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White House: ऑपरेशन एपिक फ्यूरी ने तोड़ी तेहरान की कमर! US का दावा- ईरान के 2000 से अधिक ठिकानों को किया तबाह
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
Published by: अमन तिवारी
Updated Thu, 05 Mar 2026 08:52 AM IST
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सार
अमेरिका ने ईरान के खिलाफ 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' के तहत 2000 से ज्यादा ठिकानों पर हमला किया है। इसमें ईरान की मिसाइल और नौसैनिक ताकत को भारी नुकसान पहुंचा है। सर्वोच्च नेता खामेनेई समेत 49 ईरानी नेता मारे गए हैं। इस अभियान में 6 अमेरिकी सैनिक भी शहीद हुए हैं।
व्हाइट हाउस की प्रवक्ता कैरोलिन लेविट
- फोटो : X@WhiteHouse
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विस्तार
संयुक्त राज्य अमेरिका ने बताया कि ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई में 2000 से ज्यादा ठिकानों को निशाना बनाया गया है। इस हमले ने तेहरान की मिसाइल और नौसैनिक शक्ति को बहुत कमजोर कर दिया है। वहीं, व्हाइट हाउस ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के ऑपरेशन एपिक फ्यूरी शुरू करने के फैसले का बचाव किया है।
क्या बोलीं व्हाइट हाउस प्रेस सचिव
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने जानकारी दी कि इस अभियान का मुख्य मकसद ईरान के मिसाइल खतरे को खत्म करना है। अमेरिका ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकना चाहता है। लेविट ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप के नेतृत्व में ईरान के शासन को कुचला जा रहा है। हमलों में सैकड़ों बैलिस्टिक मिसाइलें, लॉन्चर और ड्रोन नष्ट हो गए हैं। इस कार्रवाई ने क्षेत्र में अमेरिकी सेना और साथियों को धमकी देने की ईरान की क्षमता को खत्म कर दिया है।
अमेरिकी सेना ने ईरान के नौसैनिक बेड़े को भी बड़ा नुकसान पहुंचाया है। मंगलवार रात टॉरपीडो हमलों में ईरान की सबसे आधुनिक पनडुब्बी और 20 से ज्यादा जहाज तबाह कर दिए गए। अब होर्मुज जलडमरूमध्य और ओमान की खाड़ी में एक भी ईरानी जहाज नहीं बचा है। ईरानी नौसेना की गतिविधियां लगभग पूरी तरह रुक गई हैं।
ये भी पढ़ें: US-Iran War: ईरान युद्ध पर अमेरिका का बड़ा कबूलनामा; रक्षा मंत्री हेगसेथ बोले- हर मिसाइल रोक पाना संभव नहीं
क्या हैं सैन्य अभियान चार मुख्य उद्देश्य
इस सैन्य अभियान के चार मुख्य उद्देश्य हैं। इनमें ईरान की मिसाइल क्षमता को खत्म करना, नौसेना को नुकसान पहुंचाना, आतंकी नेटवर्क को कमजोर करना और परमाणु हथियार रोकने की कोशिश शामिल है। लेविट ने कहा, अभियान शुरू होने के बाद से ईरान के मिसाइल हमलों में 86 प्रतिशत की कमी आई है।
अब तक 49 से ज्यादा वरिष्ठ नेता ढेर
व्हाइट हाउस ने बताया कि अभियान में ईरान के बड़े नेताओं को भी निशाना बनाया गया। सर्वोच्च नेता खामेनेई समेत ईरान के 49 से ज्यादा वरिष्ठ नेता मारे गए हैं। व्हाइट हाउस ने कहा कि इन आतंकियों को खत्म करना दुनिया की सुरक्षा के लिए जरूरी था।
छह अमेरिकी सैनिक हुए शहीद
इस सैन्य कार्रवाई में अमेरिका के छह सैनिक शहीद हुए हैं। राष्ट्रपति ट्रंप इन शहीदों के अंतिम संस्कार में शामिल होने की योजना बना रहे हैं। ऑपरेशन एपिक फ्यूरी शुरू होने के बाद से अब तक 17,500 से ज्यादा अमेरिकी नागरिक मिडिल ईस्ट से सुरक्षित अपने घर लौट चुके हैं। अमेरिका स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए है।
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क्या बोलीं व्हाइट हाउस प्रेस सचिव
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने जानकारी दी कि इस अभियान का मुख्य मकसद ईरान के मिसाइल खतरे को खत्म करना है। अमेरिका ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकना चाहता है। लेविट ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप के नेतृत्व में ईरान के शासन को कुचला जा रहा है। हमलों में सैकड़ों बैलिस्टिक मिसाइलें, लॉन्चर और ड्रोन नष्ट हो गए हैं। इस कार्रवाई ने क्षेत्र में अमेरिकी सेना और साथियों को धमकी देने की ईरान की क्षमता को खत्म कर दिया है।
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अमेरिकी सेना ने ईरान के नौसैनिक बेड़े को भी बड़ा नुकसान पहुंचाया है। मंगलवार रात टॉरपीडो हमलों में ईरान की सबसे आधुनिक पनडुब्बी और 20 से ज्यादा जहाज तबाह कर दिए गए। अब होर्मुज जलडमरूमध्य और ओमान की खाड़ी में एक भी ईरानी जहाज नहीं बचा है। ईरानी नौसेना की गतिविधियां लगभग पूरी तरह रुक गई हैं।
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क्या हैं सैन्य अभियान चार मुख्य उद्देश्य
इस सैन्य अभियान के चार मुख्य उद्देश्य हैं। इनमें ईरान की मिसाइल क्षमता को खत्म करना, नौसेना को नुकसान पहुंचाना, आतंकी नेटवर्क को कमजोर करना और परमाणु हथियार रोकने की कोशिश शामिल है। लेविट ने कहा, अभियान शुरू होने के बाद से ईरान के मिसाइल हमलों में 86 प्रतिशत की कमी आई है।
अब तक 49 से ज्यादा वरिष्ठ नेता ढेर
व्हाइट हाउस ने बताया कि अभियान में ईरान के बड़े नेताओं को भी निशाना बनाया गया। सर्वोच्च नेता खामेनेई समेत ईरान के 49 से ज्यादा वरिष्ठ नेता मारे गए हैं। व्हाइट हाउस ने कहा कि इन आतंकियों को खत्म करना दुनिया की सुरक्षा के लिए जरूरी था।
छह अमेरिकी सैनिक हुए शहीद
इस सैन्य कार्रवाई में अमेरिका के छह सैनिक शहीद हुए हैं। राष्ट्रपति ट्रंप इन शहीदों के अंतिम संस्कार में शामिल होने की योजना बना रहे हैं। ऑपरेशन एपिक फ्यूरी शुरू होने के बाद से अब तक 17,500 से ज्यादा अमेरिकी नागरिक मिडिल ईस्ट से सुरक्षित अपने घर लौट चुके हैं। अमेरिका स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए है।
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