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Hindi News ›   World ›   Iran Supreme Leader Ayatollah Ali Khamenei Largest State Funeral Burial after 131 days Mojtaba Khamenei explai

Explainer: छह दिन, पांच शहर और 3000 KM की अंतिम यात्रा, 131 दिन बाद ऐसे सुपुर्द-ए-खाक किए जाएंगे खामेनेई

Wed, 01 Jul 2026 07:49 AM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Wed, 01 Jul 2026 07:49 AM IST
सार

ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की 28 फरवरी को अमेरिका-इस्राइल के हमले में मौत हो गई थी। इस घटना में उनके परिवार के कई सदस्यों की भी जान चली गई थी। हालांकि, अली खामेनेई घायल होने के बाद बच गए। माना जा रहा है कि अपने पिता के जनाजे और सुपुर्द-ए-खाक से जुड़े कार्यक्रम में वे भी शामिल हो सकते हैं। 

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Iran Supreme Leader Ayatollah Ali Khamenei Largest State Funeral Burial after 131 days Mojtaba Khamenei explai
ईऱान और इराक से गुजरेगी अयातुल्ला अली खामेनेई की अंतिम यात्रा। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

28 फरवरी को अमेरिका और इस्राइल ने तेहरान में एक भूमिगत ठिकाने पर सीधा हमला कर ईरान के तत्कालीन सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई की हत्या कर दी थी। उस घटना को अब चार महीने से ज्यादा का समय बीत चुका है, लेकिन खामेनेई का न तो अब तक जनाजा निकाला गया है और न ही उन्हें सुपुर्द-ए-खाक ही किया जा सका है। ईरानी शासन ने हाल ही में उनकी अंतिम यात्रा के लिए 4 जुलाई से 9 जुलाई तक का कार्यक्रम तय किया था। इसके लिए भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी आमंत्रित किया गया है। 
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ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर अयातुल्ला अली खामेनेई की अंतिम यात्रा और उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किए जाने की प्रक्रिया चार महीने तक शुरू क्यों नहीं की गई? अब ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर को दफनाने की प्रक्रिया को कैसे शुरू किया जाएगा? इसमें छह दिन का समय क्यों लगेगा? खामेनेई की अंतिम यात्रा कहां-कहां से गुजरेगी और इसमें कितने लोगों के जुटने की संभावना है? इस पूरे कार्यक्रम की जिम्मेदारी कौन उठा रहा है और इसे लेकर तैयारियां कैसे की गई हैं? क्या अली खामेनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई सुप्रीम लीडर बनने के बाद पहली बार अपने पिता की अंतिम यात्रा में नजर आएंगे? आइये जानते हैं...
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तीन महीने क्यों अटकी खामेनेई को सुपुर्द-ए-खाक किए जाने की प्रक्रिया?

ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को सुपुर्द-ए-खाक करने में लगभग चार महीने की देरी की मुख्य वजह अमेरिका-इस्राइल से ईरान का लगातार जारी युद्ध, सुरक्षा चिंताएं, कूटनीतिक रणनीतियां और धार्मिक प्रतीकवाद रहे। पहले खामेनेई की अंतिम यात्रा और सुपुर्द-ए-खाक की पूरी प्रक्रिया 4 से 6 मार्च के बीच होनी थी, लेकिन इसे टाल दिया गया। 

सुरक्षा चिंताएं और युद्ध का माहौल: यह देरी सीधे तौर पर युद्ध, युद्धविराम और उसके बाद की बातचीत प्रक्रिया का नतीजा थी। ईरानी शासन एक बड़े सार्वजनिक आयोजन को दुश्मनों के लिए निशाना बनाने लायक एक बड़ा अवसर मान रहा था। इसलिए ईरान ने तब तक प्रमुख चेहरों और लाखों लोगों की भीड़ जुटाने का जोखिम नहीं उठाया, जब तक कि तनाव कम न हो जाए। 

कूटनीतिक रणनीति और जीत का संदेश: विशेषज्ञों के मुताबिक, यह देरी केवल सुरक्षा कारणों से नहीं थी, बल्कि ईरान एक 'जीत' का इंतजार कर रहा था। अमेरिका के साथ शांति समझौते  के करीब पहुंचने के बाद ईरान खामेनेई को एक पीड़ित के बजाय विजेता के रूप में दफनाने की मंशा रखता है।



लॉजिस्टिक चुनौतियां और पुरानी दुर्घटनाओं का डर: जानकारों के मुताबिक, ईरान 1989 में अयातुल्ला खुमैनी और 2020 में अमेरिकी हमले में मारे गए जनरल कासिम सुलेमानी के अंतिम संस्कार के दौरान हुई जानलेवा भगदड़ जैसी घटनाओं से बचना चाह रहा है। ईरान और इराक के कई शहरों में लाखों शोक मनाने वालों की भीड़ को सुरक्षित तरीके से संभालने के लिए अभूतपूर्व रसद और सुरक्षा तैयारियों की जरूरत है, जिसके लिए एक तंत्र स्थापित किया जा रहा है।

धार्मिक अहमियत: सुपुर्द-ए-खाक का समय जानबूझकर शिया मुसलमानों के पवित्र शोक के महीने मुहर्रम के साथ रखा गया। 9 जुलाई को होने वाला उनका अंतिम संस्कार इस्लाम के चौथे इमाम, इमाम सज्जाद की शहादत की बरसी की पूर्व संध्या पर निर्धारित किया गया।
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Iran Supreme Leader Ayatollah Ali Khamenei Largest State Funeral Burial after 131 days Mojtaba Khamenei explai
अयातुल्ला अली खामेनेई की अंतिम यात्रा का कार्यक्रम। - फोटो : अमर उजाला
अमेरिका को प्रतीकात्मक संदेश: अंतिम यात्रा से जुड़े कार्यक्रमों की शुरुआत 4 जुलाई से की जानी है, जो कि अमेरिका के 250वें स्वतंत्रता दिवस की भी तारीख है। यह अमेरिका के खिलाफ ईरान के वैचारिक अस्तित्व, प्रतिरोध और कड़े विरोध का एक स्पष्ट राजनीतिक संदेश देने के लिए किया गया है।


ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर के अंतिम कार्यक्रम में क्या होगा?

पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की अंतिम यात्रा और सुपुर्द-ए-खाक किए जाने की प्रक्रिया 4 और 5 जुलाई, 2026 को ईरान की राजधानी तेहरान में शुरू होगी। इसकी शुरुआत तेहरान के इमाम खुमैनी मुसल्ला में एक विदाई समारोह के साथ होगी। यह प्रार्थना परिसर बड़े पैमाने पर होने वाले राजकीय धार्मिक आयोजनों और राष्ट्रीय शोक के लिए मुख्य केंद्र है। अंतिम यात्रा से पहले उनके पार्थिव शरीर को दर्शन और शोक व्यक्त करने के लिए तीन दिनों तक इसी परिसर में रखा जाएगा।
 

अंतिम यात्रा कहां से गुजरेगी और कितने लोगों के जुटने की संभावना? 

इस विदाई समारोह के बाद 6 जुलाई को तेहरान में मुख्य जनाजा निकाला जाएगा, जो इमाम हुसैन स्क्वायर से शुरू होकर ऐतिहासिक आजादी स्क्वायर तक लगभग 10 किलोमीटर की दूरी तय करेगा। तेहरान में प्रक्रिया पूरी होने के बाद उनके पार्थिव शरीर को ईरान से इराक के दो शहरों- नजफ और कर्बला के पवित्र स्थानों पर ले जाएगा। बताया गया है कि इराकी जनजातियों, धार्मिक विद्वानों और राजनीतिक हस्तियों के खास अनुरोध के बाद इस अंतिम यात्रा के मार्ग में इराक को भी शामिल किया गया, जिसके कारण इस प्रक्रिया में छह दिन का समय लगेगा। इसके बाद उनकी शव यात्रा ईरान के अन्य पवित्र शहरों- कौम और मशहद पहुंचेंगी। 

इतने बड़े कार्यक्रम के लिए ईरान-इराक में क्या तैयारियां?

ईरानी अधिकारियों को उम्मीद है कि यह अंतिम यात्रा इस्लामिक गणराज्य के इतिहास की सबसे बड़ी सभाओं में से एक होगी। ऐसे में खामेनेई के जनाजे और सुपुर्द-ए-खाक के लिए ईरान और इराक में अभूतपूर्व सुरक्षा और रसद से जुड़ी तैयारियां की गई हैं। अतीत में अयातुल्ला खुमैनी (1989) और जनरल कासिम सुलेमानी (2020) के जनाजे में हुई जानलेवा भगदड़ जैसी घटनाओं से बचने के लिए अधिकारी विशेष सतर्कता बरत रहे हैं। अधिकारियों पर लगभग 45 डिग्री सेल्सियस के उच्च तापमान में इतनी बड़ी भीड़ का प्रबंधन करने की जिम्मेदारी है।

Iran Supreme Leader Ayatollah Ali Khamenei Largest State Funeral Burial after 131 days Mojtaba Khamenei explai
अयातुल्ला अली खामेनेई की अंतिम यात्रा का कार्यक्रम। - फोटो : अमर उजाला

1. सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के लिए आईआरजीसी जुटेगी

  • इस पूरे आयोजन की देखरेख के लिए ईरान के प्रथम उपराष्ट्रपति मोहम्मद रजा आरेफ की अध्यक्षता में एक समिति हफ्तों से काम कर रही है।
  • प्रमुख शहरों में सुरक्षा और भीड़ को नियंत्रित करने का जिम्मा इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) को सौंपा गया है।
  • रजवी खुरासान प्रांत के गवर्नर के मुताबिक, मशहद में भारी भीड़ को नियंत्रित करने और जनाजे को सुरक्षित रूप से ले जाने के लिए हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल किया जा सकता है।


2. रसद और जन-सुविधाओं की भी तैयारी

  • परिवहन और अन्य लॉजिस्टिक व्यवस्थाओं का समन्वय ईरान का बसीज अर्धसैनिक बल कर रहा है।
  • बाहर से आने वाले वाहनों को संभालने के लिए तेहरान के राजमार्गों को अस्थायी पार्किंग में तब्दील किया जा रहा है। 
  • लोगों के ठहरने के लिए मस्जिदों, स्कूलों, खेल परिसरों और यूनिवर्सिटी को आवास के तौर पर इस्तेमाल किया जाएगा। 
  • राजधानी तेहरान के 22 जिले ईरान के 31 प्रांतों से आने वाले लोगों की मेजबानी करेंगे और शासन इंतजाम देखेगा।
  • इस दौरान व्यावसायिक उड़ानें रद्द रहने और प्रमुख शहरों में प्रवेश को कड़ाई से नियंत्रित किए जाने की उम्मीद है। 

3. इराक में अरबईन स्तर की तैयारियां

  • ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इराक का दौरा कर नजफ और कर्बला के गवर्नरों के साथ मिलकर तैयारियों की समीक्षा की है। 
  • इराक में अरबईन तीर्थयात्रा की तर्ज पर सुरक्षा और व्यवस्था की जा रही है, जहां आमतौर पर लाखों की संख्या में श्रद्धालु जुटते हैं। 
  • शोक मनाने वालों के स्वागत और प्रबंधन के लिए हुसैनी जुलूसों और धार्मिक समूहों को लगाया गया है, जो पूरी व्यवस्था संभालेंगे।
  • नजफ अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से लेकर इमाम अली दरगाह तक सुरक्षा एजेंसियां विदेशी प्रतिनिधिमंडलों की व्यवस्था संभालेंगी।


क्या पिता के जनाजे के दौरान दिखेंगे नए सुप्रीम लीडर मोजतबा?

फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई अपने पिता अयातुल्ला अली खामेनेई के जनाजे में शामिल होंगे या नहीं। उनके अंतिम संस्कार में शामिल होने को लेकर भारी अनिश्चितता और अटकलों का माहौल है। 

Iran Supreme Leader Ayatollah Ali Khamenei Largest State Funeral Burial after 131 days Mojtaba Khamenei explai
मोजतबा खामेनेई को लेकर मीडिया में अटकलें - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
गंभीर चोटें और स्वास्थ्य को लेकर अटकलें
28 फरवरी को हुए जिस अमेरिकी-इस्राइली हवाई हमले में अली खामेनेई की मृत्यु हुई, उसमें उनके परिवार के सदस्यों की भी जान गई थी। साथ ही 56 वर्षीय मोजतबा भी गंभीर रूप से घायल हो गए थे। पश्चिमी मीडिया की रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्हें पैर में फ्रैक्चर, चेहरे पर चोटें आई हैं, और उन्हें पेट व लीवर में गंभीर नुकसान हुआ है। यहां तक कि उनके कोमा में होने या एक पैर गंवा देने तक की खबरें सामने आई हैं। 

अमेरिकी मीडिया के मुताबिक, उनकी कई सर्जरी हुई हैं, और कुवैती मीडिया ने दावा किया है कि उनका गुपचुप तरीके से मॉस्को (रूस) में इलाज चल रहा है। हालांकि, ईरान ने आधिकारिक तौर पर इन रिपोर्टों की पुष्टि नहीं की है।

सुरक्षा खतरे में पड़ने की आशंका
युद्ध शुरू होने के बाद से ही मोजतबा पूरी तरह से छिपकर देश चला रहे हैं। एक आतंकवाद-रोधी विशेषज्ञ के मुताबिक, 9 जुलाई को मशहद में होने वाला अंतिम संस्कार पहले से घोषित कार्यक्रम है, इसलिए वहां जाना मोजतबा के लिए एक बहुत बड़ा सुरक्षा जोखिम (टारगेट) बन सकता है। 

सार्वजनिक उपस्थिति से अब तक रहे दूर 
नए सुप्रीम लीडर बनने के बाद से बीते चार महीनों में मोजतबा सार्वजनिक तौर पर एक भी बार भी सामने नहीं आए हैं, यहां तक कि उनका कोई वीडियो या ऑडियो संदेश भी जारी नहीं हुआ है। उनके सभी बयान और संदेश अब तक सरकारी टेलीविजन एंकरों ने पढ़कर सुनाए हैं या आधिकारिक मीडिया में प्रकाशित किए गए हैं। 

परंपरा बनाम सुरक्षा की दुविधा 
पारंपरिक रूप से बेटे को ही पिता के जनाजे की नमाज पढ़ानी चाहिए और कब्र के पास खड़ा होना चाहिए, यह एक ऐसा काम है जो उनके उत्तराधिकार को पूरी तरह से स्थापित करता है। मोजतबा खामेनेई के लिए यह अंतिम संस्कार एक निर्णायक क्षण माना जा रहा है। अगर वह सामने आते हैं, तो यह उनके स्वास्थ्य और नेतृत्व पर उठ रहे सभी सवालों को शांत कर देगा, लेकिन सुरक्षा के लिहाज से यह उनके लिए एक बड़ा दांव होगा। वहीं, अगर वह इस परंपरा को तोड़ते हुए अपनी गैर-मौजूदगी दर्ज कराते हैं, तो उनकी स्थिति को लेकर शंकाएं और भी गहरी हो सकती हैं। अधिकारियों ने अभी तक यह घोषणा भी नहीं की है कि इस ऐतिहासिक जनाजे की नमाज कौन पढ़ाएगा।
 
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