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खर्ग द्वीप पर कब्जे की तैयारी में ट्रंप?: विशेषज्ञ बोले- ऐसा हुआ तो मारे जा सकते हैं सैनिक, रणनीति पर उठे सवाल
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
Published by: Himanshu Singh Chandel
Updated Tue, 31 Mar 2026 08:22 PM IST
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सार
अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के खार्ग द्वीप पर कब्जे का संकेत दिया है, लेकिन विशेषज्ञों ने इसे खतरनाक बताया है। उनका कहना है कि इससे अमेरिकी सैनिकों की जान जोखिम में पड़ेगी और जंग खत्म नहीं होगी। खर्ग द्वीप ईरान के 90% तेल निर्यात का केंद्र है। इस कदम से तनाव बढ़ सकता है।
खर्ग द्वीप पर ट्रंप की बड़ी तैयारी
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
ईरान के साथ जारी संघर्ष के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक बयान ने नई बहस छेड़ दी है। ट्रंप ने संकेत दिया है कि अमेरिका ईरान के खर्ग द्वीप पर कब्जा करने का विकल्प भी देख रहा है। यह द्वीप ईरान के तेल निर्यात का सबसे बड़ा केंद्र है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम अमेरिकी सैनिकों के लिए बड़ा खतरा बन सकता है और इससे युद्ध खत्म होने के बजाय और भड़क सकता है।
ट्रंप ने कहा कि अमेरिका के पास कई विकल्प हैं और जरूरत पड़ी तो खर्ग द्वीप पर कब्जा भी किया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि वहां ईरान की रक्षा कमजोर है और अमेरिका इसे आसानी से ले सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि अगर ऐसा किया गया तो अमेरिकी सेना को वहां लंबे समय तक रहना पड़ेगा।
क्या खर्ग द्वीप इतना अहम है?
खर्ग द्वीप ईरान के तेल निर्यात का सबसे बड़ा केंद्र है। करीब 90 प्रतिशत तेल यहीं से बाहर जाता है। फारस की खाड़ी में स्थित यह द्वीप रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि ईरान के कई तटीय इलाके बड़े जहाजों के लिए उपयुक्त नहीं हैं। इसलिए इस द्वीप पर कब्जा करना सीधे ईरान की अर्थव्यवस्था पर चोट होगा।
ये भी पढ़ें- 'ईरान में हो चुका सत्ता परिवर्तन': पीट हेगसेथ बोले- समझौता करो वरना बड़े हमले होंगे, नाटो पर फैसला जल्द
क्या इस कदम से जंग खत्म हो सकती है?
विशेषज्ञों का कहना है कि खर्ग द्वीप पर कब्जा करने से ईरान कमजोर जरूर होगा, लेकिन इससे जंग खत्म होने की गारंटी नहीं है। उनका मानना है कि ईरान के पास अन्य छोटे बंदरगाह भी हैं और वह अपने तेल निर्यात को पूरी तरह बंद नहीं करेगा। ऐसे में यह कदम निर्णायक साबित नहीं होगा।
क्या अमेरिकी सैनिकों के लिए खतरा बढ़ेगा?
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि खर्ग द्वीप ईरान के मुख्य भूभाग से सिर्फ 33 किलोमीटर दूर है। ऐसे में ईरान वहां से मिसाइल, ड्रोन और तोपों से हमला कर सकता है। इससे अमेरिकी सैनिकों की जान खतरे में पड़ सकती है। पहाड़ी इलाकों के कारण हमलों का पता लगाना भी मुश्किल हो सकता है।
क्या संघर्ष और फैल सकता है?
इस कदम से तनाव और बढ़ सकता है। ईरान और उसके सहयोगी, जैसे यमन के हूती विद्रोही, जवाबी कार्रवाई तेज कर सकते हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य में बारूदी सुरंगें बिछाने या ड्रोन हमले बढ़ाने की आशंका भी जताई जा रही है। इससे वैश्विक तेल आपूर्ति और कीमतों पर बड़ा असर पड़ सकता है।
क्या अमेरिका के पास कोई और विकल्प है?
विशेषज्ञों का मानना है कि जमीन पर कब्जा करने के बजाय समुद्री नाकेबंदी बेहतर विकल्प हो सकता है। इसके तहत उन जहाजों को रोका जा सकता है, जो ईरान से तेल लेकर निकलते हैं। इससे बिना सैनिकों को जोखिम में डाले ईरान के तेल कारोबार पर दबाव बनाया जा सकता है।
क्या पहले से हो रही है कार्रवाई?
रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका पहले ही खर्ग द्वीप के कई ठिकानों पर हमले कर चुका है। इसमें एयर डिफेंस, रडार साइट, एयरपोर्ट और अन्य सैन्य ठिकाने शामिल हैं। इसके बावजूद विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ एक द्वीप पर कब्जा कर लेना पूरे युद्ध का हल नहीं हो सकता।
अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के खर्ग द्वीप पर कब्जे का संकेत दिया है, लेकिन विशेषज्ञों ने इसे खतरनाक बताया है। उनका कहना है कि इससे अमेरिकी सैनिकों की जान जोखिम में पड़ेगी और जंग खत्म नहीं होगी। खर्ग द्वीप ईरान के 90% तेल निर्यात का केंद्र है। इस कदम से तनाव बढ़ सकता है और वैश्विक तेल बाजार पर भी बड़ा असर पड़ सकता है।
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ट्रंप ने कहा कि अमेरिका के पास कई विकल्प हैं और जरूरत पड़ी तो खर्ग द्वीप पर कब्जा भी किया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि वहां ईरान की रक्षा कमजोर है और अमेरिका इसे आसानी से ले सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि अगर ऐसा किया गया तो अमेरिकी सेना को वहां लंबे समय तक रहना पड़ेगा।
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क्या खर्ग द्वीप इतना अहम है?
खर्ग द्वीप ईरान के तेल निर्यात का सबसे बड़ा केंद्र है। करीब 90 प्रतिशत तेल यहीं से बाहर जाता है। फारस की खाड़ी में स्थित यह द्वीप रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि ईरान के कई तटीय इलाके बड़े जहाजों के लिए उपयुक्त नहीं हैं। इसलिए इस द्वीप पर कब्जा करना सीधे ईरान की अर्थव्यवस्था पर चोट होगा।
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क्या इस कदम से जंग खत्म हो सकती है?
विशेषज्ञों का कहना है कि खर्ग द्वीप पर कब्जा करने से ईरान कमजोर जरूर होगा, लेकिन इससे जंग खत्म होने की गारंटी नहीं है। उनका मानना है कि ईरान के पास अन्य छोटे बंदरगाह भी हैं और वह अपने तेल निर्यात को पूरी तरह बंद नहीं करेगा। ऐसे में यह कदम निर्णायक साबित नहीं होगा।
क्या अमेरिकी सैनिकों के लिए खतरा बढ़ेगा?
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि खर्ग द्वीप ईरान के मुख्य भूभाग से सिर्फ 33 किलोमीटर दूर है। ऐसे में ईरान वहां से मिसाइल, ड्रोन और तोपों से हमला कर सकता है। इससे अमेरिकी सैनिकों की जान खतरे में पड़ सकती है। पहाड़ी इलाकों के कारण हमलों का पता लगाना भी मुश्किल हो सकता है।
क्या संघर्ष और फैल सकता है?
इस कदम से तनाव और बढ़ सकता है। ईरान और उसके सहयोगी, जैसे यमन के हूती विद्रोही, जवाबी कार्रवाई तेज कर सकते हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य में बारूदी सुरंगें बिछाने या ड्रोन हमले बढ़ाने की आशंका भी जताई जा रही है। इससे वैश्विक तेल आपूर्ति और कीमतों पर बड़ा असर पड़ सकता है।
क्या अमेरिका के पास कोई और विकल्प है?
विशेषज्ञों का मानना है कि जमीन पर कब्जा करने के बजाय समुद्री नाकेबंदी बेहतर विकल्प हो सकता है। इसके तहत उन जहाजों को रोका जा सकता है, जो ईरान से तेल लेकर निकलते हैं। इससे बिना सैनिकों को जोखिम में डाले ईरान के तेल कारोबार पर दबाव बनाया जा सकता है।
क्या पहले से हो रही है कार्रवाई?
रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका पहले ही खर्ग द्वीप के कई ठिकानों पर हमले कर चुका है। इसमें एयर डिफेंस, रडार साइट, एयरपोर्ट और अन्य सैन्य ठिकाने शामिल हैं। इसके बावजूद विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ एक द्वीप पर कब्जा कर लेना पूरे युद्ध का हल नहीं हो सकता।
अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के खर्ग द्वीप पर कब्जे का संकेत दिया है, लेकिन विशेषज्ञों ने इसे खतरनाक बताया है। उनका कहना है कि इससे अमेरिकी सैनिकों की जान जोखिम में पड़ेगी और जंग खत्म नहीं होगी। खर्ग द्वीप ईरान के 90% तेल निर्यात का केंद्र है। इस कदम से तनाव बढ़ सकता है और वैश्विक तेल बाजार पर भी बड़ा असर पड़ सकता है।
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