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US-Iran War: 'ईरानी सेना की ताकत अब भी मजबूत', पेंटागन रिपोर्ट में खुलासा; ट्रंप-हेगसेथ के दावों पर उठे सवाल

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन Published by: Shivam Garg Updated Wed, 22 Apr 2026 09:51 AM IST
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सार

Pentagon Report on Iran Military Capabilities: क्या ईरान की सैन्य ताकत वाकई कमजोर हो गई है या अमेरिका के दावे हकीकत से दूर हैं? पेंटागन की नई खुफिया रिपोर्ट ने ट्रंप-हेगसेथ के बयानों पर सवाल खड़े कर दिए हैं और नया विवाद खड़ा कर दिया है।

Pentagon Intel Report Challenge Trump Claim, Says Iran Still Hold Strong Military Capability Amid Tension
ईरान की ताकत बरकरार? - फोटो : Amar Ujala Graphics
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विस्तार

अमेरिकी रक्षा विभाग (पेंटागन) की खुफिया शाखा की एक नई रिपोर्ट ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल मचा दी है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरान की सैन्य क्षमता अभी भी मुख्य रूप से मजबूत बनी हुई है, जिससे अमेरिकी नेतृत्व के हालिया बयानों पर सवाल खड़े हो गए हैं।
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अमेरिकी दावों से उलटी खुफिया रिपोर्ट
रिपोर्ट के अनुसार, डोनाल्ड ट्रंप और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने पहले दावा किया था कि हालिया संघर्षों के बाद ईरान की सेना को भारी नुकसान हुआ है और उसकी ताकत काफी कमजोर हो चुकी है। लेकिन पेंटागन की खुफिया रिपोर्ट इन दावों से पूरी तरह असहमत नजर आ रही है। 
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ट्रंप ने बढ़ाया युद्ध विराम, पाकिस्तान की अपील का दिया हवाला
इस आंतरिक खुफिया आकलन के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ युद्ध विराम को और बढ़ाने की घोषणा की है। उन्होंने इस निर्णय का कारण पाकिस्तानी नेतृत्व द्वारा एक नियोजित सैन्य हमले में देरी के लिए की गई सीधी अपील को बताया। यह घोषणा पिछले समय-सीमा समाप्त होने से कुछ घंटे पहले सार्वजनिक की गई।

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ईरान का तीखा जवाब
हालांकि, इस घोषणा का तेहरान से तत्काल विरोध हुआ। ईरान के संसद अध्यक्ष के एक सलाहकार, महदी मोहाम्मदी ने अमेरिकी कदम को खारिज करते हुए कहा कि हारने वाला पक्ष शर्तें तय नहीं कर सकता। उन्होंने तर्क दिया कि यह विस्तार ईरानी सरकार के लिए कुछ भी मायने नहीं रखता और अमेरिकी सेना के खिलाफ सैन्य वृद्धि का आह्वान किया।

एक्स पर एक पोस्ट में, मोहाम्मदी ने कहा कि ट्रंप द्वारा युद्ध विराम का विस्तार कुछ भी मायने नहीं रखता क्योंकि हारने वाला पक्ष शर्तें तय नहीं कर सकता। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि घेराबंदी जारी रखना बमबारी से अलग नहीं है और इसका जवाब सैन्य रूप से दिया जाना चाहिए।

कूटनीति असफल, तनाव बरकरार
बीते दिनों दोनों देशों के बीच इस्लामाबाद में हुई 21 घंटे की लंबी बातचीत के बाद एक दीर्घकालिक समझौते को सुरक्षित करने का पिछला प्रयास बिना किसी सफलता के समाप्त हो गया था, जिससे तनाव और बढ़ गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान की सैन्य शक्ति अभी भी पश्चिम एशिया में एक महत्वपूर्ण और प्रभावशाली स्थिति बनाए हुए है। उसके सैन्य ढांचे को पूरी तरह कमजोर नहीं किया जा सका है।

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