प्रशांत महासागर में बढ़ेगी भारत की ताकत: आतंकवाद के खिलाफ न्यूजीलैंड कैसे बनेगा खास साथी? MEA ने बताया प्लान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की न्यूजीलैंड यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच समुद्री सुरक्षा, रक्षा सहयोग, व्यापार, शिक्षा, खेल समेत कई मुद्दों पर सहमति जताई। दोनों देशों ने कहा कि आपसी रिश्तों को मजबूत करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। समुद्री सहयोग पर नया समझौता दोनों देशों की साझेदारी को और मजबूती देगा।
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भारत-न्यूजीलैंड के बीच रणनीतिक साझेदारी और समुद्री सहयोग को लेकर विदेश मंत्रालय (एमईए) के सचिव (ईस्ट) रुद्रेंद्र टंडन ने शनिवार को बताया कि भारत हिंद महासागर का देश है और अपने आसपास के समुद्री क्षेत्रों में होने वाली गतिविधियों पर लगातार नजर रखता है। प्रशांत महासागर का क्षेत्र भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। भारत हमेशा न्यूजीलैंड को इस क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण और समान सोच वाले साझेदार के रूप में देखता है।
क्या है भारत और न्यूजीलैंड की रणनीतिक साझेदारी की सबसे बड़ी वजह?
राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान रुद्रेंद्र टंडन ने कहा, 'भारत हिंद महासागर का देश है। हम अपने आसपास के समुद्री क्षेत्रों में होने वाली गतिविधियों पर पूरी तरह सतर्क रहते हैं। प्रशांत महासागर हमारे लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री क्षेत्र है और हमने हमेशा न्यूजीलैंड को इस क्षेत्र की एक महत्वपूर्ण तथा समान सोच वाली शक्ति के रूप में देखा है।' प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने भारत-न्यूजीलैंड संबंधों में नई ऊर्जा भरने के लिए लगातार प्रयास किए हैं। इसी का परिणाम है कि दोनों देशों के रिश्ते अब रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक पहुंच चुके हैं।
इंडो-पैसिफिक में दोनों देशों की सोच कैसे एक जैसी है?
रुद्रेंद्र टंडन ने कहा, 'इस यात्रा का मकसद नियमों पर आधारित इंडो-पैसिफिक व्यवस्था को मजबूत करना है। हम न्यूजीलैंड को दुनिया के इस हिस्से में एक अहम साझेदार के रूप में देखते हैं, क्योंकि इंडो-पैसिफिक में नियमों पर आधारित व्यवस्था को मजबूत करने की हमारी कोशिशें एक जैसी हैं। हिंद महासागर के देश के तौर पर भारत के लिए यह बेहद महत्वपूर्ण है।' उन्होंने कहा कि हिंद महासागर और प्रशांत महासागर क्षेत्र के देशों के रूप में भारत और न्यूजीलैंड के बीच घनिष्ठ रणनीतिक संबंध होना जरूरी है। यही इस साझेदारी की मूल सोच और आधार है।
समुद्री सहयोग को नई दिशा देने की तैयारी क्यों?
रुद्रेंद्र टंडन ने बताया कि वर्ष 2025 में प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन की भारत यात्रा के दौरान रक्षा सहयोग पर एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए थे। अब उसी एमओयू के तहत समुद्री सहयोग से जुड़ा एक नया समझौता किया जाएगा। इससे समुद्री क्षेत्र में दोनों देशों के बीच सहयोग को और मजबूत करने के लिए एक संस्थागत ढांचा तैयार होगा। उन्होंने कहा कि समुद्री पड़ोसी होने के नाते भारत और न्यूजीलैंड के लिए विभिन्न क्षेत्रों में मिलकर काम करना समय की आवश्यकता है।
आतंकवाद पर भारत-न्यूजीलैंड एक सुर में
प्रधानमंत्री की आधिकारिक यात्रा के दौरान आयोजित विशेष मीडिया ब्रीफिंग में विदेश मंत्रालय के सचिव (पूर्व) रुद्रेंद्र टंडन ने कहा कि आतंकवाद और हिंसक उग्रवाद को लेकर भारत का रुख पूरी दुनिया अच्छी तरह जानती है। उन्होंने कहा कि भारत लगातार अंतरराष्ट्रीय समुदाय और अपने साझेदार देशों को यह याद दिलाता रहा है कि आतंकवाद विश्व शांति और वैश्विक सुरक्षा के लिए सबसे गंभीर खतरों में से एक है। इसी सोच के तहत भारत अपने मित्र देशों के साथ मिलकर इस चुनौती का मुकाबला कर रहा है।
संयुक्त कार्य समूह का उद्देश्य क्या होगा?
भारत विरोधी गतिविधियों और वर्ष 2024 में न्यूजीलैंड में आयोजित खालिस्तान जनमत संग्रह जैसे मामलों के संदर्भ में पूछे गए सवाल पर रुद्रेंद्र टंडन ने कहा कि आतंकवाद निरोधक संयुक्त कार्य समूह केवल एक पहल नहीं, बल्कि आतंकवादी नेटवर्क को पूरी तरह अलग-थलग करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि भारत और न्यूजीलैंड आतंकवाद तथा हिंसक उग्रवाद के मुद्दे पर समान सोच रखते हैं और इस खतरे को खत्म करने के लिए दोनों देश सबसे करीबी सहयोग के पक्षधर हैं।
दोहरे मापदंड पर विदेश मंत्रालय ने क्या कहा?
रुद्रेंद्र टंडन ने कहा कि आतंकवाद जैसे गंभीर खतरे से निपटने के दौरान किसी भी तरह के दोहरे मापदंड की कोई जगह नहीं हो सकती। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस चुनौती का सामना करने के लिए सभी देशों को समान और निष्पक्ष दृष्टिकोण अपनाना होगा। आतंकवाद निरोधक संयुक्त कार्य समूह का गठन भारत-न्यूजीलैंड रणनीतिक साझेदारी : रोडमैप 2030 के तहत किया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन द्वारा जारी संयुक्त बयान में आतंकवाद के हर स्वरूप और सीमा पार आतंकवाद की कड़ी निंदा की गई। बयान में 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले और 10 नवंबर 2025 को नई दिल्ली के लाल किले के पास हुई आतंकी घटना की भी स्पष्ट शब्दों में निंदा की गई।
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आतंकी फंडिंग रोकने के लिए दोनों देशों की क्या रणनीति है?
दोनों नेताओं ने आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस और एक समान नीति अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने आतंकियों की फंडिंग रोकने, सुरक्षित ठिकानों को खत्म करने और संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंधित आतंकी संगठनों तथा उनके वित्तीय समर्थकों के खिलाफ तत्काल और ठोस कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) जैसे बहुपक्षीय मंचों का प्रभावी इस्तेमाल करने की प्रतिबद्धता जताई।