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नेपाल में क्या हैं इस चुनाव के मुद्दे?: पीएम पद के लिए किसके बीच मुकाबला, कौन से अहम चेहरे मैदान में

स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: Kirtivardhan Mishra Updated Thu, 05 Mar 2026 10:34 AM IST
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सार

नेपाल के चुनाव में इस बार कौन सी पार्टियां मैदान में हैं? इस चुनाव में प्रधानमंत्री पद के लिए कौन-कौन ताल ठोंक रहा है? इस चुनाव में मुद्दे क्या हैं? वह कौन सी सीटें हैं, जहां चुनाव पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी? आइये जानते हैं...

Nepal Elections 2026 Who are the Prime Minister contenders Political Parties and Whats the issues and stake
नेपाल चुनाव में खड़े अहम चेहरे। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

नेपाल में गुरुवार (5 मार्च) को होने वाले चुनावों के लिए देश के सियासी दलों ने कमर कस ली है। सितंबर में जेन जेड की ओर से किए गए प्रदर्शनों के बाद अब यह पहला चुनाव है। एक ओर जहां इस चुनाव में कुछ नई पार्टियां युवाओं के वोटों को हासिल कर नेपाल की राजनीतिक पृष्ठभूमि को बदलने के लिए संघर्ष करेंगी तो कुछ पुराने दल इस चुनाव में अपनी वैधता की लड़ाई जारी रखेंगे। इनमें से कई पार्टियां तो अपना राष्ट्रीय दर्जा तक बचाने की जंग में होंगी। 
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ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर नेपाल के चुनाव में इस बार कौन सी पार्टियां मैदान में हैं? इस चुनाव में प्रधानमंत्री पद के लिए कौन-कौन ताल ठोंक रहा है? इस चुनाव में मुद्दे क्या हैं? वह कौन सी सीटें हैं, जहां चुनाव पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी? आइये जानते हैं...
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नेपाल चुनाव में कौन सी पार्टियां मैदान में, इनका एजेंडा क्या?

नेपाल चुनाव में इस बार कौन ठोंक रहा पीएम पद के लिए ताल?

नेपाल के आम चुनावों में प्रधानमंत्री पद के लिए मुख्य रूप से चार बड़े नेता ताल ठोंक रहे हैं। हालांकि, अलग-अलग सर्वे एजेंसियों का मानना है कि मुख्य मुकाबला जेन जेड प्रदर्शनों के बाद उभरे बालेन्द्र शाह और इस प्रदर्शन के बाद पद छोड़ने को मजबूर हुए केपी शर्मा ओली के बीच ही होगा। 

1. बालेन्द्र शाह (बालेन)

35 वर्षीय बालेन का जन्म 1990 में काठमांडू में हुआ था, जब नेपाल में माओवादी गृहयुद्ध चल रहा था। पेशे से वह एक सिविल इंजीनियर हैं और राजनीति में आने से पहले एक अंडरग्राउंड हिप-हॉप आर्टिस्ट (रैपर) हुआ करते थे। उनके गानों में अक्सर भ्रष्टाचार और असमानता का कड़ा विरोध देखने को मिलता था, जिससे उन्हें युवाओं के बीच खासी पहचान मिली। 

सियासी सफर: संगीत से मिली अपनी लोकप्रियता को उन्होंने राजनीति में मोड़ा और 2022 में काठमांडू के पहले निर्दलीय मेयर चुने गए। मेयर के रूप में उन्होंने टैक्स चोरी, ट्रैफिक जाम और कचरा प्रबंधन जैसे मुद्दों पर कड़े फैसले लिए और एक स्पष्टवादी सुधारक की छवि बनाई। सितंबर 2025 के युवाओं के प्रदर्शनों का समर्थन करने के बाद, वह दिसंबर 2025 में राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी में शामिल हो गए। 

बालेंद्र शाह अब नेपाल में राजनीतिक बदलाव और सुशासन के एक प्रमुख युवा चेहरे के रूप में उभरे हैं। चुनाव में झापा-5 निर्वाचन क्षेत्र से वह पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को सीधी चुनौती दे रहे हैं।

2. केपी शर्मा ओली

74 वर्षीय और चार बार नेपाल के प्रधानमंत्री रह चुके ओली कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल-यूएमएल के नेता हैं। ओली नेपाल के सबसे अनुभवी और सियासी ध्रुवीकरण करने वाले प्रमुख नेताओं में से एक हैं। किशोरावस्था में ही वह अंडरग्राउंड कम्युनिस्ट गतिविधियों से जुड़ गए थे। 1973 में राजशाही के खिलाफ अभियान चलाने के कारण उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था और उन्होंने अपनी जिंदगी के 14 साल जेल में बिताए, जिनमें से 4 साल एकांतवास वाली जेल (सॉलिटरी कन्फाइनमेंट) में थे। 

सियासी सफर: लगभग छह दशकों के राजनीतिक करियर में वह चार बार नेपाल के प्रधानमंत्री रह चुके हैं। उनके आलोचक उन पर सत्तावादी होने और असहमति बर्दाश्त न करने का आरोप लगाते हैं, जबकि उनके समर्थक उन्हें मजबूत और राष्ट्रवादी नेता मानते हैं, जिसने भारत और चीन के साथ संबंधों को ठीक से साधा है। सितंबर 2025 के प्रदर्शनों के दौरान 77 लोगों की मौत का आरोप उन पर लगा था, हालांकि वह इसे नकारते हुए हिंसा के लिए घुसपैठियों को जिम्मेदार ठहराते हैं।

इसी युवा आंदोलन के कारण उन्हें सत्ता से बेदखल होना पड़ा था, लेकिन वह अपनी पार्टी के सबसे बड़े दल के रूप में उभरने और एक बार फिर से प्रधानमंत्री पद पर वापसी की उम्मीद कर रहे हैं।

3. गगन थापा

गगन थापा का जन्म 1976 में हुआ था। 1990 में पूर्ण राजशाही के खिलाफ हुए लोकतंत्र समर्थक आंदोलन के दौरान एक किशोर के रूप में ही उनका झुकाव राजनीति की ओर हो गया था। 

सियासी सफर: उन्होंने 'नेपाली कांग्रेस' से जुड़ी छात्र राजनीति के जरिए अपनी जगह बनाई और 2006 के उस ऐतिहासिक जन-आंदोलन का प्रमुख चेहरा बने, जिसने राजा को सत्ता छोड़ने पर मजबूर कर दिया था। 

विरोध प्रदर्शनों के कारण कई बार जेल जा चुके थापा जब नेपाल की संसद में पहुंचे, तो वह वहां के सबसे कम उम्र के सदस्यों में से एक थे। वह नेपाल के स्वास्थ्य मंत्री भी रह चुके हैं। जनवरी 2026 में उन्होंने शेर बहादुर देउबा के खिलाफ पार्टी के भीतर विद्रोह का नेतृत्व किया और पार्टी प्रमुख चुने गए। वह खुद को ऊर्जा और अनुभव के सही मिश्रण के रूप में पेश करते हैं। 49 वर्षीय गगन थापा नेपाली कांग्रेस के नए नेता हैं और पार्टी उन्हें अपने प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में पेश कर रही है। 

4. पुष्प कमल दहल 'प्रचंड'

71 वर्षीय पूर्व माओवादी नेता और तीन बार के प्रधानमंत्री प्रचंड अब नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी का नेतृत्व कर रहे हैं और वह भी प्रधानमंत्री पद के प्रमुख दावेदारों में गिने जा रहे हैं। मुख्यधारा की राजनीति में आने से पहले, प्रचंड एक पूर्व माओवादी नेता थे, जिन्होंने 2006 में राजनीति में शामिल होने से पहले एक दशक (1996 से 2006 तक) खूनी माओवादी विद्रोह का नेतृत्व किया था। वह तीन बार (2008-09, और 2016-17 के दौरान दो बार) देश के प्रधानमंत्री रह चुके हैं। हालांकि, एक बड़े नेता होने के बावजूद हाल के समय में उनकी लोकप्रियता में काफी गिरावट दर्ज की गई है।

इन प्रमुख चेहरों के अलावा, शेर बहादुर देउबा जैसे कई अन्य पूर्व प्रधानमंत्री भी चुनाव नहीं लड़ने या पीछे हटने के बावजूद पर्दे के पीछे से नेपाल की राजनीति में अपना खासा प्रभाव बनाए हुए हैं। एक अन्य पूर्व प्रधानमंत्री बाबूराम भट्टाराय ने अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली है और चुनाव के बाद एक अभिभावक (संभवतः राष्ट्रपति पद) की भूमिका निभाने की इच्छा जताई है।

इस चुनाव में मुद्दे क्या हैं? 

नेपाल में सितंबर 2025 में हुए युवाओं के प्रदर्शन मुख्य तौर पर तीन गंभीर समस्याओं से प्रेरित थे। इनमें सरकार में भ्रष्टाचार और वंशवाद, बेरोजगारी और आर्थिक ठहराव-गरीबी प्रमुख थे। ऐसे में अधिकतर राजनीतिक दलों ने इन्हीं तीन मुद्दों के इर्द-गिर्द अपनी राजनीति तय की है। 

भ्रष्टाचार और सुशासन: सितंबर 2025 में युवाओं के भारी विरोध-प्रदर्शनों के बाद, भ्रष्टाचार पर लगाम लगाना और बेहतर सुशासन देना इस चुनाव का सबसे बड़ा मुद्दा बन गया है। युवाओं की मुख्य मांग यह रही है कि भ्रष्ट नेताओं को सजा मिले और सरकारी कामकाज में पारदर्शिता आए।

बेरोजगारी और रोजगार सृजन: नेपाल में युवाओं के बीच बेरोजगारी की दर काफी अधिक है, जिसके कारण रोजगार पैदा करना सभी राजनीतिक दलों के लिए एक प्रमुख चुनावी मुद्दा है।

आर्थिक ठहराव और गरीबी: नेपाल की लगभग 20 प्रतिशत आबादी अभी भी गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन कर रही है। ऐसे में थमी हुई अर्थव्यवस्था को फिर से गति देना और गरीबी कम करना मतदाताओं और चुनाव के अहम मुद्दों में शामिल है।

विदेशी कूटनीति और भू-राजनीतिक संतुलन: नेपाल एक लैंडलॉक देश है, इसलिए भारत और चीन जैसे शक्तिशाली पड़ोसी और प्रमुख व्यापारिक भागीदार देशों के साथ संबंधों को साधना भी एक बड़ा चुनावी मुद्दा है। इसके अलावा अमेरिका भी इस चुनाव में रणनीतिक रूप से दिलचस्पी ले रहा है, जिससे इन देशों के बीच कूटनीतिक संतुलन बनाए रखना अगली सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती और मतदाताओं के लिए अहम विषय है।

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