भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर भारत सख्त: जयशंकर ने यूक्रेन के बाद ईरान लगाया फोन, अराघची से क्या कहा?
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची से बातचीत कर व्यापारिक जहाजों और नाविकों पर किसी भी तरह के हमले से बचने की अपील की है। इससे एक दिन पहले उन्होंने यूक्रेन के विदेश मंत्री से भी यही मुद्दा उठाया था। भारत लगातार यह संदेश क्यों दे रहा है? सरकार भारतीय नाविकों की सुरक्षा के लिए क्या कदम उठा रही है? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...
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विस्तार
भारत ने पश्चिम एशिया और काला सागर क्षेत्र में व्यापारिक जहाजों तथा नाविकों की सुरक्षा को लेकर अपना रुख और सख्त कर दिया है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शुक्रवार को ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची से टेलीफोन पर बातचीत में कहा कि किसी भी परिस्थिति में व्यापारिक जहाजों और नाविकों पर हमले नहीं होने चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत किसी भी पक्ष की ओर से व्यापारिक जहाजों और नाविकों पर किए गए हमलों की कड़ी निंदा करता है। साथ ही उन्होंने क्षेत्र में जारी संघर्ष को लेकर भारत की गहरी चिंता भी जताई।
ईरान के विदेश मंत्री से बातचीत में क्या कहा गया?
एस. जयशंकर ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर बताया कि ईरान के विदेश मंत्री ने उन्हें मौजूदा घटनाक्रम और चल रही चर्चाओं के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि भारत हमेशा बातचीत और कूटनीति के जरिए समाधान का समर्थक रहा है। जयशंकर ने अराघची से कहा कि मौजूदा हालात में यह बेहद जरूरी है कि व्यापारिक जहाजों और नाविकों को किसी भी तरह के हमले से बचाया जाए। उन्होंने दोहराया कि भारत ऐसे सभी हमलों की बिना किसी शर्त निंदा करता है और क्षेत्र में तनाव कम करने के लिए संवाद का समर्थन करता है।
यूक्रेन से एक दिन पहले क्या बातचीत हुई थी?
इससे एक दिन पहले, गुरुवार को विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा से भी फोन पर बातचीत की थी। इस दौरान उन्होंने काला सागर में व्यापारिक जहाजों और भारतीय नाविकों पर हुए हमलों का मुद्दा उठाया। उन्होंने साफ कहा कि किसी भी पक्ष की ओर से व्यापारिक जहाजों और भारतीय नाविकों पर किए गए हमले पूरी तरह अस्वीकार्य हैं। जयशंकर ने कहा कि भारत ऐसे सभी हमलों की स्पष्ट शब्दों में निंदा करता है। बातचीत के दौरान काला सागर की स्थिति, यूक्रेन संघर्ष और शांति प्रयासों पर भी चर्चा हुई। उन्होंने यह भी दोहराया कि भारत हमेशा संवाद और कूटनीति के जरिए समाधान का समर्थन करता है।
भारत ने यूक्रेन के सामने क्या आपत्ति जताई थी?
हाल ही में काला सागर में एक व्यापारी जहाज पर हुए हमले में एक भारतीय नाविक की मौत हो गई थी। इसके बाद भारत ने यूक्रेन के राजदूत ओलेक्सांद्र पोलिशचुक को तलब कर कड़ा विरोध दर्ज कराया था। एमवी ओमोरफी नामक व्यापारी जहाज पर यूक्रेनी ड्रोन हमले की खबर सामने आई थी। रूस और यूक्रेन के बीच हाल के हमलों में अब तक पांच भारतीय नाविकों की मौत हो चुकी है, जबकि दो अन्य भारतीय नाविक अब भी लापता बताए गए हैं। इस घटना के बाद भारत लगातार दोनों पक्षों के सामने भारतीय नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा उठा रहा है।
सरकार भारतीय नाविकों की सुरक्षा के लिए क्या कर रही है?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में मंत्रिमंडलीय सुरक्षा समिति की बैठक की अध्यक्षता की थी। इस बैठक में संघर्ष वाले क्षेत्रों में भारतीय और विदेशी झंडे वाले जहाजों पर काम कर रहे नाविकों की सुरक्षा की समीक्षा की गई। प्रधानमंत्री ने संबंधित मंत्रियों को निर्देश दिया कि ऐसा तंत्र तैयार किया जाए, जिससे नाविकों और उनके परिवारों को समय पर जानकारी, आपातकालीन सहायता और परामर्श उपलब्ध कराया जा सके। सरकार का उद्देश्य संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में काम कर रहे भारतीय नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और जरूरत पड़ने पर उन्हें हर संभव सहायता देना है।