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Bangladesh: 'अंतरिम शासन में भारत से संबंधों को लगा झटका, चुनाव के बाद सुधार की उम्मीद', विदेश सलाहकार का बयान

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका Published by: निर्मल कांत Updated Thu, 05 Feb 2026 10:20 PM IST
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सार

Bangladesh: बांग्लादेश में आम चुनाव से पहले विदेश सलाहकार तौहीद हुसैन ने कहा कि अंतरिम सरकार के दौरान भारत के साथ संबंधों में ठहराव आया, लेकिन यह बड़ा संकट नहीं था। उन्होंने उम्मीद जताई कि आगामी आम चुनाव के बाद निर्वाचित सरकार भारत के साथ संबंधों को फिर पटरी पर ला सकेगी। पढ़िए रिपोर्ट-

Interim govt dealt blow relations with India, hopes improvement after elections: Bangladesh Foreign Advisor
बांग्लादेश के विदेश सलाहकार तौहीद हुसैन - फोटो : एक्स/बांग्लादेश विदेश मंत्रालय
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विस्तार

बांग्लादेश के विदेश मामलों के सलाहकार तौहीद हुसैन ने बृहस्पतिवार को स्वीकार किया कि भारत के साथ संबंधों में मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाले अंतरिम शासन के दौरान झटका लगा। हालांकि, उन्होंने उम्मीद जताई कि आगामी आम चुनाव के बाद चुनी हुई सरकार के कार्यभार संभालने पर दोनों देशों के रिश्ते फिर पटरी पर आ सकते हैं।
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तौहीद हुसैन ने क्या कहा?
  • मीडिया से बातचीत में विदेश सलाहकार तौहीद हुसैन ने कहा कि अंतरिम सरकार के दौरान संबंधों में कुछ ठहराव जरूर आया, लेकिन भारत के साथ रिश्ते बांग्लादेश के लिए हमेशा अहम बने रहे।
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  • बांग्लादेश में आम चुनाव से एक हफ्ते पहले उन्होंने यह टिप्पणी की है। ये चुनाव अगस्त 2024 में हुए जनआंदोलन के बाद शेख हसीना सरकार के सत्ता से हटने के बाद पहली बार हो रहे हैं।
  • भारत में बांग्लादेश के उप उच्चायुक्त के रूप में काम कर चुके हुसैन ने कहा कि उन्हें भरोसा है कि अगली निर्वाचित सरकार भारत के साथ रिश्तों को ज्यादा सहज बनाने के रास्ते तलाश सकेगी।
  • यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार 5 अगस्त 2024 को छात्र आंदोलन के बाद सत्ता में आई थी। इसके बाद 78 वर्षीय शेख हसीना भारत में रह रही हैं।

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राष्ट्र हित व अलग-अलग धारणाओं के कारण रिश्तों की रफ्तार हुई धीमी
बांग्लादेश के एक विशेष न्यायाधिकरण ने पिछले साल हसीना को मानवता के खिलाफ अपराधों के आरोप में मौत की सजा सुनाई थी और ढाका ने उनके प्रत्यर्पण की मांग भी की है। भारत की ओर से प्रत्यर्पण न होने की स्थिति पर सवाल पूछे जाने पर हुसैन ने कहा कि निराशावादी होने की जरूरत नहीं है। हुसैन ने माना कि पिछले 18 महीनों में भारत-बांग्लादेश संबंध अपने निचले स्तर पर पहुंचे, खासकर उस समय जब बांग्लादेश के पाकिस्तान के साथ राजनीतिक, व्यापारिक और रक्षा सहयोग बढ़ा। हालांकि, उन्होंने इसे बड़ा संकट नहीं, बल्कि आगे बढ़ने में ठहराव का दौर बताया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय हितों को लेकर अलग-अलग धारणाओं के कारण रिश्तों की रफ्तार धीमी हुई। साथ ही, अंतरिम सरकार ने अमेरिका सहित अन्य देशों के साथ व्यापार वार्ताओं को आगे बढ़ाकर अगली सरकार का बोझ कम करने की कोशिश की।

कट्टरपंथी जमात ने भारत के साथ संबंधों को सुधारने का किया वादा 
बांग्लादेश में 12 फरवरी को होने वाले राष्ट्रीय चुनाव से ठीक पहले इस्लामी कट्टरपंथी दल रह चुकी जमात-ए-इस्लामी पार्टी ने चुनावी घोषणा-पत्र में भारत के साथ रचनात्मक संबंध सर्वोपरि रखते हुए दीर्घकालीन हितों के साथ रिश्ते सुधारने का वादा किया।  पार्टी ने भारत समेत नेपाल, भूटान, म्यांमार, श्रीलंका, मालदीव व थाईलैंड के साथ भी शांतिपूर्ण और सहयोगी संबंध बनाए रखने का वादा किया लेकिन दिलचस्प यह है कि इसमें चीन, पाकिस्तान का कोई जिक्र नहीं है।

जमात ने  कहा है कि उसकी विदेश नीति आपसी सम्मान और निष्पक्षता के सिद्धांतों पर आधारित होगी और सभी से मैत्रीपूर्ण रिश्ते रखेगी। बता दें कि जमात-ए-इस्लामी पार्टी अतीत में कट्टरपंथी विचारधारा वाली रही है और भारत से रिश्तों का विरोध करती रही है। लेकिन अब पार्टी घोषणा पत्र के अनुसार, क्षेत्रीय स्थिरता और आर्थिक सहयोग बांग्लादेश के दीर्घकालिक हितों के लिए बेहद अहम हैं।


 
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