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भारत-इस्राइल की दोस्ती से सहमा पाकिस्तान: हेक्सागन अलायंस से घबराया पड़ोसी, नेतन्याहू के खिलाफ लाया प्रस्ताव
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
Published by: Rahul Kumar
Updated Thu, 26 Feb 2026 05:51 PM IST
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भारत-इस्राइल के बीच मुक्त व्यापार समझौते पर वार्ता शुरू
- फोटो : ANI
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भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिवसीय दौरे पर इस्राइलमें हैं। पीएम मोदी को इस दौरे पर इस्राइल का सर्वोच्च सम्मान दिया गया है। पीएम मोदी की यात्रा के दौरान भारत और इस्राइल के बीच संबंध और मजबूत हुआ है। वहीं भारत इस्राइल के बीच इस दोस्ती को देखकर पाकिस्तान को झटका लगा है। पाकिस्तान की घबराहट उसके हालिया प्रस्ताव में साफ दिखाई दे रही है।
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दरअसल, इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने पीएम मोदी के इस दौरे पर भारत और दूसरे देशों के साथ क्षेत्रीय गठबंधन बनाने के बारे में बताया, जिसका नाम हेक्सागन अलायंस होगा। पाकिस्तान को पीएम नेतन्याहू की ये बात चुभ रही है। तभी तो पाकिस्तान ने इस्राइली प्रधानमंत्री के खिलाफ प्रस्ताव पास कर दिया है।
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भारत और इस्राइल रक्षा, व्यापार और सुरक्षा क्षेत्रों में संबंध मजबूत करने पर फोकस कर रहे हैं। भारत और इस्राइलने एक सुरक्षा एमओयू पर भी हस्ताक्षर किया है जो भारत में हथियार की व्यवस्था को एक साथ विकसित करने पर फोकस है। यह समझौता आयरन डोम को भारत में इस्राइलके सहयोग से विकसित करने पर हुआ है।
जुलाई 2017 में पीएम मोदी के इस्राइलके पहले दौरे के दौरान भारत के इस्राइलके साथ संबंध रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक बढ़ गए थे। हाल के दौरे से दोनों देशों के बीच संबंध और मजबूत हुए हैं। पीएम मोदी और प्रधानमंत्री नेतन्याहू के बीच भरोसे ने दोनों देशों के बीच मजबूत संबंधों में और योगदान दिया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत और इस्राइलके बीच संबंध में मजबूती पाकिस्तान के परेशान और डरे होने की वजह है। 17 जून, 1999 को कारगिल युद्ध के दौरान, भारतीय एयर फोर्स के मिराज-2000 ने द्रास और बटालिक सेक्टर में पाकिस्तान के घुसपैठियों को टारगेट किया था।
इस दौरान लेजर गाइडेड बमों का इस्तेमाल करके टारगेट पर निशाना लगाया गया था। इसके लिए भारतीय मिराज पर इस्राइली लाइटनिंग पॉड्स का इस्तेमाल किया गया था। इसके अलावा, बालाकोट में ऑपरेशन बंदर और ऑपरेशन सिंदूर दोनों के दौरान भी दोनों देशों के बीच रक्षा संबंधों की मजबूती देखी गई।
भारत ने पाकिस्तान के अंदर आतंकी कैंपों को उड़ाने के लिए इस्राइली लोइटरिंग एम्युनिशन, लेजर गाइडेड बम और गाइडेड मिसाइलों का इस्तेमाल किया था। कारगिल युद्ध के दिनों से, भारत हेरॉन-टीओ और सर्चर मार्क 11 जैसे इजरायली ड्रोन का इस्तेमाल कर रहा है।
भारत में हथियार सिस्टम को मिलकर विकसित करने के लिए दोनों देशों द्वारा हस्ताक्षर किए गए नए एमओयू ने पाकिस्तान को परेशान कर दिया है। पाकिस्तान पर नजर रखने वालों का कहना है कि इसी वजह से नेतन्याहू के खिलाफ प्रस्ताव पास हुआ।
प्रस्ताव में भारत इस्राइल और दूसरे देशों के बीच तालमेल को इलाके की शांति और दुनिया भर में स्थिरता के लिए खतरा बताया गया। इस्राइलपर मुस्लिम-बहुल देशों को अलग-थलग करने के मकसद से गुट बनाने का आरोप है। भारत और इस्राइल के बीच नजदीकी ना केवल पाकिस्तानी संसद, बल्कि वहां की मीडिया के प्राइम टाइम में भी चर्चा का विषय था। प्राइम टाइम की बहस भारतइस्राइल साझेदारी पर केंद्रित थी।
शो में आए मेहमान पाक-चीन इंस्टीट्यूट के चेयरमैन मुशाहिद हुसैन सैयद और पूर्व डिप्लोमैट मलीहा लोधी ने दोनों देशों के बीच इस साझेदारी की आलोचना की। उनका कहना है कि इस गठबंधन का मकसद चीन और पाकिस्तान को तोड़ना है। इसके अलावा यह भी कहा गया कि भारतइस्राइल साझेदारी मुस्लिम विरोधी और पाकिस्तान विरोधी है।
पाकिस्तान में भारतइस्राइल की साझेदारी को लेकर हुए इस हलचल पर एक अधिकारी ने कहा कि यह पाकिस्तान के दोगलेपन को साफ तौर पर दिखाता है। एक तरफ तो यह भारतइस्राइल रणनीतिक साझेदारी की आलोचना करता है, वहीं दूसरी तरफ हमास जैसे आतंकवादी संगठन का समर्थन करता है।
एक और अधिकारी ने कहा कि इससे पाकिस्तान का दोगलापन सामने आता है। हालांकि भारत की इस्राइल और रूस जैसे दूसरे देशों के साथ डिफेंस पार्टनरशिप है, लेकिन उसने कभी भी हथियारों या टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल हमलावर की तरह नहीं किया है।
अधिकारी ने कहा कि रणनीतिक रक्षा साझेदारी का मकसद पाकिस्तान वाले अस्थिर इलाके में भारत की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। दूसरी तरफ, पाकिस्तान ने दूसरे देशों के साथ अपनी रक्षा साझेदारी का इस्तेमाल हमलावर की भूमिका निभाने के लिए किया है।
एक और अधिकारी ने कहा कि इस्राइल में पीएम मोदी का जैसा स्वागत हुआ और दोनों देशों ने जो समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, उससे पाकिस्तान चिंतित है क्योंकि वह पश्चिम एशिया में बड़े वैश्विक राजनीतिक बदलावों को लेकर आशंकित है।
विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान रणनीतिक भारत-इस्राइल साझेदारी से नाखुश है। हालांकि, उसकी सबसे बड़ी चिंता यह है कि इस्राइल भारत का मुख्य डिफेंस सप्लायर बनकर उभर रहा है। भारत ने हमेशा कहा है कि इस्राइल के साथ उसका संबंध राष्ट्रीय सुरक्षा और आपसी फायदे पर आधारित है। नई दिल्ली ने कहा है कि यह संबंध किसी देश के खिलाफ नहीं है।
(इनपुट: आईएएनएस)