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Iran: फैल रहा पश्चिम एशिया संकट, साइप्रस पर हमलों के बाद यूरोप और ऑस्ट्रेलिया ने भेजे सैन्य संसाधन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Published by: Nitin Gautam
Updated Sat, 07 Mar 2026 06:47 AM IST
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सार
पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच सैन्य जमावड़ा बढ़ता जा रहा है, जिससे पश्चिम एशिया संकट गहराता जा रहा है। साइप्रस पर हमले के बाद कई देशों ने अपने सैन्य संसाधनों को पश्चिम एशिया की तरफ रवाना कर दिया है।
सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : ANI
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विस्तार
अमेरिका-इस्राइल-ईरान युद्ध के तेजी से फैलते प्रभाव के बीच यूरोप और ऑस्ट्रेलिया ने पश्चिम एशिया तथा भूमध्यसागर क्षेत्र में अपने सैन्य संसाधन भेजने शुरू कर दिए हैं। साइप्रस स्थित ब्रिटिश सैन्य अड्डे पर ड्रोन हमले के बाद कई यूरोपीय देशों ने सुरक्षा और नागरिकों की निकासी की संभावित जरूरतों को देखते हुए नौसैनिक जहाज, लड़ाकू विमान और वायु रक्षा प्रणालियां तैनात करने की घोषणा की है।
ब्रिटेन ने भी अपने युद्धपोत भेजने की घोषणा की
अल जजीरा और पश्चिमी मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, ब्रिटेन इस संघर्ष से सीधे प्रभावित देशों में शामिल है क्योंकि साइप्रस के अक्रोटिरी स्थित रॉयल एयर फोर्स अड्डे पर ड्रोन हमला हुआ है। साइप्रस के राष्ट्रपति और ब्रिटिश रक्षा मंत्रालय के अनुसार, हमला रात के समय किया गया। इससे पहले ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने अमेरिका को ईरान पर रक्षात्मक हमलों के लिए ब्रिटिश ठिकानों के इस्तेमाल की अनुमति दी थी। हमले के बाद ब्रिटेन ने पूर्वी भूमध्यसागर में एचएमएस ड्रैगन नामक युद्धपोत भेजने की घोषणा की। यह रॉयल नेवी का टाइप-45 एयर डिफेंस डेस्ट्रॉयर है, जिसमें सी वाइपर मिसाइल सिस्टम लगा है। यह प्रणाली 10 सेकंड के भीतर आठ मिसाइल दाग सकती है और एक साथ 16 मिसाइलों को मार्गदर्शन दे सकती है। इसके साथ दो वाइल्डकैट हेलीकॉप्टर भी भेजे गए हैं, ताकि साइप्रस की ड्रोन-रोधी सुरक्षा को मजबूत किया जा सके।
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भूमध्यसागर में अपना प्रमुख एयरक्राफ्ट कैरियर शार्ल द गॉल भेजने का आदेश दिया है। साइप्रस के आसपास अतिरिक्त सैन्य संसाधन भेजने की भी घोषणा की। इसमें फ्रांसीसी फ्रिगेट लैंगेडॉक और अतिरिक्त वायु रक्षा प्रणालियां शामिल हैं।
ग्रीस
साइप्रस की सुरक्षा मजबूत करने के लिए दो फ्रिगेट युद्धपोत और चार एफ-16 लड़ाकू विमान भेजे हैं। क्रेट द्वीप के सौडा बे स्थित अपने सैन्य अड्डे का इस्तेमाल अमेरिकी सेना को करने की अनुमति भी दी है।
ऑस्ट्रेलिया भी सक्रिय
प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने संसद में बताया कि ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों को सुरक्षित निकालने और क्षेत्र में सहायता प्रदान करने के लिए सैन्य संसाधन तैनात किए जा रहे हैं। ऑस्ट्रेलियाई मीडिया के अनुसार इसमें रॉयल ऑस्ट्रेलियन एयर फोर्स का सी-17ए ग्लोबमास्टर परिवहन विमान और केसी-30ए मल्टी-रोल टैंकर ट्रांसपोर्ट विमान शामिल हो सकते हैं। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि ये विमान किस स्थान पर तैनात किए गए हैं।
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ब्रिटेन ने भी अपने युद्धपोत भेजने की घोषणा की
अल जजीरा और पश्चिमी मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, ब्रिटेन इस संघर्ष से सीधे प्रभावित देशों में शामिल है क्योंकि साइप्रस के अक्रोटिरी स्थित रॉयल एयर फोर्स अड्डे पर ड्रोन हमला हुआ है। साइप्रस के राष्ट्रपति और ब्रिटिश रक्षा मंत्रालय के अनुसार, हमला रात के समय किया गया। इससे पहले ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने अमेरिका को ईरान पर रक्षात्मक हमलों के लिए ब्रिटिश ठिकानों के इस्तेमाल की अनुमति दी थी। हमले के बाद ब्रिटेन ने पूर्वी भूमध्यसागर में एचएमएस ड्रैगन नामक युद्धपोत भेजने की घोषणा की। यह रॉयल नेवी का टाइप-45 एयर डिफेंस डेस्ट्रॉयर है, जिसमें सी वाइपर मिसाइल सिस्टम लगा है। यह प्रणाली 10 सेकंड के भीतर आठ मिसाइल दाग सकती है और एक साथ 16 मिसाइलों को मार्गदर्शन दे सकती है। इसके साथ दो वाइल्डकैट हेलीकॉप्टर भी भेजे गए हैं, ताकि साइप्रस की ड्रोन-रोधी सुरक्षा को मजबूत किया जा सके।
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फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भूमध्यसागर में अपना प्रमुख एयरक्राफ्ट कैरियर शार्ल द गॉल भेजने का आदेश दिया है। साइप्रस के आसपास अतिरिक्त सैन्य संसाधन भेजने की भी घोषणा की। इसमें फ्रांसीसी फ्रिगेट लैंगेडॉक और अतिरिक्त वायु रक्षा प्रणालियां शामिल हैं।
ग्रीस
साइप्रस की सुरक्षा मजबूत करने के लिए दो फ्रिगेट युद्धपोत और चार एफ-16 लड़ाकू विमान भेजे हैं। क्रेट द्वीप के सौडा बे स्थित अपने सैन्य अड्डे का इस्तेमाल अमेरिकी सेना को करने की अनुमति भी दी है।
ऑस्ट्रेलिया भी सक्रिय
प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने संसद में बताया कि ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों को सुरक्षित निकालने और क्षेत्र में सहायता प्रदान करने के लिए सैन्य संसाधन तैनात किए जा रहे हैं। ऑस्ट्रेलियाई मीडिया के अनुसार इसमें रॉयल ऑस्ट्रेलियन एयर फोर्स का सी-17ए ग्लोबमास्टर परिवहन विमान और केसी-30ए मल्टी-रोल टैंकर ट्रांसपोर्ट विमान शामिल हो सकते हैं। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि ये विमान किस स्थान पर तैनात किए गए हैं।
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