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परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में भारत की उपलब्धि: वैश्विक संस्थाओं ने कलपक्कम रिएक्टर को सराहा, जानें किसने क्या कहा
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
Published by: अमन तिवारी
Updated Fri, 10 Apr 2026 08:41 AM IST
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सार
भारत ने कलपक्कम में प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर शुरू कर परमाणु क्षेत्र में बड़ी कामयाबी पाई है। रूस के बाद भारत यह तकनीक पाने वाला दूसरा देश है। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी ने इसकी तारीफ की है।
भारत के परमाणु कार्यक्रम (सांकेतक तस्वीर)
- फोटो : ANI
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विस्तार
भारत ने परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। तमिलनाडु के कलपक्कम में स्थित 'प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर' (PFBR) ने सफलतापूर्वक काम करना शुरू कर दिया है। यह भारत के तीन चरणों वाले परमाणु कार्यक्रम के दूसरे चरण की महत्वपूर्ण शुरुआत है।
IAEA ने की तारीफ
अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के प्रमुख राफेल ग्रॉसी ने भारत के इस उपलब्धि की जमकर सराहना की है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बधाई देते हुए कहा कि यह कदम ईंधन की स्थिरता और परमाणु ऊर्जा के भविष्य के लिए बहुत जरूरी है।
IEA ने बताई बड़ी तकनीकी उपलब्धि
पेरिस स्थित अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने भी इसे एक बड़ी तकनीकी उपलब्धि बताया है। IEA ने शोसल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा 'कई वर्षों के विकास के बाद हासिल की गई इस महत्वपूर्ण तकनीकी उपलब्धि के लिए भारत, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वैज्ञानिकों व इंजीनियरों को बधाई।'
भारत बना दुनिया का दूसरा देश
भारत अब दुनिया का दूसरा ऐसा देश बन गया है जिसके पास यह खास तकनीक है। रूस के अलावा अभी तक कोई भी देश इसे सफलतापूर्वक नहीं चला पाया है। अमेरिका और जापान जैसे देशों ने भी दशकों पहले इस जटिल तकनीक में महारत हासिल करने की कोशिशें छोड़ दी थीं।
ये भी पढ़ें: Ukraine War: यूक्रेन में ऑर्थोडॉक्स ईस्टर पर 32 घंटे का संघर्षविराम, पुतिन का एलान; शांति की दिशा में अहम कदम
यह रिएक्टर 6 अप्रैल को रात 8:25 बजे चालू हुआ। इसमें ईंधन के रूप में प्लूटोनियम आधारित मिक्स्ड ऑक्साइड का इस्तेमाल होता है। रिएक्टर को ठंडा रखने के लिए तरल सोडियम का प्रयोग किया जाता है। यह अन्य रिएक्टरों के मुकाबले बहुत कम ईंधन खर्च करता है। खास बात यह है कि यह पुराने रिएक्टरों से निकले कचरे का इस्तेमाल ईंधन के रूप में करेगा। इससे परमाणु कचरा कम करने में भी मदद मिलेगी।
भविष्य की ऊर्जा जरूरतों के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि
यह सफलता भारत के परमाणु कार्यक्रम के जनक होमी जहांगीर भाभा के सपने को पूरा करने की दिशा में बड़ा कदम है। इससे भविष्य में थोरियम आधारित रिएक्टरों को चलाने का रास्ता साफ होगा। भारत सरकार ने परमाणु ऊर्जा से 100 गीगावाट बिजली पैदा करने का लक्ष्य रखा है। अभी भारत की क्षमता 8.7 गीगावाट है। उम्मीद है कि साल 2031-32 तक यह बढ़कर 22.48 गीगावाट हो जाएगी। इस रिएक्टर को 'भारतीय नाभिकीय विद्युत निगम' (BHAVINI) ने विकसित किया है। आने वाले महीनों में वैज्ञानिक इस पर कई प्रयोग करेंगे और फिर इसे बिजली ग्रिड से जोड़ दिया जाएगा।
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IAEA ने की तारीफ
अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के प्रमुख राफेल ग्रॉसी ने भारत के इस उपलब्धि की जमकर सराहना की है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बधाई देते हुए कहा कि यह कदम ईंधन की स्थिरता और परमाणु ऊर्जा के भविष्य के लिए बहुत जरूरी है।
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IEA ने बताई बड़ी तकनीकी उपलब्धि
पेरिस स्थित अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने भी इसे एक बड़ी तकनीकी उपलब्धि बताया है। IEA ने शोसल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा 'कई वर्षों के विकास के बाद हासिल की गई इस महत्वपूर्ण तकनीकी उपलब्धि के लिए भारत, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वैज्ञानिकों व इंजीनियरों को बधाई।'
भारत बना दुनिया का दूसरा देश
भारत अब दुनिया का दूसरा ऐसा देश बन गया है जिसके पास यह खास तकनीक है। रूस के अलावा अभी तक कोई भी देश इसे सफलतापूर्वक नहीं चला पाया है। अमेरिका और जापान जैसे देशों ने भी दशकों पहले इस जटिल तकनीक में महारत हासिल करने की कोशिशें छोड़ दी थीं।
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यह रिएक्टर 6 अप्रैल को रात 8:25 बजे चालू हुआ। इसमें ईंधन के रूप में प्लूटोनियम आधारित मिक्स्ड ऑक्साइड का इस्तेमाल होता है। रिएक्टर को ठंडा रखने के लिए तरल सोडियम का प्रयोग किया जाता है। यह अन्य रिएक्टरों के मुकाबले बहुत कम ईंधन खर्च करता है। खास बात यह है कि यह पुराने रिएक्टरों से निकले कचरे का इस्तेमाल ईंधन के रूप में करेगा। इससे परमाणु कचरा कम करने में भी मदद मिलेगी।
भविष्य की ऊर्जा जरूरतों के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि
यह सफलता भारत के परमाणु कार्यक्रम के जनक होमी जहांगीर भाभा के सपने को पूरा करने की दिशा में बड़ा कदम है। इससे भविष्य में थोरियम आधारित रिएक्टरों को चलाने का रास्ता साफ होगा। भारत सरकार ने परमाणु ऊर्जा से 100 गीगावाट बिजली पैदा करने का लक्ष्य रखा है। अभी भारत की क्षमता 8.7 गीगावाट है। उम्मीद है कि साल 2031-32 तक यह बढ़कर 22.48 गीगावाट हो जाएगी। इस रिएक्टर को 'भारतीय नाभिकीय विद्युत निगम' (BHAVINI) ने विकसित किया है। आने वाले महीनों में वैज्ञानिक इस पर कई प्रयोग करेंगे और फिर इसे बिजली ग्रिड से जोड़ दिया जाएगा।
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