US: भारतीय समूहों और सांसदों ने नागरिकता पर कोर्ट के फैसले का किया स्वागत, क्यों कहा ऐतिहासिक कदम?
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के जन्मजात नागरिकता सीमित करने वाले कार्यकारी आदेश को खारिज कर दिया। भारतीय-अमेरिकी संगठनों और सांसदों ने इसे ऐतिहासिक बताया। पढ़ें पूरी खबर
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भारतीय-अमेरिकी अधिकार समूहों और सांसदों ने अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय के एक फैसले का स्वागत किया है। इस फैसले में कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के जन्मजात नागरिकता को प्रतिबंधित करने वाले कार्यकारी आदेश को रद्द कर दिया गया है। इसके साथ ही यह बरकरार रखा गया है कि अमेरिकी धरती पर पैदा हुए लगभग सभी बच्चे नागरिक हैं।
क्या था राष्ट्रपति ट्रंप का आदेश?
मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने 150 साल पुरानी नीति को समाप्त करने के ट्रंप के प्रयास को खारिज कर दिया। उनके कार्यकारी आदेश का उद्देश्य अवैध अप्रवासियों और अस्थायी विदेशी निवासियों से पैदा हुए बच्चों को स्वतः अमेरिकी नागरिक बनने से रोकना था। नागरिक संगठन इंडियन अमेरिकन इम्पैक्ट के कार्यकारी निदेशक चिंतन पटेल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला 'इस बात की एक महत्वपूर्ण पुष्टि है कि अमेरिका में किसका स्थान है।'
इस फैसले से किसको होगा फायदा?
पटेल ने कहा, ट्रंप के कार्यकारी आदेश से सबसे अधिक सीधे तौर पर प्रभावित होने वाले लोगों में भारतीय और दक्षिण एशियाई आप्रवासी परिवार शामिल हैं। ये ऐसे समुदाय हैं, जो वीजा के लिए लंबी प्रतीक्षा सूची और अनिश्चित आप्रवासन समय-सीमा का सामना कर रहे हैं, जहां अक्सर बच्चे अपने माता-पिता के स्थायी निवास का स्पष्ट मार्ग मिलने से बहुत पहले ही यहां पैदा हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने उन परिवारों को देखा और कहा, 'आपके बच्चे अमेरिकी हैं। वे यहीं के हैं।'
भारतीय-अमेरिकी समुदाय के एक प्रमुख नेता ने क्या कहा?
भारतीय-अमेरिकी समुदाय के एक प्रमुख नेता अजय जैन भुटोरिया ने इस फैसले को 'ऐतिहासिक जीत' बताया। उन्होंने कहा, 'सर्वोच्च न्यायालय के 5-4 के फैसले ने उन आप्रवासी परिवारों के जन्मजात नागरिकता अधिकार की रक्षा की है जिन्होंने यहां अपना जीवन स्थापित किया है। अमेरिका अपनी 250वीं वर्षगांठ की तैयारी कर रहा है, ऐसे में यह निर्णय आप्रवासियों द्वारा मजबूत किए गए राष्ट्र के रूप में हमारे इतिहास का सम्मान करता है।'
कितने लोग रोजगार-आधारित ग्रीन कार्ड के लिए लंबित है
फाउंडेशन फॉर इंडिया एंड इंडियन डायस्पोरा स्टडीज (एफआईआईडीएस) के अध्यक्ष और नीति एवं रणनीति प्रमुख खंडेराव कांड के अनुसार, सर्वोच्च न्यायालय के फैसले ने उन लाखों परिवारों को बेहद जरूरी निश्चितता दी है, जिन्होंने अमेरिका में अपना जीवन स्थापित किया है। उन्होंने कहा, 'भारतीय-अमेरिकी समुदाय, जिसकी संख्या अब लगभग 52 लाख है, में 12 लाख से अधिक उच्च कुशल पेशेवर और उनके परिवार के सदस्य शामिल हैं जो वर्षों से रोजगार-आधारित ग्रीन कार्ड के लिए लंबित हैं।'
भारतीय-अमेरिकी सांसदों राजा कृष्णमूर्ति, प्रमिला जयपाल और सुहास सुब्रमण्यम ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए ट्रंप के कार्यकारी आदेश को पूरे देश में अप्रवासियों के बच्चों से नागरिकता छीनने का एक स्पष्ट और असंवैधानिक प्रयास करार दिया। कृष्णमूर्ति ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला एक मूलभूत संवैधानिक सिद्धांत की पुष्टि करता है संयुक्त राज्य अमेरिका में पैदा होने वाला प्रत्येक बच्चा अमेरिकी नागरिक है।
'हम अमेरिकी हैं, हम यहीं के हैं'
त्रि-कॉक्स ने एक बयान में कहा कि हालांकि राष्ट्रपति ट्रंप खुद को कानून से ऊपर मानते हैं, लेकिन अदालत का फैसला इस बात की याद दिलाता है कि वह संविधान को दरकिनार नहीं कर सकते या कलम की एक ही चोट से लोगों को उन अधिकारों से वंचित नहीं कर सकते जो यह संविधान गारंटी देता है। बयान में कहा गया, 'जैसे-जैसे हम अपने राष्ट्र की स्थापना की 250वीं वर्षगांठ के करीब आ रहे हैं, हम ट्रंप के अमेरिका के खतरनाक और बहिष्कारवादी दृष्टिकोण को अस्वीकार करने में एकजुट हैं। हम अमेरिकी हैं, हम यहीं के हैं, और हम आने वाली पीढ़ियों के लिए जन्मजात नागरिकता के अधिकार की रक्षा करते रहेंगे।'