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King Charles: किंग चार्ल्स का अमेरिका दौरा क्यों है खास? शाही परिवार की सॉफ्ट पावर से बन सकती है बिगड़ी बात

पीटीआई, वॉशिंगटन Published by: Nitin Gautam Updated Thu, 30 Apr 2026 11:44 AM IST
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सार

ईरान युद्ध में साथ न देने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, सार्वजनिक तौर पर ब्रिटिश सरकार की आलोचना कर चुके हैं और वे नाटो के भविष्य पर भी सवाल उठा चुके हैं। हालांकि अब किंग चार्ल्स के अमेरिका दौरे से दोनों देशों के संबंधों में फिर से गरमाहट आने की उम्मीद की जा रही है। आइए जानते हैं कैसे..

King Charles US trip shows royalty soft power even in times of war
ट्रंप के साथ किंग चार्ल्स - फोटो : पीटीआई
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विस्तार

अमेरिका इस सप्ताह ब्रिटेन के राजा किंग चार्ल्स तृतीय और रानी कैमिला के राजकीय दौरे की मेजबानी कर रहा है। किंग चार्ल्स का यह दौरा कई मायनों में खास है। दरअसल यह दौरा एक तरह से अमेरिका और ब्रिटेन के रिश्तों में आ रही खटास को खत्म करने का अहम मौका है और इसमें ब्रिटेन की शाही परिवार की सॉफ्ट पावर बेहद अहम है। किंग चार्ल्स ने भी अमेरिका में अपने बयानों में नाटो की एकजुटता पर जोर दिया है। 
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ईरान युद्ध के चलते अमेरिका-ब्रिटेन के संबंधों में तनाव
पहले टैरिफ युद्ध और अब ईरान युद्ध में शामिल होने से ब्रिटेन के इनकार के चलते अमेरिका और ब्रिटेन के संबंध तनावपूर्ण चल रहे हैं। ईरान युद्ध में साथ नहीं देने के लिए ट्रंप कई बार सार्वजनिक तौर पर ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर की तीखी आलोचना कर चुके हैं। अमेरिका के साथ ब्रिटेन के संबंध मजबूत करने के लिए ब्रिटिश शाही परिवार का इस्तेमाल ब्रिटेन की पुरानी रणनीति रही है। ट्रंप ऐसे एकमात्र अमेरिकी राष्ट्रपति हैं जिन्हें ब्रिटेन ने दो बार राजकीय दौरे का सम्मान दिया है, और वे किंग चार्ल्स के साथ अपनी दोस्ती की खुलकर तारीफ करते हैं। हालांकि सांविधानिक सम्राट होने के नाते किंग चार्ल्स सरकार की आधिकारिक नीति से अलग कोई बयान नहीं दे सकते। ऐसे में अगर ट्रंप, ईरान पर हमले में ब्रिटेन की मदद न मिलने पर फॉकलैंड द्वीप पर अर्जेंटीना के दावे का समर्थन करते हैं तो किंग चार्ल्स इस पर सीधे प्रतिक्रिया नहीं दे सकते।  
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किंग चार्ल्स ने ब्रिटेन-अमेरिका के संबंधों को बताया सबसे बड़ा गठबंधन
ओवल ऑफिस में मुलाकात और कांग्रेस को संबोधित करने के दौरान किंग चार्ल्स ने अमेरिका और ब्रिटेन के बीच मतभेदों के बावजूद दोनों देशों के गठबंधन को मानव इतिहास के सबसे बड़े गठबंधनों में से एक बताया। उन्होंने यूक्रेन की मदद का भी आह्वान किया और पर्यावरण संरक्षण पर भी ध्यान देने की बात कही, जो ट्रंप की प्राथमिकता में बिल्कुल भी नहीं है। 

शाही दौरे से सुधर सकते हैं दोनों देशों के रिश्ते
औपचारिकताओं से परे, यह सवाल बना हुआ है कि क्या यह दौरा ट्रंप की विदेश नीति को प्रभावित कर पाएगा। यह दौरा दोनों नेताओं के लिए अपनी छवि मजबूत करने का अवसर भी है। ईरान युद्ध लंबा खिंचने और महंगाई बढ़ने से ट्रंप की लोकप्रियता प्रभावित हो रही है। ऐसे में व्हाइट हाउस को उम्मीद है कि शाही मुलाकात की तस्वीरें ध्यान भटका सकती हैं। वहीं ब्रिटेन के लिए यह दौरा दिखाता है कि राजशाही आज भी उसकी अहम सॉफ्ट पावर है। पूर्व ऑस्ट्रेलियाई उच्चायुक्त जॉर्ज ब्रैंडिस के अनुसार, किंग चार्ल्स के पास दशकों का अनुभव है, जिससे वे विदेशी नेताओं को प्रभावित कर सकते हैं। कुल मिलाकर, यह दौरा राजनीतिक बदलाव लाने में भले सीमित रहे, लेकिन यह जरूर दिखाता है कि अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में राजशाही की भूमिका अब भी प्रासंगिक है। 


 
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