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US: 'पाकिस्तान भरोसे लायक नहीं, तीन बार यूएस को दे चुका धोखा', अमेरिकी विशेषज्ञ ने फासीवादी इटली से की तुलना

एएनआई, वॉशिंगटन Published by: नितिन गौतम Updated Tue, 16 Jun 2026 01:45 PM IST
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सार

अमेरिका के विशेषज्ञ माइकल रुबिन ने ईरान युद्ध में पाकिस्तान की मध्यस्थता पर गंभीर सवाल उठाए हैं और आरोप लगाया है कि पाकिस्तान अंतिम समझौता नहीं होने देगा और ऐसी स्थिति बनाए रखेगा, जहां तनाव और अराजकता बनी रहेगी। 

Pakistan is not trustworthy mediator in iran deal betrayed usa three times fascist Italy
डोनाल्ड ट्रंप, शहबाज शरीफ - फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार

अमेरिकी विश्लेषक माइकल रुबिन ने ईरान और अमेरिका के बीच जारी कूटनीतिक प्रयासों में पाकिस्तान की भूमिका पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा है कि ईरान संकट के समाधान के लिए पाकिस्तान पर भरोसा करना, ऐसा ही है जैसे द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान नाजी जर्मनी की समस्या सुलझाने के लिए फासीवादी इटली पर निर्भर रहना।


फासीवादी इटली से की पाकिस्तान की तुलना
अमेरिका के मिडिल ईस्ट फोरम में नीति विश्लेषण निदेशक माइकल रुबिन ने भारतीय न्यूज एजेंसी एएनआई के साथ बातचीत में कहा कि पाकिस्तान को भरोसेमंद मध्यस्थ नहीं माना जा सकता, क्योंकि उसने अतीत में कई बार अमेरिका के हितों को नुकसान पहुंचाया है। रुबिन ने कहा, 'डोनाल्ड ट्रंप न केवल बातचीत की मेज पर ईरान के सामने कमजोर साबित हुए, बल्कि उन्होंने मध्यस्थों के चयन में भी गलती की है। कतर और खासकर पाकिस्तान को मध्यस्थ बनाना गंभीर भूल है। ईरान समस्या के समाधान के लिए पाकिस्तान पर निर्भर रहना वैसा ही है जैसे फ्रैंकलिन रूजवेल्ट द्वितीय विश्व युद्ध में नाजी जर्मनी से निपटने के लिए फासीवादी इटली पर भरोसा करते थे।'
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अमेरिका को कई बार धोखा दे चुका पाकिस्तान
रुबिन ने कहा कि किसी भी विवाद में ऐसा मध्यस्थ नहीं चुना जाना चाहिए जो आपकी हार चाहता हो, लेकिन अमेरिका बार-बार वही गलती दोहरा रहा है। पाकिस्तान ने तालिबान को समर्थन देकर और अल-कायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन को अपने क्षेत्र में शरण देकर अमेरिका के भरोसे को कई बार तोड़ा है।
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उन्होंने कहा, 'पाकिस्तान ने तालिबान के मामले में अमेरिका को धोखा दिया। ओसामा बिन लादेन को पनाह देकर भी उसने अमेरिका के साथ विश्वासघात किया। अब वह फिर वही कर रहा है। यह विडंबना है कि पाकिस्तान इस पूरी स्थिति में फायदे में है। पाकिस्तान के परमाणु वैज्ञानिक ए.क्यू. खान ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को शुरुआती आधार देने में भूमिका निभाई थी।'

ईरान के साथ अंतिम समझौता नहीं होने देगा पाकिस्तान
रुबिन ने दावा किया कि पाकिस्तान मध्यस्थ की भूमिका निभाते हुए भी पर्दे के पीछे ऐसा माहौल बनाए रखेगा, जिससे कोई स्थायी समझौता न हो सके और क्षेत्र में अस्थिरता बनी रहे। उन्होंने कहा, 'यह समझना जरूरी है कि पाकिस्तान भले ही मध्यस्थ के रूप में सामने हो, लेकिन वह यह सुनिश्चित करेगा कि अंतिम समझौता कभी न हो। वह ऐसे हालात बनाए रखना चाहेगा, जहां लगातार तनाव और अराजकता बनी रहे। वह एक साथ आग लगाने वाले और आग बुझाने वाले दोनों की भूमिका निभाकर दोनों तरफ से फायदा उठाना चाहता है।' रुबिन की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब अमेरिका और ईरान के बीच हुए शांति समझौते पर इस सप्ताह जिनेवा में औपचारिक हस्ताक्षर होने की संभावना जताई जा रही है।
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