Pakistan: ईरान में जारी जंग से घबराया पाकिस्तान, शहबाज सरकार ने बचने के लिए क्यों उतारी नौसेना? जानें मामला
ईरान में जारी संघर्ष और समुद्री सुरक्षा खतरे के बीच पाकिस्तान ने अपनी ऊर्जा आपूर्ति और व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा के लिए ऑपरेशन मुहाफिज-उल-बहर शुरू किया है। इसके तहत पाकिस्तान नौसेना व्यापारी जहाजों को युद्धपोतों की सुरक्षा में ले जा रही है। आइए विस्तार से जानते हैं।
विस्तार
ईरान में जारी संघर्ष और समुद्री मार्गों पर बढ़ते सुरक्षा जोखिम के बीच पाकिस्तान ने अपने व्यापारिक जहाजों और ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा के लिए बड़ा कदम उठाया है। पाकिस्तान नौसेना ने ऑपरेशन मुहाफिज-उल-बहर शुरू किया है, जिसके तहत देश के व्यापारी जहाजों को नौसेना के युद्धपोतों की सुरक्षा में ले जाया जा रहा है।
क्या है यह ऑपरेशन?
पाकिस्तान नौसेना के अनुसार, क्षेत्र में बदलते समुद्री सुरक्षा हालात और अहम समुद्री मार्गों पर संभावित खतरे को देखते हुए यह अभियान शुरू किया गया है। इसका उद्देश्य पाकिस्तान की ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार को निर्बाध बनाए रखना है।
नौसेना के अनुसार यह एस्कॉर्ट ऑपरेशन पाकिस्तान नेशनल शिपिंग कॉरपोरेशन (PNSC) के साथ मिलकर चलाया जा रहा है। फिलहाल पाकिस्तान नौसेना के जहाज दो व्यापारी पोतों को सुरक्षा दे रहे हैं, जिनमें से एक जहाज आज कराची पहुंचने वाला है।
पाकिस्तान को यह कदम क्यों उठाना पड़ा?
दरअसल पाकिस्तान अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए काफी हद तक खाड़ी देशों पर निर्भर है और उसका करीब 90 प्रतिशत व्यापार समुद्री मार्गों से होता है। ऐसे में क्षेत्रीय युद्ध के कारण तेल टैंकरों की आवाजाही प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया है। इसी वजह से पाकिस्तान सरकार ने ईंधन बचत के कई कदम भी उठाए हैं।
पाकिस्तान नौसेना ने कहा है कि वह समुद्री स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और राष्ट्रीय शिपिंग, ऊर्जा आपूर्ति तथा क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
पाकिस्तान के तेल भंडार पर बड़े-बड़े दावों की खुली पोल
इस बीच पिछले दिनों खबर आई थी कि पाकिस्तान में पेट्रोलियम उत्पादों के भंडार को लेकर नया विवाद हो रहा है। पाकिस्तान पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन (PPDA) ने ऑयल एंड गैस रेगुलेटरी अथॉरिटी (OGRA) के आंकड़ों पर सवाल उठाते हुए कहा कि देश में पेट्रोलियम भंडार को लेकर जनता को गुमराह किया जा रहा है। पीपीडीए के चेयरमैन अब्दुल सामी खान ने कहा कि देश में पेट्रोलियम उत्पादों का स्टॉक केवल 14 दिनों के लिए ही पर्याप्त है, जो ओजीआरए के दावों से बिल्कुल अलग है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर आपूर्ति में बाधा जारी रही तो देशभर के पेट्रोल पंपों पर स्थिति और गंभीर हो सकती है।
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