Iran: कुवैत एयरपोर्ट पर हमले के आरोपों से ईरान का इनकार, कहा- पैट्रियट मिसाइल सिस्टम की खराबी से हुआ नुकसान
ईरान ने कुवैत एयरपोर्ट पर हमले के आरोपों को खारिज करते हुए दावा किया कि नुकसान अमेरिकी पैट्रियट रक्षा प्रणाली की विफलता से हुआ। भारत में ईरानी राजदूत मोहम्मद फतहाली ने कहा कि ईरान शांति और कूटनीति का समर्थक है। आइए विस्तार से जानते हैं।
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विस्तार
भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फतहाली ने कुवैत अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हुए हमले में ईरान की भूमिका से इनकार किया है। उन्होंने कहा है कि तेहरान की सैन्य जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि एयरपोर्ट की ओर कोई ईरानी मिसाइल नहीं दागी गई थी। उन्होंने दावा किया कि एयरपोर्ट को हुआ नुकसान अमेरिकी निर्मित पैट्रियट रक्षा प्रणाली की विफलता के कारण हुआ, जिसके इंटरसेप्टर मिसाइल लक्ष्य भेदने में असफल रहने के बाद टर्मिनल क्षेत्र में गिर गए।
ईरान अपनी संप्रभुता की रक्षा करेगा
आईएएनएस को दिए एक साक्षात्कार में फतहाली ने कहा कि ईरान अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए सभी आवश्यक क्षमताओं का उपयोग करेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि कुवैत और बहरीन द्वारा अपने क्षेत्र और सैन्य सुविधाओं का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ हमलों के लिए करने देना अंतरराष्ट्रीय कानून और अच्छे पड़ोसी संबंधों का उल्लंघन है।
राजदूत ने कहा कि ईरान युद्ध नहीं चाहता और विवादों के समाधान के लिए हमेशा कूटनीति और संवाद का समर्थन करता है। हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि 8 अप्रैल को घोषित युद्धविराम का अमेरिकी बलों ने कई बार उल्लंघन किया, जिसके जवाब में ईरान ने आत्मरक्षा के अधिकार के तहत कार्रवाई की।
ट्रंप पर क्या बोले फतहाली?
अमेरिकी संसद में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान संबंधी सैन्य शक्तियों को सीमित करने वाले प्रस्ताव पर फतहाली ने कहा कि यह अमेरिका का आंतरिक मामला है, लेकिन तनाव कम करने और क्षेत्रीय शांति बनाए रखने की दिशा में उठाया गया कोई भी कदम सकारात्मक है।
इस्राइल-लेबनान संघर्ष का भी किया जिक्र
इस्राइल-लेबनान संघर्ष पर ईरान के रुख को स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि लेबनान की संप्रभुता, स्वतंत्रता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्थायी शांति के लिए लेबनान के खिलाफ युद्ध समाप्त होना आवश्यक है।
वैश्विक समुदाय के लिए संदेश देते हुए फतहाली ने कहा कि ईरान का इतिहास शांति, सह-अस्तित्व और संवाद का रहा है। उन्होंने कहा कि स्थायी शांति और सुरक्षा केवल अंतरराष्ट्रीय कानून के सम्मान, देशों के अधिकारों की मान्यता और रचनात्मक संवाद के जरिए ही संभव है। साथ ही उन्होंने कहा कि ईरान आपसी सम्मान और साझा हितों के आधार पर सहयोग और बातचीत के लिए हमेशा तैयार है।