West Asia: होर्मुज की सुरक्षा पर भारत-दक्षिण कोरिया साथ, राष्ट्रपति ली ने सप्लाई चेन सहयोग बढ़ाने पर दिया जोर
दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग ने कहा कि भारत और दक्षिण कोरिया को होर्मुज में सुरक्षित समुद्री आवाजाही, ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक सप्लाई चेन मजबूत करने के लिए साथ काम करना चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात से पहले कहा कि अमेरिका-ईरान तनाव के कारण तेल कीमतें बढ़ी हैं और आपूर्ति प्रभावित हुई है।
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दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग ने कहा है कि दक्षिण कोरिया और भारत को होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए मिलकर काम करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि वैश्विक सप्लाई चेन को स्थिर बनाने और ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने के लिए दोनों देशों के बीच साझेदारी बेहद अहम है।
पीएम मोदी के साथ होगी तीसरी बार मुलाकात
राष्ट्रपति ली ने एक साक्षात्कार में यह टिप्पणी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ प्रस्तावित शिखर वार्ता से पहले की। यह बैठक उनके राष्ट्रपति पद संभालने के बाद मोदी के साथ तीसरी आमने-सामने की मुलाकात मानी जा रही है।
होर्मुज में आई बाधा का असर पूरे विश्व पर पड़ा
उन्होंने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी संघर्ष के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर असर पड़ा है। इसके चलते वैश्विक तेल कीमतों में तेजी आई है और औद्योगिक उत्पादन के लिए जरूरी कच्चे माल की आपूर्ति भी प्रभावित हुई है।
भारत और दक्षिण कोरिया अपनी ऊर्जा जरूरतों ेक लिए पश्चिम एशिया पर निर्भर
राष्ट्रपति ली ने कहा कि दक्षिण कोरिया और भारत दोनों अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए पश्चिम एशिया से आने वाले कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस पर काफी हद तक निर्भर हैं। ऐसे में महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों की सुरक्षा हमारे नागरिकों की सुरक्षा और हमारे देशों के अस्तित्व से जुड़ा मुद्दा है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि दक्षिण कोरिया भारत के साथ लगातार संवाद बनाए रखेगा ताकि सभी जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित और स्वतंत्र रूप से गुजर सकें। साथ ही दोनों देश अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी इस साझा प्रतिबद्धता को मजबूत करेंगे।
महत्वपूर्ण खनिजों पर दिया जोर
ऊर्जा निर्भरता कम करने और आपूर्ति संकट से निपटने के लिए राष्ट्रपति ली ने महत्वपूर्ण खनिजों की सप्लाई चेन में सहयोग बढ़ाने की भी वकालत की। उन्होंने कहा कि पारंपरिक आयात मॉडल से आगे बढ़ते हुए दक्षिण कोरिया की तकनीकी क्षमता और भारत की खनन व रिफाइनिंग क्षमता को जोड़कर स्थिर और भरोसेमंद सप्लाई चेन बनाई जा सकती है।
दोनों देशों के बीच सहयोग केवल पारंपरिक क्षेत्रों तक सीमित नहीं
उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच सहयोग केवल पारंपरिक क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि एआई, रक्षा, शिपिंग, शिपबिल्डिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल और वित्तीय सेवाओं जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में भी साझेदारी को नई गति दी जाएगी।
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