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रणनीति: ईरान का थकाऊ युद्ध बढ़ाएगा US की मुश्किलें, पश्चिम एशिया के चक्रव्यूह में फंस सकती है अमेरिकी सेना
आशुतोष भाटिया, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Pavan
Updated Tue, 03 Mar 2026 07:58 AM IST
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सार
ईरान अब तक लो-ग्रेड मिसाइलों से हमला कर रहा था, ताकि अमेरिका अपने इंटरसेप्टर मिसाइल लो-ग्रेड मिसाइलों के खिलाफ खर्च कर दें। जब ईरान हाइपरसोनिक मिसाइल फायर करेगा तो रोकने के लिए ज्यादा कुछ नहीं बचेगा। फिर इनको असली मार पड़ेगी। अमेरिका अपने सैनिकों के बॉडी बैग्स स्वीकार नहीं कर सकता है। जमीनी लड़ाई में आने की अमेरिका की हिम्मत नहीं है।
यूएसएस गेराल्ड फोर्ड (फाइल फोटो)
- फोटो : ANI
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विस्तार
पश्चिम एशिया में छिड़ा संघर्ष अब ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है, जिसकी कल्पना शायद अमेरिकी युद्ध नीतिकारों ने नहीं की थी। ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के जरिये खामनेई के खात्मे के बाद यह युद्ध अमेरिका के लिए किसी त्वरित जीत के बजाय एक लंबी और महंगी चुनौती साबित हो सकता है। ईरान की रणनीति अमेरिका को लंबे और थका देने वाले युद्ध की ओर धकेलने की दिख रही है। अमेरिकी अड्डों पर हुए मिसाइल हमलों और कुवैत में कई लड़ाकू विमान गिराए जाने की सूचनाओं ने वाशिंगटन की वॉर गेमिंग पर सवाल खड़े किए हैं। अमेरिका सऊदी अरब के तेल क्षेत्रों और व्यापारिक केंद्रों की सुरक्षा ढाल बनने में नाकाम रहा है। यह अमेरिकी योजना के बिल्कुल विपरीत है।
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ईरान की रणनीति
ईरान की रणनीति वॉर ऑफ एट्रिशन यानी लंबे और थकाऊ युद्ध की है। अमेरिका और इस्राइल की बेहतर एयरपावर से बचाव के लिए उसने अपने अहम हथियार भूमिगत बंकरों में सुरक्षित कर लिए हैं। उसका इरादा ड्रोन एवं मिसाइलों से अमेरिका के प्रतिष्ठित ठिकानों पर निशाना साधने का है। इससे दुश्मन के अजेय होने की छवि को नुकसान पहुंचेगा और घरेलू मोर्चे पर राजनीतिक दबाव भी बढ़ेगा।
यह भी पढ़ें - तेहरान पर अमेरिकी हमले का मकसद: रुबियो बोले- स्कूल और नागरिक नहीं, केवल ईरान की मिसाइल और नौसैनिक ताकत पर वार
विशेषज्ञ की राय
रक्षा विशेषज्ञ मेजर जनरल जीडी बख्शी ने कहा कि ट्रंप ने बहुत बड़ी गलती की है। पहली ही स्ट्राइक में ईरान का शीर्ष नेतृत्व साफ कर दिया। अब इस युद्ध पर नियंत्रण नहीं रह गया है। इससे वैश्विक मंदी आ सकती है, जिससे अमेरिका भी अछूता नहीं रहेगा। ईरान ने इनका युद्धपोत हिट किया तो 250 सैनिक मारे जाएंगे। अब यह अपना एयरक्राफ्ट कैरियर लिंकन छुपाते फिर रहे हैं। ट्रंप बुरी तरह फंसने वाले हैं। उनके खिलाफ महाभियोग भी चलाया जाए तो मुझे आश्चर्य नहीं होगा।
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ईरान की रणनीति
ईरान की रणनीति वॉर ऑफ एट्रिशन यानी लंबे और थकाऊ युद्ध की है। अमेरिका और इस्राइल की बेहतर एयरपावर से बचाव के लिए उसने अपने अहम हथियार भूमिगत बंकरों में सुरक्षित कर लिए हैं। उसका इरादा ड्रोन एवं मिसाइलों से अमेरिका के प्रतिष्ठित ठिकानों पर निशाना साधने का है। इससे दुश्मन के अजेय होने की छवि को नुकसान पहुंचेगा और घरेलू मोर्चे पर राजनीतिक दबाव भी बढ़ेगा।
- जमीनी हमला: विशेषज्ञों की राय में ईरान की कोशिश दुश्मन को जमीनी आक्रमण के लिए उकसाने की दिख रही है। युद्ध जमीन पर आने पर ईरान की बड़ी सेना व दुर्गम भौगोलिक परिस्थितयां अमेरिका व इस्राइल के लिए इसे अफगानिस्तान या वियतनाम जैसा अंतहीन युद्ध भी बना सकते हैं।
- अराघची का बयान: ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने बताया कि शीर्ष कमांडरों को खोने के बाद उन्हें फौरन रिप्लेस कर लिया गया है। उन्होंने दावा किया कि इस युद्ध में दूसरे पक्ष के लिए कोई विजय नहीं है। विकेंद्रीकृत कमान के कारण ईरान का मिसाइल नेटवर्क नेतृत्व की कमी के बावजूद सक्रिय है।
- इस्राइल पर प्रभाव: छोटा देश होने के नाते इस्राइल की अर्थव्यवस्था तेज और निर्णायक युद्ध के लिए बनी है, लंबे युद्ध के लिए नहीं। लाखों नागरिक (रिजर्विस्ट) दफ्तर छोड़कर मोर्चे पर तैनात हैं, जिससे हाई-टेक और उत्पादन क्षेत्र प्रभावित रहेगा। ईरान युद्ध को लंबा खींचने में कामयाब रहा तो इस्राइल की अर्थव्यवस्था पतली हो सकती है, इसलिए इस्राइल युद्ध को जल्द खत्म करने के लिए आक्रामक रुख अपनाता है।
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विशेषज्ञ की राय
रक्षा विशेषज्ञ मेजर जनरल जीडी बख्शी ने कहा कि ट्रंप ने बहुत बड़ी गलती की है। पहली ही स्ट्राइक में ईरान का शीर्ष नेतृत्व साफ कर दिया। अब इस युद्ध पर नियंत्रण नहीं रह गया है। इससे वैश्विक मंदी आ सकती है, जिससे अमेरिका भी अछूता नहीं रहेगा। ईरान ने इनका युद्धपोत हिट किया तो 250 सैनिक मारे जाएंगे। अब यह अपना एयरक्राफ्ट कैरियर लिंकन छुपाते फिर रहे हैं। ट्रंप बुरी तरह फंसने वाले हैं। उनके खिलाफ महाभियोग भी चलाया जाए तो मुझे आश्चर्य नहीं होगा।
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