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Explainer: अमेरिका से लड़ाई के बीच ईरान ने ओमान से क्या बात की? ट्रंप ने दी बमबारी की धमकी; US क्यों परेशान?

Wed, 19 Aug 2026 04:30 AM IST
हिमांशु सिंह चंदेल वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Wed, 19 Aug 2026 04:30 AM IST
सार

Why Trump Threat Oman?: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के बीच ईरान और ओमान होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही को लेकर समझौते के करीब हैं। प्रस्तावित व्यवस्था में दोनों देश अपने-अपने नियंत्रण वाले समुद्री रास्तों से जहाजों की आवाजाही संभाल सकते हैं। ईरान इस रास्ते पर अपनी सुरक्षा और अधिकार बनाए रखना चाहता है, जबकि अमेरिका इसे पूरी तरह खोलने की मांग कर रहा है। इसी मतभेद के बीच ट्रंप ने ओमान को बमबारी की धमकी दी है। आखिर इस समझौते में ऐसा क्या है, जिससे अमेरिका परेशान है? आइए, सबकुछ विस्तार से और आसान भाषा में समझते हैं...

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What Deal Did Iran Strike with Oman Amid Conflict with America Trump Threatens Bombing Why US Worried
किस समझौते से परेशान हुआ अमेरिका? - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ होर्मुज जलडमरूमध्य के संचालन को लेकर बातचीत कर रहे ओमान को बमबारी की धमकी दी है। ओमान ईरान के साथ जहाजों की सुरक्षित आवाजाही का रास्ता निकालने में जुटा है, जबकि अमेरिका इस व्यवस्था के कुछ हिस्सों से नाराज है। ईरान भी अपनी शर्तें पूरी होने तक जलडमरूमध्य खोलने से इनकार कर रहा है। आखिर ओमान इस टकराव के बीच क्यों फंस गया?

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ट्रंप ओमान से आखिर क्यों नाराज हैं?

  • अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नाराजगी की मुख्य वजह ओमान और ईरान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर चल रही बातचीत है।
  • दो क्षेत्रीय अधिकारियों के अनुसार, ओमान ईरान के साथ जहाजों की आवाजाही को लेकर एक समझौते के करीब है।
  • अमेरिका को इस समझौते के कुछ हिस्सों पर आपत्ति है।
  • ट्रंप ने इसी नाराजगी के बीच ओमान को धमकी दी है।
  • कहा है कि वह रास्ते में आया तो अमेरिका उस पर बमबारी कर सकता है।
  • हालांकि, ओमान की ओर से इस धमकी पर कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

होर्मुज इतना महत्वपूर्ण क्यों है?

होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी और अरब सागर के बीच समुद्री रास्ता है। दुनिया के लिए यह रास्ता इसलिए बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां से तेल, प्राकृतिक गैस और दूसरी जरूरी वस्तुओं की बड़ी मात्रा जहाजों के जरिए गुजरती है। अभी इस रास्ते से जहाजों की आवाजाही पहले की तुलना में काफी कम है और जहाजों पर हमले का खतरा बना हुआ है। इसलिए यहां पैदा होने वाला कोई भी बड़ा संकट दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति और अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है।

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ईरान ने होर्मुज को बातचीत का हथियार कैसे बनाया?

  • ईरान ने युद्ध के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही पर अपना नियंत्रण मजबूत किया है।
  • अमेरिका के साथ बातचीत रुकने के बाद यह रास्ता दोनों देशों के बीच दबाव का एक बड़ा मुद्दा बन गया है।
  • ईरान का कहना है कि जब तक अमेरिका उसकी शर्तें पूरी नहीं करता, तब तक जलडमरूमध्य दोबारा पूरी तरह नहीं खुलेगा।
  • इनमें अमेरिकी नाकाबंदी हटाना, जमी हुई संपत्तियां जारी करना, तेल प्रतिबंध हटाना और सैन्य कार्रवाई तथा धमकियां रोकना शामिल है।

ओमान इस विवाद के बीच में कैसे आया?

ओमान खाड़ी क्षेत्र का अपेक्षाकृत शांत देश माना जाता है और लंबे समय से ईरान के साथ बातचीत तथा मध्यस्थता की नीति अपनाता रहा है। अमेरिका के साथ भी उसके रक्षा संबंध हैं और अमेरिकी सेना को ओमान में कुछ सुविधाओं के इस्तेमाल की अनुमति है। यही कारण है कि ओमान दोनों पक्षों के बीच एक ऐसे देश की भूमिका में आ गया है, जो ईरान से बात भी कर सकता है और अमेरिका से भी संबंध बनाए रख सकता है।

ओमान और ईरान के बीच किस बात पर बातचीत चल रही?

  • ईरान और ओमान कई सप्ताह से होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही को लेकर बातचीत कर रहे हैं।
  • ईरान के अनुसार, दोनों देश ऐसा तंत्र बनाने पर काम कर रहे हैं जिससे जहाजों की सुरक्षित आवाजाही हो सके और दोनों तटीय देशों की संप्रभुता तथा सुरक्षा का सम्मान भी बना रहे।
  • क्षेत्रीय अधिकारियों के मुताबिक, प्रस्तावित व्यवस्था में जहाज ईरान के नियंत्रण वाले रास्ते से फारस की खाड़ी में प्रवेश कर सकते हैं और ओमान के नियंत्रण वाले रास्ते से बाहर निकल सकते हैं।

क्या इस समझौते में शुल्क वसूली की बात भी है?

क्षेत्रीय अधिकारियों के मुताबिक, प्रस्तावित व्यवस्था में जहाजों से स्वैच्छिक शुल्क लेने की बात भी सामने आई है। बताया गया है कि ये शुल्क सुरक्षा और समुद्री पर्यावरण की सुरक्षा जैसी जरूरतों से जुड़े हो सकते हैं। अमेरिका इसी तरह की व्यवस्था से नाराज बताया जा रहा है। अमेरिकी प्रशासन का मानना है कि ओमान को ईरान के साथ बातचीत में ज्यादा सख्त रुख अपनाना चाहिए था।

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अमेरिका को ओमान के समझौते से क्या आपत्ति?

  • दो क्षेत्रीय अधिकारियों के मुताबिक, अमेरिका को प्रस्तावित समझौते में ईरान और ओमान की संयुक्त भूमिका पर आपत्ति है।
  • खास तौर पर जलडमरूमध्य से बाहर निकलने वाले रास्ते के प्रबंधन को लेकर अमेरिका असहमत है।
  • अमेरिकी पक्ष का मानना है कि ओमान ईरान के साथ बातचीत में पर्याप्त सख्ती नहीं दिखा रहा है। इसी नाराजगी के बीच ट्रंप की धमकी सामने आई है।

क्या ट्रंप पहले भी ओमान को धमकी दे चुके हैं?

हां। ट्रंप की यह पहली ऐसी धमकी नहीं बताई गई है। मई में कैबिनेट बैठक के दौरान भी उन्होंने कहा था कि ओमान को दूसरे देशों की तरह व्यवहार करना होगा, वरना अमेरिका को उसके खिलाफ कड़ा कदम उठाना पड़ेगा। अब होर्मुज को लेकर ईरान और ओमान के बीच बातचीत आगे बढ़ने के बाद ट्रंप ने फिर ओमान को निशाना बनाया है। इससे साफ है कि अमेरिका इस मुद्दे पर बेहद सख्त रुख अपना रहा है।

ट्रंप ने होर्मुज को लेकर और क्या किया?

ट्रंप ने मंगलवार को सोशल मीडिया पर एक नक्शा साझा किया, जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य को अमेरिकी क्षेत्र के तौर पर दिखाया गया। इससे पहले भी उन्होंने इस विचार का संकेत दिया था। सोमवार को ओवल ऑफिस में उन्होंने कहा था कि उन्हें जलडमरूमध्य को अमेरिकी क्षेत्र घोषित करने का विचार पसंद है। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि ऐसा कैसे किया जाएगा या इसके लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।

ईरान ने ट्रंप की बात पर क्या प्रतिक्रिया दी?

ईरान ने ट्रंप की टिप्पणी को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी। ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने ट्रंप की ओर से होर्मुज को अमेरिकी क्षेत्र के रूप में दिखाने पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि ट्रंप का जलडमरूमध्य को लेकर भ्रम जल्द दूर होगा या ईरान खुद उसे दूर करेगा। ईरान का रुख साफ है कि वह होर्मुज पर अपनी पकड़ तब तक बनाए रखेगा, जब तक अमेरिका उसकी शर्तें पूरी नहीं करता।

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क्या अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत पूरी तरह रुक गई है?

इनपुट के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत फिलहाल आगे नहीं बढ़ रही है। दोनों देशों के बीच एक अंतरिम समझौते के बाद विस्तृत बातचीत का रास्ता खोलने के लिए 60 दिन की अवधि तय हुई थी। यह अवधि अब समाप्त हो चुकी है। ट्रंप ने भी कहा है कि ईरान के साथ फिलहाल कोई बातचीत तय नहीं है। ऐसे में ओमान और ईरान के बीच चल रही बातचीत का महत्व और बढ़ गया है।

ओमान की स्थिति इतनी मुश्किल क्यों है?

ओमान एक तरफ ईरान के साथ समझौते की कोशिश कर रहा है और दूसरी तरफ अमेरिका से उसके संबंध भी हैं। वह न तो ईरान से खुला टकराव चाहता है और न ही अमेरिका से संबंध खराब करना। इसी वजह से वह दो शक्तिशाली और हथियारों से लैस देशों के बीच दबाव में आ गया है। दूसरी ओर, होर्मुज से तेल और गैस की आपूर्ति कम होने से पूरी दुनिया की नजर इस बातचीत पर लगी है।

क्या ओमान ने अमेरिका की धमकी पर कोई जवाब दिया?

  • ओमान की ओर से ट्रंप की ताजा धमकी पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
  • इसके बजाय ओमान की सरकारी समाचार एजेंसी ने अपने नियमित विषयों से जुड़े समाचार जारी किए।
  • इनमें मस्कट स्टॉक एक्सचेंज, खेल और कॉफी-चाय के आयात जैसी खबरें शामिल थीं।
  • ओमान के विदेश मंत्रालय की ओर से भी राजनयिक बैठकों और दूसरे नियमित मामलों से जुड़े बयान जारी किए गए।

क्या इस धमकी से ईरान-ओमान समझौते पर असर पड़ेगा?

अभी यह साफ नहीं है कि ट्रंप की धमकी से ईरान और ओमान के बीच चल रही बातचीत तेज होगी या धीमी। एक संभावना यह है कि दबाव बढ़ने से दोनों देश जल्दी समझौते की घोषणा करें। दूसरी ओर, अमेरिकी दबाव ओमान के लिए बातचीत को और कठिन बना सकता है। फिलहाल दोनों देशों की बातचीत जारी है और समझौते की अंतिम शर्तें सार्वजनिक नहीं हुई हैं।

क्या इस समझौते से अमेरिका और ईरान फिर बातचीत शुरू कर सकते हैं?

मिस्र के विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को कहा कि ईरान और ओमान के बीच समझौता अमेरिका और ईरान को फिर बातचीत की मेज पर ला सकता है। मिस्र के अनुसार, इससे ऐसा व्यापक और स्थायी समझौता करने का रास्ता खुल सकता है, जिसमें सभी चिंताओं और क्षेत्रीय सुरक्षा को शामिल किया जाए। यह बयान ओमान और ईरान के विदेश मंत्रियों की बातचीत के बाद आया। हालांकि, इसमें ट्रंप की ताजा धमकी पर कोई टिप्पणी नहीं की गई।

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होर्मुज में जहाजों पर हमले की स्थिति क्या है?

  • होर्मुज को लेकर तनाव केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं है।
  • ब्रिटेन की समुद्री निगरानी एजेंसी के अनुसार, मंगलवार को ओमान के तट के पास जलडमरूमध्य से निकल रहे एक जहाज को एक अज्ञात प्रक्षेप्य ने निशाना बनाया।
  • इससे जहाज के इंजन कक्ष को नुकसान पहुंचा और एक व्यक्ति के हताहत होने की जानकारी सामने आई।
  • ओमानी तटरक्षक बल ने चालक दल के अन्य सदस्यों की मदद की। घटना की जांच की जा रही है।

क्या खाड़ी के दूसरे देशों पर भी खतरा बढ़ा है?

होर्मुज के आसपास तनाव का असर दूसरे खाड़ी देशों पर भी दिखाई दे रहा है। संयुक्त अरब अमीरात के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, ईरान की ओर से यूएई की दिशा में दो बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गईं। इनमें से एक यूएई के जलक्षेत्र के बाहर और दूसरी उसके जलक्षेत्र में गिरी। किसी नुकसान या किसी के घायल होने की तत्काल जानकारी नहीं दी गई। इसके अलावा, ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब में सऊदी अरामको की एक तेल रिफाइनरी पर ड्रोन हमले का दावा किया है।

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