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NASA: भारतीय मूल के अंतरिक्ष यात्री अनिल मेनन पहली बार अंतरिक्ष के लिए रवाना, आठ महीने तक ISS पर करेंगे रिसर्च
Tue, 14 Jul 2026 08:58 PM IST
Pavan
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, अस्ताना
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Published by: Pavan
Updated Tue, 14 Jul 2026 08:58 PM IST
सार
भारतीय मूल के अंतरिक्ष यात्री अनिल मेनन ने रूस के सोयुज एमएस-29 अंतरिक्ष यान से पहली बार ISS के लिए उड़ान भरी। वह आठ महीने तक अंतरिक्ष में रहकर मानव शरीर पर माइक्रोग्रैविटी के प्रभाव, अंतरिक्ष में आईवी फ्लूड बनाने की तकनीक और एआई व ऑगमेंटेड रियलिटी आधारित चिकित्सा प्रणालियों से जुड़े महत्वपूर्ण वैज्ञानिक प्रयोग करेंगे। उनकी पृथ्वी पर वापसी 2027 में होगी।
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अंतरिक्ष यात्रा पर रवाना हुए अनिल मेनन और अन्य
- फोटो : X @Space_Station
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विस्तार
भारतीय मूल के अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री अनिल मेनन ने मंगलवार को पहली बार अंतरिक्ष की उड़ान भरते हुए इतिहास रच दिया। वह रूस के सोयुज एमएस-29 (Soyuz MS-29) अंतरिक्ष यान से अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) के लिए रवाना हुए। उनके साथ रूसी अंतरिक्ष यात्री प्योत्र डुब्रोव और अन्ना किकिना भी इस मिशन का हिस्सा हैं। यह प्रक्षेपण कजाकिस्तान के ऐतिहासिक बाइकोनूर कॉसमोड्रोम से भारतीय समयानुसार मंगलवार रात 8:17 बजे किया गया। सोयुज अंतरिक्ष यान के उड़ान भरने के करीब तीन घंटे बाद अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन से जुड़ने (डॉक) की उम्मीद है।
आठ महीने तक अंतरिक्ष स्टेशन पर रहेंगे
नासा के अनुसार, अनिल मेनन और उनके दोनों साथी अंतरिक्ष यात्री करीब आठ महीने तक अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर रहेंगे। इस दौरान वे कई वैज्ञानिक प्रयोग और नई तकनीकों का परीक्षण करेंगे। मिशन पूरा होने के बाद उनकी पृथ्वी पर वापसी वर्ष 2027 में होगी।
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यह भी पढ़ें- Ukraine War: 'PM मोदी की बात सुनते हैं पुतिन, युद्ध रुकवा सकता है भारत', पोलैंड के अधिकारी का बड़ा बयान
मानव शरीर पर अंतरिक्ष के प्रभाव का करेंगे अध्ययन
इस मिशन के दौरान अनिल मेनन ऐसे कई महत्वपूर्ण प्रयोगों में हिस्सा लेंगे, जिनका उद्देश्य यह समझना है कि लंबे समय तक अंतरिक्ष में रहने से मानव शरीर पर क्या असर पड़ता है।
वैज्ञानिक विशेष रूप से इन बातों का अध्ययन करेंगे-
अनिल मेनन उस तकनीक के परीक्षण में भी शामिल होंगे, जिसमें अंतरिक्ष स्टेशन के पीने के पानी से इंट्रावेनस (आईवी) फ्लूड यानी नसों के जरिए चढ़ाई जाने वाली दवा तैयार करने की संभावना पर काम किया जाएगा। वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि यह तकनीक सफल होती है तो भविष्य में चंद्रमा और मंगल ग्रह जैसे लंबे अंतरिक्ष अभियानों के दौरान अंतरिक्ष यात्रियों को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने में यह बड़ी मदद साबित होगी।
एआई और ऑगमेंटेड रियलिटी का भी होगा इस्तेमाल
नासा के मुताबिक, मिशन के दौरान अनिल मेनन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और ऑगमेंटेड रियलिटी (एआर) आधारित अल्ट्रासाउंड तकनीक का भी परीक्षण करेंगे। इसका उद्देश्य ऐसी चिकित्सा प्रणाली विकसित करना है, जिससे भविष्य में दूर अंतरिक्ष अभियानों पर मौजूद अंतरिक्ष यात्री सीमित संसाधनों में भी बेहतर इलाज और स्वास्थ्य जांच कर सकें।
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भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों के लिए अहम मिशन
विशेषज्ञों का मानना है कि इस मिशन से मिलने वाले आंकड़े और तकनीकी अनुभव भविष्य में चंद्रमा और मंगल ग्रह पर मानव मिशनों की तैयारी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। अनिल मेनन द्वारा किए जाने वाले प्रयोग अंतरिक्ष चिकित्सा और लंबी अवधि के मानव अंतरिक्ष अभियानों को अधिक सुरक्षित और सफल बनाने में मदद करेंगे।
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.@NASA astronaut Anil Menon and Roscosmos cosmonauts Pyotr Dubrov and Anna Kikina lifted off atop the Soyuz MS-29 spacecraft at 10:47 a.m. EDT today for a 1:56 p.m. docking to the International Space Station. More... https://t.co/OgfE3jFh0Y pic.twitter.com/D0IWMdUbZP
— International Space Station (@Space_Station) July 14, 2026
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आठ महीने तक अंतरिक्ष स्टेशन पर रहेंगे
नासा के अनुसार, अनिल मेनन और उनके दोनों साथी अंतरिक्ष यात्री करीब आठ महीने तक अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर रहेंगे। इस दौरान वे कई वैज्ञानिक प्रयोग और नई तकनीकों का परीक्षण करेंगे। मिशन पूरा होने के बाद उनकी पृथ्वी पर वापसी वर्ष 2027 में होगी।
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यह भी पढ़ें- Ukraine War: 'PM मोदी की बात सुनते हैं पुतिन, युद्ध रुकवा सकता है भारत', पोलैंड के अधिकारी का बड़ा बयान
मानव शरीर पर अंतरिक्ष के प्रभाव का करेंगे अध्ययन
इस मिशन के दौरान अनिल मेनन ऐसे कई महत्वपूर्ण प्रयोगों में हिस्सा लेंगे, जिनका उद्देश्य यह समझना है कि लंबे समय तक अंतरिक्ष में रहने से मानव शरीर पर क्या असर पड़ता है।
वैज्ञानिक विशेष रूप से इन बातों का अध्ययन करेंगे-
- माइक्रोग्रैविटी (गुरुत्वाकर्षण रहित वातावरण) में शरीर में रक्त का प्रवाह कैसे बदलता है।
- नसों की संरचना में क्या बदलाव आते हैं।
- खून की संरचना और उसके विभिन्न तत्वों पर अंतरिक्ष का क्या प्रभाव पड़ता है।
- अंतरिक्ष में दवा बनाने की नई तकनीक का होगा परीक्षण
अनिल मेनन उस तकनीक के परीक्षण में भी शामिल होंगे, जिसमें अंतरिक्ष स्टेशन के पीने के पानी से इंट्रावेनस (आईवी) फ्लूड यानी नसों के जरिए चढ़ाई जाने वाली दवा तैयार करने की संभावना पर काम किया जाएगा। वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि यह तकनीक सफल होती है तो भविष्य में चंद्रमा और मंगल ग्रह जैसे लंबे अंतरिक्ष अभियानों के दौरान अंतरिक्ष यात्रियों को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने में यह बड़ी मदद साबित होगी।
एआई और ऑगमेंटेड रियलिटी का भी होगा इस्तेमाल
नासा के मुताबिक, मिशन के दौरान अनिल मेनन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और ऑगमेंटेड रियलिटी (एआर) आधारित अल्ट्रासाउंड तकनीक का भी परीक्षण करेंगे। इसका उद्देश्य ऐसी चिकित्सा प्रणाली विकसित करना है, जिससे भविष्य में दूर अंतरिक्ष अभियानों पर मौजूद अंतरिक्ष यात्री सीमित संसाधनों में भी बेहतर इलाज और स्वास्थ्य जांच कर सकें।
यह भी पढ़ें- West Asia Conflict: ट्रंप को कौन सा संदेश देना चाह रहे पुतिन, रूस की मदद से कितना बदलेगा संघर्ष?
भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों के लिए अहम मिशन
विशेषज्ञों का मानना है कि इस मिशन से मिलने वाले आंकड़े और तकनीकी अनुभव भविष्य में चंद्रमा और मंगल ग्रह पर मानव मिशनों की तैयारी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। अनिल मेनन द्वारा किए जाने वाले प्रयोग अंतरिक्ष चिकित्सा और लंबी अवधि के मानव अंतरिक्ष अभियानों को अधिक सुरक्षित और सफल बनाने में मदद करेंगे।