अगर संगठन अपना रजिस्ट्रेशन बहाल कर लेता है, तो सभी संपत्तियां और बिना इस्तेमाल किए गए फंड पूरी तरह से वापस कर दिए जाते हैं।'
पूजा स्थलों की संपत्ति को लेकर क्या व्यवस्था होगी?
उन्होंने कहा कि पूजा स्थलों की अपनी सुरक्षा व्यवस्था होती है। जहां किसी रद्द किए गए संगठन ने पूजा स्थल से जुड़ी संपत्ति बनाई है, वहां पूजा की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए वह संपत्ति उसी धर्म के किसी अन्य FCRA-पंजीकृत संगठन को सौंप दी जाती है।
क्या नए कानून का मकसद विदेशी सहायता रोकना है?
राजदूत ने उन आशंकाओं को भी खारिज किया कि FCRA में किए गए बदलावों का मकसद सिविल सोसाइटी संगठनों को मिलने वाली विदेशी सहायता पर रोक लगाना है। क्वात्रा ने कहा कि हजारों संगठन FCRA के तहत पंजीकृत हैं और नियमित रूप से स्वास्थ्य, शिक्षा, आपदा राहत, अनुसंधान और मानवीय कार्यों के लिए विदेशी फंड प्राप्त करते हैं।
भारत में कितने NGO FCRA के दायरे में आते हैं?
उन्होंने कहा कि भारत में 30 लाख से ज्यादा NGO हैं, लेकिन इनमें से बहुत कम, यानी 14,450 संगठनों के पास ही FCRA रजिस्ट्रेशन है। क्वात्रा ने कहा कि इस प्रकार, सिविल सोसाइटी संगठनों का एक बड़ा हिस्सा पूरी तरह से इस कानून के दायरे से बाहर है। उन्होंने बताया कि भारत ने पहली बार 1976 में FCRA लागू किया था और 2010 में इसमें बदलाव करके ज्यादा आधुनिक ढांचा तैयार किया गया।
FCRA में पहले कब-कब बदलाव किए गए?
क्वात्रा ने कहा कि 2016, 2018 और 2020 में किए गए बदलावों ने FCRA को और मजबूत किया। 2026 का बिल और नियम इसी दिशा में अगला कदम हैं: ज्यादा पारदर्शिता, बेहतर गवर्नेंस और साफ नियम।
विदेशी फंडिंग को राष्ट्रीय सुरक्षा से क्यों जोड़ा गया?
क्वात्रा ने जोर देकर कहा कि सार्वजनिक और राजनीतिक क्षेत्रों में विदेशी पैसे के लेन-देन को रेगुलेट करना राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं के कारण उठाया गया एक संप्रभु कदम है। यह दुनिया भर के कई लोकतंत्रों में आधुनिक गवर्नेंस की एक स्वीकृत विशेषता है।
क्या FCRA संशोधन किसी खास समुदाय को निशाना बनाते हैं?
क्वात्रा ने उन दावों को भी खारिज किया, जिनमें कहा गया था कि FCRA में बदलाव किसी खास समुदाय को निशाना बनाने के लिए किए गए हैं। उन्होंने कहा कि हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। यह कानून धर्म, समुदाय या विचारधारा की परवाह किए बिना सभी संगठनों पर समान रूप से लागू होता है। हर धर्म के संगठनों द्वारा धार्मिक शिक्षा, पूजा स्थलों के रखरखाव और चैरिटी के कामों सहित आस्था-आधारित कल्याणकारी गतिविधियां विदेशी फंडिंग पाने के लिए योग्य बनी हुई हैं।
FCRA बिल 2026 में 'नामित अथॉरिटी' की क्या भूमिका होगी?
FCRA बिल, 2026 सरकार को एक 'नामित अथॉरिटी' बनाने का अधिकार देता है। यह अथॉरिटी विदेशी योगदान और विदेशी योगदान से बनाई गई संपत्तियों के प्रबंधन की जिम्मेदारी संभालेगी, जब किसी संगठन का FCRA रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया जाए, सरेंडर कर दिया जाए या रिन्यू न होने के कारण समाप्त हो जाए।
पूजा स्थल होने पर संपत्ति को लेकर क्या नियम है?
बिल में यह भी कहा गया है कि अगर संबंधित संपत्ति कोई पूजा स्थल है, तो अथॉरिटी को यह सुनिश्चित करना होगा कि उसका धार्मिक स्वरूप बना रहे।