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Iran: ईरान ने यूरोपीय संघ के राजदूतों को किया तलब, रिवोल्यूशनरी गार्ड को आतंकी घोषित करने पर जताया विरोध

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, तेहरान Published by: अमन तिवारी Updated Mon, 02 Feb 2026 01:43 PM IST
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सार

ईरान ने यूरोपीय संघ के राजदूतों को बुलाकर रिवोल्यूशनरी गार्ड को आतंकी घोषित करने का विरोध किया है। यह तनाव ईरान में प्रदर्शनों पर हुई हिंसक कार्रवाई के बाद बढ़ा है। अमेरिका ने क्षेत्र में युद्धपोत तैनात किए हैं, जबकि ईरान ने जवाबी कार्रवाई और सैन्य अभ्यास की चेतावनी दी है।

Iran summons all EU ambassadors to protest the designation of the Revolutionary Guard as terrorist group
ईरान - फोटो : Adobestock
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विस्तार
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ईरान और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच कूटनीतिक तनाव बढ़ गया है। एपी की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने तेहरान में मौजूद यूरोपीय संघ के राजदूतों को तलब किया है। ईरान ने यह कदम यूरोपीय संघ के उस फैसले के विरोध में उठाया है, जिसमें उसने ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड को आतंकवादी संगठनों की सूची में शामिल कर दिया है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने ईयू के इन फैसले पर अपनी कड़ी नाराजगी जाहिर की। ईरान का कहना है कि यूरोपीय संघ का यह फैसला पूरी तरह से गलत और उकसाने वाला है। 
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टकराव का खतरा बरकरार
यह तनाव ऐसे समय में बढ़ा है जब ईरान पर अमेरिकी सैन्य हमले का खतरा मंडरा रहा है। अमेरिका ने अपने युद्धपोत यूएसएस अब्राहम लिंकन और कई मिसाइल नष्ट करने वाले जहाजों को मिडिल ईस्ट भेज दिया है। ईरान में प्रदर्शनकारियों पर हुई कड़ी कार्रवाई और फांसी की आशंकाओं के बीच अमेरिका ने यह सैन्य तैनाती की है। हालांकि, अभी यह साफ नहीं है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बल प्रयोग करेंगे या नहीं। इस बीच, क्षेत्र के अन्य देश युद्ध रोकने के लिए कूटनीति का सहारा ले रहे हैं।
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क्या है मामला?
यूरोपीय संघ ने पिछले हफ्ते रिवोल्यूशनरी गार्ड को आतंकी सूची में डाला था। इसका मुख्य कारण जनवरी में हुए देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों को बेरहमी से कुचलना बताया गया। इन प्रदर्शनों में हजारों लोग मारे गए और हजारों को हिरासत में लिया गया। अमेरिका और कनाडा पहले ही इस संगठन को आतंकी घोषित कर चुके हैं। हालांकि यह फैसला काफी हद तक प्रतीकात्मक है, लेकिन इससे ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ेगा, क्योंकि वहां की अर्थव्यवस्था में इस गार्ड का बहुत बड़ा प्रभाव है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता क्या कहा?
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने बताया कि राजदूतों को बुलाने की प्रक्रिया रविवार से शुरू हो गई थी। उन्होंने कहा कि ईरान इस अवैध और गलत कदम का जवाब देने के लिए कई विकल्पों पर विचार कर रहा है। जल्द ही जवाबी कार्रवाई के बारे में फैसला लिया जाएगा। वहीं, ईरान की संसद के स्पीकर ने 2019 के एक कानून का हवाला देते हुए कहा, अब ईरान भी यूरोपीय संघ की सभी सेनाओं को आतंकवादी समूह मानेगा।

अमेरिकी ने दी चेतावनी
रिवोल्यूशनरी गार्ड ईरान की 1979 की इस्लामिक क्रांति से एक ऐसी ताकत के रूप में उभरा था, जिसका मकसद शिया मौलवी-पर्यवेक्षित सरकार की रक्षा करना था। बाद में इसे संविधान में शामिल किया गया। आज यह ईरान की नियमित सेना के बराबर शक्तिशाली है। इस बीच ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में सैन्य अभ्यास भी शुरू किया है। यह समुद्री रास्ता दुनिया के तेल व्यापार के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। अमेरिकी ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी है कि वह व्यापारिक जहाजों या अमेरिकी युद्धपोतों के काम में बाधा न डाले।

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