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Job Fraud: विदेश में नौकरी का आया ऑफर? तीन पॉइंट्स में समझें जरूरी बातें, नजरअंदाज करना पड़ेगा भारी
Mon, 10 Oct 2022 05:52 PM IST
हिमांशु मिश्रा
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: हिमांशु मिश्रा
Updated Mon, 10 Oct 2022 05:52 PM IST
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विदेशों में नौकरी
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अमर उजाला
विस्तार
अच्छी कमाई के लिए अक्सर लोग विदेश में नौकरी करने चले जाते हैं। लोग दुबई, कतर, म्यांमार, कंबोडिया जैसे देशों में ज्यादा जाते हैं। विदेश जाने वाले कई लोग अब फर्जी गिरोह के जाल में फंसते जा रहे हैं। इसे रोकने के लिए विदेश मंत्रालय ने एक एडवाइजरी जारी की है। अगर आप इसे नजरअंदाज करते हैं तो आप मुसीबत में पड़ सकते हैं।ऐसे में आज हम आपको बताएंगे कि आखिर क्या है पूरा मामला? क्यों विदेश मंत्रालय को इसके लिए एडवाइजरी जारी करनी पड़ी? कैसे लोग विदेश में नौकरी के नाम पर फंस रहे हैं? आइए समझते हैं...
1. पहले जानिए पूरा मामला क्या है?
दरअसल, हाल ही में म्यांमार और कंबोडिया में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिकों के फंसे होने की खबर आई है। विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को इसके बारे में डिटेल से जानकारी भी दी थी। मंत्रालय का कहना है कि म्यांमार से लगभग 50 और कंबोडिया से 80 लोगों को नकली नौकरी के रैकेट से आजाद कराया गया है। अभी और भी लोग फंसे हुए हैं। मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने बताया कि हम दूसरों को भी वापस लाने की कोशिश कर रहे हैं। हमारे पास म्यांमार में बंदी बनाए गए लोगों की सही संख्या नहीं है। हम वहां कई भारतीयों के संपर्क में हैं।
उन्होंने आगे कहा कि इनमें से कुछ को म्यांमार की कैद से रिहा कर दिया गया है और कुछ म्यांमार पुलिस के पास हैं क्योंकि उन्होंने अवैध रूप से देश में प्रवेश किया था। लाओस और कंबोडिया में इसी तरह के नौकरी रैकेट के उदाहरणों पर बागची ने कहा कि वियतनाम, नोम पेन्ह और बैंकॉक में हमारे दूतावास वहां से लोगों को वापस लाने में मदद कर रहे हैं।
दरअसल, हाल ही में म्यांमार और कंबोडिया में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिकों के फंसे होने की खबर आई है। विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को इसके बारे में डिटेल से जानकारी भी दी थी। मंत्रालय का कहना है कि म्यांमार से लगभग 50 और कंबोडिया से 80 लोगों को नकली नौकरी के रैकेट से आजाद कराया गया है। अभी और भी लोग फंसे हुए हैं। मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने बताया कि हम दूसरों को भी वापस लाने की कोशिश कर रहे हैं। हमारे पास म्यांमार में बंदी बनाए गए लोगों की सही संख्या नहीं है। हम वहां कई भारतीयों के संपर्क में हैं।
उन्होंने आगे कहा कि इनमें से कुछ को म्यांमार की कैद से रिहा कर दिया गया है और कुछ म्यांमार पुलिस के पास हैं क्योंकि उन्होंने अवैध रूप से देश में प्रवेश किया था। लाओस और कंबोडिया में इसी तरह के नौकरी रैकेट के उदाहरणों पर बागची ने कहा कि वियतनाम, नोम पेन्ह और बैंकॉक में हमारे दूतावास वहां से लोगों को वापस लाने में मदद कर रहे हैं।
2. कैसे लोग फंसते हैं?
इसे समझने के लिए हमने विदेश मामलों के जानकार डॉ. आदित्य पटेल से बात की। उन्होंने कहा, 'भारत से हर साल पांच से दस लाख लोग रोजगार की तलाश में विदेश का रूख करते हैं। इनमें बड़ी संख्या में लोग कम पढ़े लिखे होते हैं, जिन्हें अलग-अलग एजेंट काम दिलाने के नाम पर दुबई, कतर, कंबोडिया जैसे देश भेजते हैं। ऐसे लोगों से वीजा, पासपोर्ट और नौकरी दिलाने के नाम पर लाखों रुपये भी वसूले जाते हैं।'
आदित्य आगे कहते हैं, 'कई बार एजेंट फर्जी होते हैं। जो वीजा-पासपोर्ट तक फर्जी बना देते हैं। जिनका वीजा-पासपोर्ट नहीं बन पाता है, उन्हें गलत तरीके से बॉर्डर पार कराने का भी ठेका लेते हैं। बाद में इसके चलते लोग फंस जाते हैं और दूसरे देश जाकर पकड़ लिए जाते हैं। अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर पर गलत तरीके से दाखिल होने के चलते ऐसे लोगों को जेल में डाल दिया जाता है।'
आदित्य के मुताबिक, एजेंट दुबई, कतर व अन्य देशों में शेख और कारोबारियों से पैसे लेकर भारतीय नागरिकों को बेच भी देते हैं। जैसे ही ये भारतीय नागरिक, वहां काम करने के लिए पहुंचते हैं सबसे पहले उनका वीजा और पासपोर्ट छीन लिया जाता है। इसके बाद उन्हें बंधुआ मजदूर के तरह काम कराया जाता है। इसका पैसा भी उन्हें नहीं दिया जाता है।
इसे समझने के लिए हमने विदेश मामलों के जानकार डॉ. आदित्य पटेल से बात की। उन्होंने कहा, 'भारत से हर साल पांच से दस लाख लोग रोजगार की तलाश में विदेश का रूख करते हैं। इनमें बड़ी संख्या में लोग कम पढ़े लिखे होते हैं, जिन्हें अलग-अलग एजेंट काम दिलाने के नाम पर दुबई, कतर, कंबोडिया जैसे देश भेजते हैं। ऐसे लोगों से वीजा, पासपोर्ट और नौकरी दिलाने के नाम पर लाखों रुपये भी वसूले जाते हैं।'
आदित्य आगे कहते हैं, 'कई बार एजेंट फर्जी होते हैं। जो वीजा-पासपोर्ट तक फर्जी बना देते हैं। जिनका वीजा-पासपोर्ट नहीं बन पाता है, उन्हें गलत तरीके से बॉर्डर पार कराने का भी ठेका लेते हैं। बाद में इसके चलते लोग फंस जाते हैं और दूसरे देश जाकर पकड़ लिए जाते हैं। अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर पर गलत तरीके से दाखिल होने के चलते ऐसे लोगों को जेल में डाल दिया जाता है।'
आदित्य के मुताबिक, एजेंट दुबई, कतर व अन्य देशों में शेख और कारोबारियों से पैसे लेकर भारतीय नागरिकों को बेच भी देते हैं। जैसे ही ये भारतीय नागरिक, वहां काम करने के लिए पहुंचते हैं सबसे पहले उनका वीजा और पासपोर्ट छीन लिया जाता है। इसके बाद उन्हें बंधुआ मजदूर के तरह काम कराया जाता है। इसका पैसा भी उन्हें नहीं दिया जाता है।
3. विदेश मंत्रालय ने क्या सलाह दी?
विदेश मंत्रालय ने इसको लेकर एक एडवाइजरी जारी की है। मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, 'आप किसी तरह की संदिग्ध नौकरियां स्वीकार न करें क्योंकि एक बार जब आप वहां फंस जाते हैं तो आपको वापस लाना बहुत मुश्किल हो जाता है।' मंत्रालय ने एजेंट पर आंख बंदकर भरोसा न करने की सलाह भी दी है। मंत्रालय के अनुसार, ये लोग झूठ बोलकर यहां से लोगों को दूसरे देश भेज देते हैं और फिर वहां जाकर भारतीय नागरिक फंस जाते हैं। जिन्हें वापस बुलाना काफी मुश्किल हो जाता है। अब इस तरह के जॉब रैकेट पर कार्रवाई की तैयारी चल रही है।
विदेश मंत्रालय ने इसको लेकर एक एडवाइजरी जारी की है। मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, 'आप किसी तरह की संदिग्ध नौकरियां स्वीकार न करें क्योंकि एक बार जब आप वहां फंस जाते हैं तो आपको वापस लाना बहुत मुश्किल हो जाता है।' मंत्रालय ने एजेंट पर आंख बंदकर भरोसा न करने की सलाह भी दी है। मंत्रालय के अनुसार, ये लोग झूठ बोलकर यहां से लोगों को दूसरे देश भेज देते हैं और फिर वहां जाकर भारतीय नागरिक फंस जाते हैं। जिन्हें वापस बुलाना काफी मुश्किल हो जाता है। अब इस तरह के जॉब रैकेट पर कार्रवाई की तैयारी चल रही है।