{"_id":"6938158a53dfc3f27104d1c9","slug":"pakistan-gets-imf-loan-as-relation-with-us-holds-on-pm-shehbaz-sharif-donald-trump-asim-munir-news-and-updates-2025-12-09","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"Pakistan: अमेरिका से दोस्ती का फायदा! पाकिस्तान को फिर मिला 11 हजार करोड़ का कर्ज","category":{"title":"World","title_hn":"दुनिया","slug":"world"}}
Pakistan: अमेरिका से दोस्ती का फायदा! पाकिस्तान को फिर मिला 11 हजार करोड़ का कर्ज
Tue, 09 Dec 2025 05:56 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Tue, 09 Dec 2025 05:56 PM IST
विज्ञापन
आईएमएफ-पाकिस्तान
- फोटो : अमर उजाला प्रिंट
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जब से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तानी सेनाध्यक्ष आसिफ मुनीर को ह्लाइट हाउस में बुलाकर खाना खिलाया है, पाकिस्तान की किस्मत खुल गई है। संभवतः यह डोनाल्ड ट्रंप की दोस्ती का ही असर है कि लगभग दिवालिया होने की कगार पर पहुंच चुके पाकिस्तान को इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (आईएमएफ) से एक बार फिर 1.2 बिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग 10,782 करोड़ रुपये) का कर्ज मिल गया है। इसके पहले भी आईएमएफ ने पाकिस्तान को मोटा कर्ज उपलब्ध कराया था जिससे पाकिस्तान को मदद मिल गई थी। इसके पहले पाकिस्तान को आईएमएफ से कर्ज मिलने के बाद भारत ने विरोध जताया था और पड़ोसी देश का इतिहास देखते हुए इस बात की आशंका जताई थी कि पाकिस्तान इसका उपयोग अपने यहां आतंकवाद को बढ़ाने में करेगा।
आईएमएफ का कर्ज देने के पहले उसकी एक उच्च स्तरीय कमेटी इसका मूल्यांकन करती है। अपने पैमाने पर खरा उतरने के बाद ही किसी देश को आईएमएफ से कर्ज मिल पाता है। लेकिन माना यही जाता है कि आईएमएफ की कार्यप्रणाली पर अमेरिका का भारी प्रभाव रहता है और उसकी सहमति मिलने के बाद कर्ज मिलना आसान हो जाता है। पाकिस्तान के मामले में यही हुआ माना जा रहा है।
विज्ञापन
आईएमएफ का कर्ज देने के पहले उसकी एक उच्च स्तरीय कमेटी इसका मूल्यांकन करती है। अपने पैमाने पर खरा उतरने के बाद ही किसी देश को आईएमएफ से कर्ज मिल पाता है। लेकिन माना यही जाता है कि आईएमएफ की कार्यप्रणाली पर अमेरिका का भारी प्रभाव रहता है और उसकी सहमति मिलने के बाद कर्ज मिलना आसान हो जाता है। पाकिस्तान के मामले में यही हुआ माना जा रहा है।
विज्ञापन
आईएमएफ ने सोमवार को पाकिस्तान के लिए यह फंड जारी करते हुए कहा है कि पाकिस्तान अपने देश में महंगाई को काबू करने में सफल रहा है। वह उन सुधारों की ओर कदम भी बढ़ा रहा है जिससे पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को बेहतर किया जा सके। आईएमएफ ने इस बात पर संतोष जताया है कि पाकिस्तान के कुछ हिस्सों में बाढ़ के बाद वहां महंगाई की दर बढ़ गई थी, इसके बाद भी पाकिस्तान अपने घाटे को एक सीमा में रखने में कामयाब हुआ है।
पाकिस्तान को मदद की एक शर्त के तौर पर उसे अपने यहां आर्थिक सुधारों को लागू करना भी है। पाकिस्तान महत्त्वपूर्ण सेक्टर में निजीकरण को बढ़ावा देकर अर्थव्यवस्था को बेहतर करने के कदम उठा रहा है। आगामी 23 दिसंबर को पाकिस्तान अपनी एयरलाइंस को भी निजी हाथों में सौंपने की तैयारी कर चुका है। इसके लिए चार कंपनियों को शॉर्टलिस्ट भी किया जा चुका है। यदि सब कुछ ठीक ठाक रहा तो पाकिस्तान एयरलाइंस जल्द ही निजी हाथों के द्वारा संचालित होगी। इससे पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को गति मिलने की उम्मीद है।
पाकिस्तान को मदद की एक शर्त के तौर पर उसे अपने यहां आर्थिक सुधारों को लागू करना भी है। पाकिस्तान महत्त्वपूर्ण सेक्टर में निजीकरण को बढ़ावा देकर अर्थव्यवस्था को बेहतर करने के कदम उठा रहा है। आगामी 23 दिसंबर को पाकिस्तान अपनी एयरलाइंस को भी निजी हाथों में सौंपने की तैयारी कर चुका है। इसके लिए चार कंपनियों को शॉर्टलिस्ट भी किया जा चुका है। यदि सब कुछ ठीक ठाक रहा तो पाकिस्तान एयरलाइंस जल्द ही निजी हाथों के द्वारा संचालित होगी। इससे पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को गति मिलने की उम्मीद है।
इसके पहले भी आईएमएफ ने पाकिस्तान को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई थी। अब तक उसे 3.3 बिलियन डॉलर का कर्ज मिल चुका है। एक योजना के अनुसार, उसे करीब सात बिलियन डॉलर की आर्थिक सहायता की जानी है। इससे पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति सुधरने की उम्मीद बन सकती है।
भारत ने जताया था विरोध
इसके पहले आईएमएफ ने पाकिस्तान को करीब 2.1 बिलियन डॉलर की आर्थिक सहायता पहुंचाई थी। इस आर्थिक सहायता की बोर्ड मीटिंग का भारत ने बहिष्कार कर दिया था। भारत ने कहा था कि पाकिस्तान अपने आर्थिक संसाधनों का दुरुपयोग पड़ोसी देश में आतंकवाद फैलाने में करता रहा है। ऐसे में उसे यह आर्थिक सहायता नहीं दी जानी चाहिए। हालांकि, आईएमएफ ने कहा था कि पाकिस्तान अपनी अर्थव्यवस्था में अपेक्षित सुधार कर रहा है और वह इसके लिए उपयुक्त कदम उठा रहा है।
भारत ने जताया था विरोध
इसके पहले आईएमएफ ने पाकिस्तान को करीब 2.1 बिलियन डॉलर की आर्थिक सहायता पहुंचाई थी। इस आर्थिक सहायता की बोर्ड मीटिंग का भारत ने बहिष्कार कर दिया था। भारत ने कहा था कि पाकिस्तान अपने आर्थिक संसाधनों का दुरुपयोग पड़ोसी देश में आतंकवाद फैलाने में करता रहा है। ऐसे में उसे यह आर्थिक सहायता नहीं दी जानी चाहिए। हालांकि, आईएमएफ ने कहा था कि पाकिस्तान अपनी अर्थव्यवस्था में अपेक्षित सुधार कर रहा है और वह इसके लिए उपयुक्त कदम उठा रहा है।
'पाकिस्तान की मदद आतंकवाद को आर्थिक सहायता देने जैसा'
आर्थिक मामलों के जानकार डॉ. नागेंद्र कुमार शर्मा ने अमर उजाला से कहा कि आईएमएफ ने पाकिस्तान को यह मदद आपातकालीन समय में सेवा उपलब्ध कराने और जल संसाधन उपलब्ध कराने के लिए दिया है। आईएमएफ अपने द्वारा दिए गए फंड की मॉनीटरिंग भी करता है। लेकिन पाकिस्तान का इतिहास रहा है कि वह अपने यहां आतंकवादियों को आर्थिक और सैन्य संसाधन उपलब्ध कराता रहा है।
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की इसी हरकत का परिणाम रहा है कि संयुक्त अरब अमीरात और सउदी अरब जैसे इस्लामिक देशों ने भी पाकिस्तान को आर्थिक मदद देने से मुंह मोड़ लिया था। लेकिन अब अमेरिका अपनी सैन्य और जियो ग्लोबल आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए पाकिस्तान को अपने पाले में रखना चाहता है। इसलिए वह जानबूझकर पाकिस्तान को आर्थिक मदद पहुंचाकर उस पर पकड़ बनाए रखना चाहता है।
आर्थिक मामलों के जानकार डॉ. नागेंद्र कुमार शर्मा ने अमर उजाला से कहा कि आईएमएफ ने पाकिस्तान को यह मदद आपातकालीन समय में सेवा उपलब्ध कराने और जल संसाधन उपलब्ध कराने के लिए दिया है। आईएमएफ अपने द्वारा दिए गए फंड की मॉनीटरिंग भी करता है। लेकिन पाकिस्तान का इतिहास रहा है कि वह अपने यहां आतंकवादियों को आर्थिक और सैन्य संसाधन उपलब्ध कराता रहा है।
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की इसी हरकत का परिणाम रहा है कि संयुक्त अरब अमीरात और सउदी अरब जैसे इस्लामिक देशों ने भी पाकिस्तान को आर्थिक मदद देने से मुंह मोड़ लिया था। लेकिन अब अमेरिका अपनी सैन्य और जियो ग्लोबल आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए पाकिस्तान को अपने पाले में रखना चाहता है। इसलिए वह जानबूझकर पाकिस्तान को आर्थिक मदद पहुंचाकर उस पर पकड़ बनाए रखना चाहता है।
भारतीय सैन्य बलों ने इशारा किया है कि ऑपरेशन सिंदूर होने के बाद भी पाकिस्तान के बॉर्डर से सटे इलाकों में आतंकी कैंप एक बार फिर बढ़ने लगे हैं। पाकिस्तान इनका उपयोग भारत के विरुद्ध करता रहा है। नई आर्थिक सहायता मिलने से पाकिस्तान आतंकियों को आर्थिक सहायता पहुंचाने का सिलसिला फिर शुरू कर सकता है।