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Pakistan Economy Crisis: पाकिस्तान में डॉलर का सूखा, वित्तीय बाजारों का टूट रहा है भरोसा

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद Published by: Harendra Chaudhary Updated Thu, 22 Dec 2022 04:47 PM IST
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सार

Pakistan Economy Crisis: वित्त राज्यमंत्री आयशा ग़ौस पाशा ने हाल में यह स्वीकार किया था कि देश की अर्थव्यवस्था में मुश्किलें कायम हैं। उन्होंने यह भी स्वीकार किया था कि इन मुश्किलों को दूर करने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए जा सके हैं...

Pakistan Economy Crisis: financial condition of pakistan continuously deteriorating amidst the continuous poli
Pakistan Economy Crisis: State Bank of Pakistan - फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार

पाकिस्तान (Pakistan Economy Crisis) में लगातार जारी सियासी टकरावों के बीच देश की वित्तीय हालत लगातार बिगड़ रही है। देश के खुले बाजार से डॉलर लगभग गायब हो गया है। इस कारण इंटर-बैंक भुगतान ठहर-से गए हैं। एयरलाइंस को भुगतान नहीं हो पा रहा है। उधर आयात की जाने वाली बहुत सी वस्तुएं भुगतान ना होने के कारण विदेशी बंदरगाहों पर अटकी हुई हैं। अखबार द डॉन में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक लेटर ऑफ क्रेडिट खोलना मुश्किल हो गया है, जबकि देश के विदेश स्थित दूतावासों या वाणिज्य दूतावासों से लेन-देन में भी कठिनाई आ रही है।

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करेंसी डीलर आतिफ अहमद ने द डॉन से कहा कि यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद मुश्किलें बढ़नी शुरू हुईं। इसका एक पहलू डॉलर की कीमत का बढ़ना रहा है। उन्होंने कहा- ‘रूस से तेल और गैस की सप्लाई घट जाने के कारण यूरोपियन यूनियन पर बहुत खराब असर पड़ा। अमेरिका इन मामलों में आत्मनिर्भर है, इसलिए यूरो और पाउंड की तुलना में डॉलर मजबूत हुआ। जब रूस ने तेल खरीदारों से रुबल में भुगतान करने को कहा, तो उससे भी डॉलर की मांग बढ़ी। कारोबारी डॉलर खरीदने लगे ताकि उसे वे रुबल में कन्वर्ट कर पाएं।’

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विशेषज्ञों के मुताबिक इससे विनिमय दरों में उतार-चढ़ाव के आए दौर का पाकिस्तान जैसे कमजोर अर्थव्यवस्था वाले देश पर बहुत बुरा असर हुआ है। अब ये संकट अपनी चरम सीमा पर पहुंचता दिख रहा है। द डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक करेंसी बाजार में डॉलर के अलावा बाकी विदेशी मुद्राएं बाजार में उपलब्ध हैं, लेकिन वे भी बाजार मूल्य पर नहीं मिल पा रही हैं। जिनके पास ये मुद्राएं हैं, वे इन्हें देने के बदले अतिरिक्त रकम मांग रहे हैं। इनमें यूरो, ब्रिटिश पाउंड, दिरहम और सऊदी रियाल शामिल हैं।

करेंसी कारोबारियों के मुताबिक छुट्टियों का सीजन आने से विदेशी मुद्रा की किल्लत बढ़ गई है। पाकिस्तान के धनी लोग साल के अंत में छुट्टियां मनाने के लिए विदेश जा रहे हैं। वे अमेरिका, यूरोप या पश्चिम एशियाई देशों में जा रहे हैं। ऐसे लोग महंगी दरों पर भी विदेशी मुद्राओं की खरीदारी कर रहे हैं।

वित्त राज्यमंत्री आयशा ग़ौस पाशा ने हाल में यह स्वीकार किया था कि देश की अर्थव्यवस्था में मुश्किलें कायम हैं। उन्होंने यह भी स्वीकार किया था कि इन मुश्किलों को दूर करने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए जा सके हैं।

पाकिस्तान के सेंट्रल बैंक- स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान ने हाल में कई बार दावा किया है कि देश के डिफॉल्टर (कर्ज चुकाने में अक्षम) होने की नौबत नहीं आएगी। बैंक के गवर्नर जमीन अहमद ने उम्मीद जताई है कि इसी वित्त वर्ष में पाकिस्तान को 18 से 20 बिलियन डॉलर की विदेशी मुद्रा की प्राप्ति होगी, जिससे संकट टल जाएगा। शहबाज शरीफ सरकार ने उम्मीद जताई है कि चीन 13 बिलियन डॉलर पाकिस्तान में खर्च करेगा, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार की स्थिति सुधरेगी।

लेकिन वित्तीय बाजार को ऐसे आश्वासनों पर ज्यादा भरोसा नहीं है। वित्तीय कंपनी ट्रेसमार्क के सीईओ फैसला माम्सा ने द डॉन से कहा- ‘बाजार को पिछले एक हफ्ते में यही सुनने को मिला है कि मदद देने के सवाल पर मित्र देशों ने चुप्पी साध रखी है। यहां तक कि चीन के व्यापारिक बैंकों से 1.2 बिलियन डॉलर की जो रकम आनी थी, वह भी नहीं आई है।’

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