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ईरान-अमेरिका सीजफायर: खबरों में सूत्रों के हवाले से दावों की भरमार, जंग कब थमेगी? फिलहाल जवाब किसी के पास नहीं

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, तेहरान/वॉशिंगटन/इस्लामाबाद Published by: Shivam Garg Updated Wed, 22 Apr 2026 12:44 PM IST
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सार

ईरान-अमेरिका संघर्ष विराम फिलहाल कागजों पर तो कायम है, लेकिन जमीन पर हालात अब भी अनिश्चित हैं। पाकिस्तान की भूमिका पर उठते सवाल और दोनों पक्षों के बीच भरोसे की कमी यह संकेत देती है कि शांति का रास्ता अभी लंबा और मुश्किल है।

Iran-US Ceasefire Uncertainty Deepens as Pakistan’s Mediation Role Faces Questions
US-Iran शांति वार्ता - फोटो : Amar Ujala Graphics
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विस्तार

ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव में संघर्ष विराम को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। जहां एक ओर सीजफायर को आगे बढ़ाने का एलान किया गया है, वहीं दूसरी तरफ शांति वार्ता की दिशा को लेकर स्पष्टता अभी भी नहीं है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच पाकिस्तान की मध्यस्थता पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

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पाकिस्तान की भूमिका पर शक, वार्ता में ठहराव के संकेत
ईरानी मीडिया नेटवर्क की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान द्वारा स्थापित संवाद चैनल से कोई ठोस नतीजा निकलता नजर नहीं आ रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि इस प्रक्रिया में केवल संदेशों का आदान-प्रदान हो रहा है, लेकिन कोई निर्णायक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि पाकिस्तान के शीर्ष सैन्य नेतृत्व ने ईरान का संदेश अमेरिका तक पहुंचाया, लेकिन अब तक यह स्पष्ट नहीं है कि वॉशिंगटन ने इसे स्वीकार किया है या नहीं। इससे वार्ता प्रक्रिया में अविश्वास और अनिश्चितता बढ़ गई है।
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ट्रंप ने बढ़ाया सीजफायर, लेकिन रुख अब भी सख्त
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अचानक संघर्ष विराम को आगे बढ़ाने का फैसला लिया। बताया जा रहा है कि यह कदम पाकिस्तान के अनुरोध के बाद उठाया गया, ठीक उस समय जब पहले तय समयसीमा खत्म होने वाली थी। हालांकि, ट्रंप ने ईरान की सरकार को कमजोर और बिखरी हुई बताते हुए सख्त रुख बरकरार रखा है। उन्होंने संकेत दिया कि अगर कोई ठोस समझौता सामने नहीं आता, तो सैन्य कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

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पाकिस्तान की कोशिश या समय खरीदने की रणनीति?
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने संघर्ष विराम बढ़ाने के फैसले का स्वागत करते हुए अमेरिका का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान शांति वार्ता को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। हालांकि, विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम पाकिस्तान की ओर से समय हासिल करने की कोशिश भी हो सकता है, ताकि वह खुद को एक अहम कूटनीतिक खिलाड़ी के रूप में पेश कर सके।

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ईरान में भी मतभेद, शांति प्रक्रिया पर असर
रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान के भीतर भी नेतृत्व स्तर पर मतभेद उभर रहे हैं, जिससे वार्ता और जटिल हो गई है। अलग-अलग धड़ों के बीच सहमति की कमी शांति प्रक्रिया को धीमा कर रही है। हालांकि पाकिस्तान में वार्ता के अगले दौर की बात कही जा रही है, लेकिन इसकी तारीख अब तक स्पष्ट नहीं है। ऐसे में यह सवाल बना हुआ है कि क्या यह कूटनीतिक प्रयास जंग को रोक पाएंगे या तनाव और बढ़ेगा।

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