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ईरान पर अमेरिकी हमलों का नया दौर: जवाब में बहरीन और कुवैत पर मिसाइलें; क्या फिर जंग के मुहाने पर पश्चिम एशिया?
Thu, 16 Jul 2026 07:45 AM IST
प्रशांत तिवारी
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Published by: प्रशांत तिवारी
Updated Thu, 16 Jul 2026 07:45 AM IST
सार
अमेरिका ने उत्तरी ईरान समेत कई सैन्य ठिकानों पर ताजा हवाई हमले किए, जबकि जवाबी कार्रवाई में ईरान ने बहरीन और कुवैत पर मिसाइलें दागीं। होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़े तनाव के बीच दोनों देशों के बीच संघर्ष तेज हो गया है, जिससे पूरे मध्य पूर्व में व्यापक युद्ध की आशंका फिर गहरा गई है।
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पश्चिम एशिया में संकट
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
अमेरिका द्वारा ईरान पर एक और बड़े हवाई हमले के बाद पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ गया है। अमेरिकी सेना ने गुरुवार तड़के उत्तरी ईरान समेत कई इलाकों में रातभर चली हवाई कार्रवाई पूरी होने की पुष्टि की। जवाब में ईरान ने बहरीन और कुवैत पर मिसाइल हमले किए। दोनों देशों के बीच लगातार जारी जवाबी हमलों और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ते विवाद ने क्षेत्र को एक बार फिर व्यापक युद्ध के मुहाने पर ला खड़ा किया है।
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अमेरिका ने किन ठिकानों को बनाया निशाना?
अमेरिकी सेना ने बताया कि उसके ताजा हमलों से हाल के दिनों में पहली बार उत्तरी ईरान के कई हिस्से दहल उठे। ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक राजधानी तेहरान के आसपास भी जोरदार विस्फोट हुए। ये हमले उस समय हुए जब होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर है। इसी जलमार्ग से सामान्य परिस्थितियों में दुनिया के लगभग पांचवें हिस्से का तेल और प्राकृतिक गैस गुजरती है।
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सेमनान प्रांत पर हमला क्यों अहम माना जा रहा है?
ईरानी मीडिया के अनुसार अमेरिकी हमलों में सेमनान प्रांत को भी निशाना बनाया गया। यह इलाका ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल निर्माण और उसके अंतरिक्ष कार्यक्रम का प्रमुख केंद्र माना जाता है। फिलहाल इन हमलों में हुए नुकसान या हताहतों की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
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बहरीन और कुवैत पर ईरान ने क्यों किया हमला?
अमेरिका द्वारा ईरान पर दोबारा नौसैनिक नाकेबंदी लागू करने और हवाई हमलों का दायरा बढ़ाने के बाद ईरान ने गुरुवार सुबह बहरीन और कुवैत पर मिसाइल हमले किए। अमेरिकी प्रशासन ने यह कार्रवाई उन जहाजों पर ईरानी हमलों के जवाब में की थी, जो होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की कोशिश कर रहे थे।
अमेरिकी हमलों में कितना नुकसान हुआ?
ईरानी अधिकारियों के अनुसार अमेरिकी हमलों में सेना की एक बैरक को निशाना बनाया गया, जिसमें कम से कम सात सैनिकों की मौत हो गई, जबकि देशभर में सैकड़ों लोग घायल हुए हैं। वहीं ईरान की ओर से बहरीन और कुवैत पर किए गए हमलों में किसी तरह के नुकसान या हताहतों की तत्काल पुष्टि नहीं हुई।
क्या फिर टूट गया युद्धविराम जैसा समझौता?
अमेरिका और ईरान के बीच पिछले कई दिनों से जारी जवाबी हमलों और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ते टकराव ने अंतरिम समझौते को लगभग निष्प्रभावी कर दिया है। क्षेत्र में हालात एक बार फिर पूर्ण युद्ध की ओर बढ़ते दिखाई दे रहे हैं।
अंतरिम समझौते और नाकेबंदी का पूरा मामला क्या है?
अमेरिका ने पहली बार अप्रैल में ईरान पर नौसैनिक नाकेबंदी लगाई थी, जिसे पिछले महीने अंतरिम समझौते के बाद हटा लिया गया था। इस समझौते के तहत दोनों देशों ने 60 दिनों तक संघर्ष रोककर ईरान के परमाणु कार्यक्रम समेत अन्य मुद्दों पर बातचीत करने पर सहमति जताई थी। हालांकि होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर संघर्ष बढ़ने के साथ ही वार्ता ठप पड़ गई।
होर्मुज जलडमरूमध्य इतना अहम क्यों है?
जब 28 फरवरी को अमेरिका और इस्राइल ने ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू किया, तब तेहरान ने प्रभावी रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही रोक दी। इसके बाद वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल, उर्वरक और कई अन्य वस्तुओं की कीमतों में भारी उछाल आ गया। इस रणनीति ने ईरान को वार्ता में बड़ी बढ़त भी दिलाई। बढ़ती महंगाई अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी रिपब्लिकन पार्टी के लिए भी चुनौती बन गई है, क्योंकि नवंबर में कांग्रेस के चुनाव होने हैं। इसके बावजूद अमेरिका अब तक इस जलमार्ग को पूरी तरह सामान्य नहीं करा सका है।
नाकेबंदी लागू होने के बाद क्या हुआ?
नाकेबंदी लागू होने के लगभग 24 घंटे बाद अमेरिकी सेना ने एक व्यापारी जहाज पर कार्रवाई करते हुए उसे निष्क्रिय कर दिया।
ईरान ने अमेरिका को क्या चेतावनी दी?
ईरानी संसद के अध्यक्ष और मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाकर कालीबाफ ने कहा कि यदि अमेरिका अंतरिम समझौते की शर्तों का पालन नहीं करता, तो ईरान बड़े सैन्य संघर्ष के लिए तैयार है। वहीं ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड ने चेतावनी दी कि यदि नाकेबंदी जारी रही तो पूरे मध्य पूर्व से ऊर्जा निर्यात रोक दिया जाएगा। रिवोल्यूशनरी गार्ड ने कहा कि इस क्षेत्र से तेल और गैस का निर्यात या तो सभी के लिए होगा या फिर किसी के लिए नहीं होगा।"
डोनाल्ड ट्रंप ने क्या दावा किया?
अमेरिका द्वारा 24 घंटे के भीतर तीसरी बार हमले किए जाने के कुछ ही देर बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान शांति समझौता करना चाहता है। हालांकि उन्होंने इसके बारे में विस्तार से कुछ नहीं बताया। ट्रंप ने पेंसिल्वेनिया स्थित यूएस आर्मी वॉर कॉलेज में आयोजित एक रक्षा सम्मेलन में कहा कि उन्हें हमारी कार्रवाई पसंद नहीं आ रही और वे समझौता करना चाहते हैं। अब देखना होगा कि समझौता होता है या फिर हम इस संघर्ष को पूरी तरह खत्म कर देते हैं।
जासूसी के आरोप में गिरफ्तार महिला को ईरान ने किया रिहा
बाद में ट्रंप ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि तेहरान ने सद्भावना दिखाते हुए 2024 से हिरासत में रखे गए एक अमेरिकी नागरिक को रिहा कर दिया है। हालांकि उन्होंने उस व्यक्ति की पहचान उजागर नहीं की। मानवाधिकार वकील जेरेड जेंसर ने बताया कि रिहा की गई अमेरिकी-ईरानी नागरिक डेना करारी हैं, जो एक गैर-लाभकारी संस्था चलाती हैं और उन पर जासूसी का आरोप लगाया गया था।
अमेरिका ने किन जहाजों और ठिकानों पर कार्रवाई की?
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने बताया कि रातभर दर्जनों ठिकानों पर हमले किए गए और बुधवार दिन में भी कार्रवाई जारी रही। देर रात एक और चरण के हमले शुरू हुए। सेंटकॉम के मुताबिक कुराकाओ के झंडे वाले तेल टैंकर बेल्मा को खार्ग द्वीप की ओर जाते हुए देखा गया। कई चेतावनियों के बावजूद जहाज नहीं रुका, जिसके बाद अमेरिकी विमान ने हेलफायर मिसाइल से उसके धुएं की चिमनी पर हमला कर उसे निष्क्रिय कर दिया। सेंटकॉम ने बताया कि इसके अलावा दो अन्य व्यापारी जहाजों को भी चेतावनी दी गई थी और उन्होंने अमेरिकी निर्देशों का पालन करते हुए अपना मार्ग बदल लिया।
किन सैन्य ठिकानों को बनाया गया निशाना?
अमेरिका के प्रमुख लक्ष्यों में ग्रेटर तुंब द्वीप भी शामिल था, जिसे होर्मुज जलडमरूमध्य का रणनीतिक केंद्र माना जाता है। सेंटकॉम के अनुसार यहां ईरान के रक्षा और मिसाइल ठिकानों पर हमले किए गए। इसके अलावा सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में ईरान की 388वीं मैकेनाइज्ड इन्फैंट्री ब्रिगेड की बैरक पर भी हमला हुआ। ईरानी सरकारी टीवी के अनुसार इस हमले में कम से कम 13 मिसाइलें दागी गईं। सात सैनिकों की मौत हुई, जिनमें प्रशिक्षु और नियमित सैनिक दोनों शामिल थे, जबकि कई अन्य घायल हो गए।
ईरान ने हताहतों को लेकर क्या जानकारी दी?
ईरानी स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता हुसैन केरमानपुर ने बताया कि हाल के दिनों में अमेरिकी हवाई हमलों में 35 से अधिक लोगों की मौत और 300 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि इनमें कितने नागरिक और कितने सैनिक शामिल हैं। यह इस दौर के संघर्ष में ईरान द्वारा जारी पहला आधिकारिक समग्र आंकड़ा है। सेना ने सरकारी टीवी के माध्यम से कहा कि वह इस हमले का 'निर्णायक जवाब'देगी।
खाड़ी देशों पर हमलों के दौरान क्या हुआ?
सेंटकॉम प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर ने कहा कि ईरान ने खाड़ी के पड़ोसी देशों की ओर दर्जनों मिसाइलें और ड्रोन दागे। बुधवार को बहरीन और कुवैत में मिसाइल हमले की चेतावनी देने वाले सायरन बज उठे। बहरीन के गृह मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लोगों से तुरंत सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की। जॉर्डन ने भी दावा किया कि उसने ईरान की ओर से दागी गई तीन मिसाइलों को मार गिराया। ईरान ने बहरीन, कुवैत और जॉर्डन पर हमले करने की पुष्टि की। इन तीनों देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं।
कालीबाफ ने समझौते को लेकर क्या आरोप लगाए?
ऑनलाइन जारी बयान में मोहम्मद बाकर कालीबाफ ने कहा कि अमेरिका ने अंतरिम शांति समझौते की शर्तों का पालन नहीं किया, जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान की व्यवस्थाएं भी शामिल थीं।उन्होंने कहा कि अब जब समझौते के क्रियान्वयन का समय आया है, तब अमेरिका अपने कानूनी और कूटनीतिक विकल्प खत्म होने के बाद बल प्रयोग के जरिए ईरान की व्यवस्थाओं को कमजोर करने की कोशिश कर रहा है। कालीबाफ ने यह भी कहा कि अमेरिका के साथ बातचीत को आत्मसमर्पण या समझौते के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि यह प्रतिरोध की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।
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आखिर होर्मुज जलडमरूमध्य ही संघर्ष का केंद्र क्यों बना हुआ है?
मौजूदा संघर्ष का सबसे बड़ा केंद्र होर्मुज जलडमरूमध्य बना हुआ है, जहां से सामान्य समय में दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल और प्राकृतिक गैस का व्यापार होता है। युद्ध की शुरुआत में ही ईरान ने इस मार्ग को बाधित कर दिया था, जिसके बाद से अमेरिका इसे दोबारा खोलने की कोशिश कर रहा है। अंतरिम समझौते के दौरान कुछ जहाज ओमान के निकट अमेरिकी निगरानी वाले समुद्री मार्ग से गुजरने लगे थे, जो ईरान के नियंत्रण से बाहर था। हाल के दिनों में ईरान ने इसी मार्ग से गुजर रहे जहाजों पर हमले किए, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच जवाबी कार्रवाई तेज हो गई। अमेरिका ने चेतावनी दी है कि जरूरत पड़ने पर वह बलपूर्वक इस जलमार्ग को फिर से खोल सकता है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसा करने के लिए अमेरिका को कहीं बड़ा नौसैनिक बेड़ा और संभवतः हजारों जमीनी सैनिकों की आवश्यकता होगी। फिलहाल नाकेबंदी के जरिए ईरान पर दबाव बढ़ाने की रणनीति अपनाई जा रही है।