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Pakistan: जीडीपी वृद्धि अपने निचले स्तर पर, लोगों की आय घट रही, डिफॉल्ट होने का खतरा, पाकिस्तान का क्या होगा?

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवेंद्र तिवारी Updated Fri, 26 May 2023 07:53 PM IST
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सार
राष्ट्रीय लेखा समिति ने गुरुवार को जारी एक बयान में बताया कि 30 जून को समाप्त होने वाले वित्तीय वर्ष के लिए सकल घरेलू उत्पाद में महज 0.29 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। पाकिस्तान के इतिहास में यह पांचवीं बार है जब विकास दर 1% से कम रही है। 
 
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Pakistan: GDP growth at its lowest level, per capita income decreasing; What next for the country in debt
पाकिस्तान की जीडीपी - फोटो : AMAR UJALA

विस्तार

पाकिस्तान इन दिनों चौतरफा संकट में घिरा है। राजनीतिक अस्थिरता, भुगतान संतुलन का संकट, तेजी से कम होता विदेशी भंडार और बढ़ता विदेशी ऋण, यानी कुल मिलाकर पाकिस्तान एक आर्थिक बारूद की ढेर पर बैठा है। इन सबके बीच ताजा जीडीपी आंकड़े और डराने वाले हैं। इसके मुताबिक पाकिस्तान की जीडीपी में अब तक सबसे निचले स्तर पर आ गई है।

पाकिस्तान में संकट
पाकिस्तान में संकट - फोटो : Social Media
पाकिस्तान में अर्थव्यवस्था को लेकर नई परेशानी क्या है?
राष्ट्रीय लेखा समिति ने गुरुवार को जारी एक बयान में बताया कि 30 जून को समाप्त होने वाले वित्तीय वर्ष के लिए सकल घरेलू उत्पाद में महज 0.29 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। बता दें कि पिछली गर्मियों में विनाशकारी बाढ़ के बाद जून 2022 में निर्धारित पांच फीसदी जीडीपी लक्ष्य को सितंबर में संशोधित कर 2.3% कर दिया गया था।

1952 तक पाकिस्तान ब्यूरो ऑफ स्टैटिस्टिक्स के आंकड़ों के अनुसार, पाकिस्तान के इतिहास में यह पांचवीं बार है जब विकास दर 1% से कम रही है। पिछली बार ऐसा वित्त वर्ष 2020 में हुआ था जब कोरोना महामारी की वजह से वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं को झटका लगा था।

पाकिस्तान की जर्जर अर्थव्यवस्था
पाकिस्तान की जर्जर अर्थव्यवस्था - फोटो : Social Media
किन-किन क्षेत्रों में लगा झटका?
पाकिस्तान में 2022-23 के दौरान डॉलर के संदर्भ में इसकी जीडीपी के आकार, विकास दर और प्रति व्यक्ति आय में भारी गिरावट आई है। यह स्थिति पिछले चार वर्षों में देश के समग्र उत्पादन में सबसे धीमी वृद्धि को दर्शाती है। 

डॉलर के संदर्भ में अर्थव्यवस्था का आकार वित्त वर्ष 2012 में 375.449 अरब डॉलर से घटकर वित्त वर्ष 23 में 341.554 अरब डॉलर रह गया। अर्थव्यवस्था के आकार में कमी की वजह पाकिस्तानी रुपये की गिरावट को बताया गया है।

 प्रति व्यक्ति आय वित्त वर्ष 2023 में गिरकर 1,568 डॉलर हो गई। पिछले साल प्रति व्यक्ति आय 1,766 डॉलर और वित्त वर्ष 21 में 1,677 डॉलर थी। यह आंकड़े व्यक्तिगत आय में तेज गिरावट के साथ समाज के लगभग सभी वर्गों के जीवन स्तर और कल्याण के बिगड़ने संकेत देते हैं। यह राष्ट्रीय आय में कमी का कारण बन सकता है, वस्तुओं और सेवाओं को वहन करने, बचत करने या निवेश करने की व्यक्तियों की क्षमता को सीमित कर सकता है।

वर्ष 2022-23 के लिए सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर 0.29 प्रतिशत अनुमानित है। कृषि, औद्योगिक और सेवा क्षेत्रों की वृद्धि क्रमशः 1.55 प्रतिशत, 2.94 प्रतिशत और 0.86 प्रतिशत की नकारात्मक वृद्धि का अनुमान लगाया गया है। हालांकि, औद्योगिक क्षेत्र में 2.94 प्रतिशत और सेवा क्षेत्र में 0.86 प्रतिशत की गिरावट का अनुमान है। ये अनुमान अर्थव्यवस्था के प्रदर्शन और गतिशीलता को दर्शाते हैं।

पाकिस्तान आया आईएमएफ का एक प्रतिनिधिमंडल
पाकिस्तान आया आईएमएफ का एक प्रतिनिधिमंडल - फोटो : SOCIAL MEDIA
किस वजह से खराब हुई पाकिस्तान की आर्थिक सेहत?
पाकिस्तान की आर्थिक वृद्धि अपने इतिहास के सबसे निचले स्तरों में से है। रिकॉर्ड मुद्रास्फीति और ब्याज दरों के साथ-साथ रुके हुए अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के बेल आउट पैकेज के बीच देश की आर्थिक हालत और खराब हो गई।

पाकिस्तान में मुद्रास्फीति की दर आसमान छू रही है। यह अप्रैल में 36.4 फीसदी पर आ गई जो लगभग छह दशकों में सबसे अधिक बताई गई है। वहीं, विदेशी मुद्रा भंडार के मोर्चे पर, देश के पास मात्र 4.3 अरब डॉलर बचे हैं, जिससे महज एक महीने का ही आयात संभव है। 

दूसरी तरफ इस्लामाबाद के विदेशी कर्ज की चिंता है, जो 10 अरब डॉलर से अधिक हो गया है। इसने जुलाई 2022 से इस अप्रैल तक अपने चालू खाता घाटे को घटाकर 3.3 बिलियन डॉलर कर दिया है, जो कि 2021-22 की इसी अवधि के 13.6 बिलियन डॉलर से काफी कम है।

इस गिरावट की वजह के बारे में अर्थशास्त्री कहते हैं कि पिछले जुलाई और इस अप्रैल के बीच आयात पिछली इसी अवधि के दौरान 65.5 बिलियन डॉलर की तुलना में कम होकर 47 बिलियन डॉलर तक आ गया है। आयात में इस गिरावट ने पाकिस्तान के विनिर्माण क्षेत्र, निर्यात और जीडीपी को नुकसान पहुंचाया है, जो नकारात्मक वृद्धि की ओर बढ़ रहा है। जानकारों का कहना है कि विदेशी भंडार की कमी के कारण कच्चे माल और मशीनरी के कम आयात ने विनिर्माण क्षेत्र को प्रभावित किया और निर्यात के लिए पाकिस्तान की क्षमता को प्रभावित किया।

शहबाज शरीफ, आईएमएफ
शहबाज शरीफ, आईएमएफ - फोटो : अमर उजाला
पाकिस्तान को मिलने वाली आईएमएफ की मदद का क्या हुआ?
इस्लामाबाद 1.1 अरब डॉलर की किश्त जारी करने के लिए फरवरी की शुरुआत से आईएमएफ के साथ बातचीत कर रहा है। यह किश्त 6.5 अरब डॉलर के बेलआउट पैकेज का हिस्सा है, जिस पर इमरान खान की सरकार ने 2019 में हस्ताक्षर किए थे। पाकिस्तान में आए राजनीतिक खींचतान के कारण, आईएमएफ की लंबित समीक्षा को पूरा करने में गठबंधन सरकार विफल रही है। इसके अलावा पाकिस्तान ने 10वीं-11वीं समीक्षाओं को पूरा करने में भी देरी की। 

पाकिस्तान को ऋण देने के लिए आईएमएफ ने इसके सामने कुछ सख्त शर्तें रखी थीं।  इनमें सब्सिडी में कटौती, विनिमय दर पर कैप हटाना, करों को बढ़ाना और ईंधन और बिजली की कीमतों में बढ़ोतरी शामिल हैं। इन सख्त मांगों को पूरा करने के लिए शहबाज शरीफ की सरकार ने कई निर्णय लिए हैं लेकिन इसके बावजूद सरकार आईएमएफ को विश्वास में नहीं ले सकी है।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ - फोटो : Social Media
पाकिस्तान आर्थिक हालत नहीं सुधरी तो क्या?
कई स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय संगठनों की रिपोर्टों ने पहले ही चेतावनी दी है कि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था डूबने के कगार पर है। रेटिंग एजेंसी मूडीज ने फरवरी में देश की क्रेडिट रेटिंग को घटा दिया था, जबकि इसी महीने में उसने कहा कि अगर पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) से राहत पैकेज हासिल करने में विफल रहता है तो वह जून तक डिफॉल्ट हो सकता है।

इस बीच, अर्थशास्त्रियों को लगता है कि पाकिस्तान के लिए इसके सहयोगी चीन और सऊदी अरब जीवन रेखा है, जो आईएमएफ समझौते में देरी होने पर भी इस्लामाबाद की मदद करना जारी रखेंगे।
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