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भारत 'टू-स्टेट फॉर्मूले' का समर्थक: फलस्तीनी मंत्री से मिलीं सचिव प्रिया रंगनाथन, कहा- गाजा की स्थिति चिंताजनक
Wed, 19 Aug 2026 05:22 AM IST
ज्योति भास्कर
पीटीआई, नई दिल्ली।
पीटीआई, नई दिल्ली।
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Wed, 19 Aug 2026 05:22 AM IST
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फलस्तीन की विदेश मंत्री शाहिन और विदेश सचिव श्रीप्रिया रंगनाथन
- फोटो : एएनआई
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भारत ने फलस्तीन में 'बातचीत से दो-राज्य समाधान' के लिए अपने लंबे समय से चले आ रहे समर्थन को दोहराया है। विदेश मंत्रालय की सचिव प्रिया रंगनाथन ने फलस्तीन लोगों के लिए देश के निरंतर समर्थन की पुष्टि की। रंगनाथन 16 से 21 अगस्त तक मिस्र, फलस्तीन और लेबनान की आधिकारिक यात्रा पर हैं।
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'टू-स्टेट फॉर्मूले' पर बातचीत की वकालत
मंगलवार को रंगनाथन ने फलस्तीन की विदेश मामलों और प्रवासी मंत्री वर्सेन अघाबेकियन शाहिन से मुलाकात की। उन्होंने गाजा में गंभीर मानवीय स्थिति पर भारत की चिंता व्यक्त की। भारत के प्रतिनिधि कार्यालय ने एक्स पर बताया कि दोनों पक्षों ने भारत-फलस्तीन द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा की। इसमें उनके व्यापक विकास सहयोग पहल भी शामिल थे। भारत ने बातचीत से 'दो-राज्य समाधान' के लिए अपने समर्थन पर जोर दिया।
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फलस्तीन की वर्तमान स्थिति और गाजा के घटनाक्रम
गाजा में मानवीय स्थिति को निरंतर सहायता और कूटनीति से सुलझाने का महत्व बताया। भारत इस्राइल और फलस्तीन के लिए मान्यता प्राप्त सीमाओं के भीतर शांति से रहने वाले 'दो-राज्य समाधान' का समर्थन करता है। यह अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप है। दोनों नेताओं ने फलस्तीन की वर्तमान स्थिति और गाजा के घटनाक्रम पर विशेष ध्यान दिया। मानवीय जरूरतों और भारत की विकास साझेदारी पर भी चर्चा हुई।
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क्या भारत 'टू-स्टेट फॉर्मूले' के समर्थन में?
रंगनाथन ने फलस्तीन लोगों और बातचीत से 'दो-राज्य समाधान' के लिए भारत के निरंतर समर्थन की पुष्टि की। उन्होंने शांति और स्थिरता के प्रयासों के लिए भारत के समर्थन को दोहराया। संवाद और कूटनीति के माध्यम से संघर्ष के स्थायी राजनीतिक समाधान पर जोर दिया। बैठक के दौरान स्वास्थ्य, शिक्षा और क्षमता-निर्माण से संबंधित चल रही पहलों की भी समीक्षा की गई।
भारत यात्रा को याद कर क्या बोले फलस्तीनी मंत्री?
फलस्तीनी विदेश मंत्री ने जनवरी 2026 में भारत की अपनी सफल यात्रा को याद किया। उन्होंने भारत के निरंतर समर्थन के लिए सराहना व्यक्त की। यह समर्थन विकास परियोजनाओं, क्षमता-निर्माण कार्यक्रमों और छात्रवृत्तियों के माध्यम से दिया जाता है। मानवीय सहायता और फलस्तीनी संस्थानों तथा संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों में योगदान भी शामिल है।