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इस्राइल में गृहयुद्ध जैसे हालात: सैन्य भर्ती के खिलाफ सड़कों पर उतरे अति-रूढ़िवादी यहूदी, फूंक दीं कारें
एजेंसी, यरूशलम।
Published by: राकेश कुमार
Updated Wed, 03 Jun 2026 06:26 AM IST
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सार
इस्राइल में अनिवार्य सैन्य भर्ती के खिलाफ हजारों अति-रूढ़िवादी यहूदियों ने हिंसक प्रदर्शन कर यरुशलम और तेल अवीव सहित कई शहरों को ठप कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने राजमार्ग जाम किए, कारों में आग लगाई और रेल यातायात को बाधित करने के साथ-साथ एक सैनिक पर भी हमला किया, जिसके बाद पुलिस को पानी की बौछारें छोड़नी पड़ीं।
इस्राइल में विरोध प्रदर्शन ( प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : एक्स
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विस्तार
इस्राइल में हजारों अति-रूढ़िवादी यहूदियों ने अनिवार्य सैन्य भर्ती के विरोध में जबरदस्त प्रदर्शन किया और सड़कें जाम कीं। हिंसक प्रदर्शनकारियों ने रेल यातायात बाधित कर दिया और कुछ स्थानों पर कारों में आग लगा दी। पुलिस ने कहा, प्रदर्शनकारियों ने कई प्रमुख चौराहों को रोका और एक बस से उतरे सैनिक पर हमला किया। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को पानी की बौछारों का इस्तेमाल करना पड़ा। प्रदर्शन से जनजीवन ठप हो गया। हालात इतने विकट हो गए कि मध्य क्षेत्र स्थित यरुशलम और तेल अवीव में प्रमुख राजमार्ग बंद हो गए तथा सार्वजनिक परिवहन सेवाएं भी प्रभावित रहीं।
स्राइल में अधिकतर यहूदी पुरुषों और महिलाओं के लिए सैन्य सेवा अनिवार्य है। हालांकि, प्रभावशाली लोग छूट हासिल करते रहे हैं। अब यह छूट खतरे में दिख रही है। बड़ी संख्या में इस्राइली युवक लंबे समय से चली आ रही इस व्यवस्था से असंतुष्ट हैं। यह असंतोष सेना के दबाव झेलने के चलते बढ़ गया।
संघर्षों के बीच मोर्चे पर बार-बार लौटना पड़ा
इस्राइली युवाओं में अनिवार्य सैन्य भर्ती के लिए आक्रोश इसलिए भी बढ़ गया क्योंकि अनेक नागरिकों को रिजर्व ड्यूटी के लिए बार-बार मोर्चे पर लौटना पड़ा है। खासतौर पर पिछले कुछ वर्षों में गाजा और फिर लेबनान, ईरान तथा यमन में शुरू लड़ाई के चलते युवाओं के लिए यह नियम परेशानी बन गया है। इससे परिवारों में भी असंतोष है।
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नेतन्याहू के लिए राजनीतिक संकट
यह विवाद अब पीएम बेंजामिन नेतन्याहू की सत्तारूढ़ गठबंधन सरकार के लिए भी गंभीर सियासी संकट का कारण बन गया है। अति-रूढ़िवादी दलों द्वारा सरकार से समर्थन वापसी के बाद गठबंधन में दरार गहरा गई है। इसके चलते इस वर्ष के चुनाव समय पूर्व कराए जा सकते हैं।
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