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PoJK में पाकिस्तान के खिलाफ बगावत तेज: भारत से लगाई मदद की गुहार; लंदन की सड़कों पर क्यों उतरे हजारों लोग?
Mon, 06 Jul 2026 12:28 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन
Published by: हिमांशु सिंह चंदेल
Updated Mon, 06 Jul 2026 12:28 PM IST
सार
PoJK Unrest: पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान विरोधी आंदोलन अब स्थानीय सीमाओं से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचता दिख रहा है। लंदन में हजारों कश्मीरियों ने पाकिस्तान हाई कमीशन तक मार्च निकाला, जबकि पीओजेके में भारत से मदद और एलओसी खोलने की मांग उठी। आइए, विस्तार से जानते हैं कि आखिर पीओजेके में हालात इतने खराब क्यों हो गए? लोग पाकिस्तान के खिलाफ खुलकर क्यों बोल रहे हैं और इस पूरे घटनाक्रम का क्या मतलब है?
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पीओजेके में क्यों बिगड़ रहें हालात?
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच भारत का नाम खुलकर सामने आने लगा है। संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) के नेता सरदार अमन खान ने भारत से मानवीय सहायता भेजने और नियंत्रण रेखा (एलओसी) खोलने की अपील की है। उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान की कार्रवाई के बाद इलाके में राशन और दवाइयों की कमी हो गई है। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब पीओजेके में पाकिस्तान प्रशासन के खिलाफ लगातार प्रदर्शन हो रहे हैं और हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं।
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पीओजेके के नेता ने भारत से क्या अपील की?
सरदार अमन खान ने एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि पीओजेके के लोगों को भारत की मदद की जरूरत है। उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तान प्रशासन ने आंदोलन को दबाने के लिए आर्थिक नाकेबंदी जैसी स्थिति पैदा कर दी है, जिससे आम लोगों को खाने-पीने का सामान और दवाइयां नहीं मिल पा रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अगर हालात और बिगड़ते हैं तो लोगों को भारत आने का विकल्प मिलना चाहिए। उन्होंने नियंत्रण रेखा के पूंछ और डोडा सेक्टर की ओर रास्ता खोलने की भी मांग की। हालांकि, उनके इस कथित वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
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पीओजेके में विरोध प्रदर्शन क्यों तेज हुए हैं?
पिछले महीने से पीओजेके में पाकिस्तान प्रशासन के खिलाफ बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हो रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि इस्लामाबाद स्थानीय लोगों की समस्याओं को नजरअंदाज कर रहा है और विरोध की आवाज उठाने वालों पर सख्ती की जा रही है। ईदगाह मैदान में हुई एक बड़ी रैली में प्रदर्शनकारियों ने 'पीओजेके पाकिस्तान का हिस्सा नहीं है' और 'हमें आजादी चाहिए' जैसे नारे लगाए। इससे साफ संकेत मिला कि आंदोलन अब केवल स्थानीय मांगों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पाकिस्तान के राजनीतिक नियंत्रण के खिलाफ भी आवाज उठाई जा रही है।
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जेएएसी पर कार्रवाई को लेकर क्या दावा?
रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान प्रशासन ने पांच जून को संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी को प्रतिबंधित संगठन घोषित कर दिया था। इसके बाद आंदोलन से जुड़े लोगों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी गई। कई विश्लेषकों का मानना है कि इस कदम से पीओजेके में असंतोष और बढ़ गया। विश्लेषकों का कहना है कि पाकिस्तान के मुख्यधारा के राजनीतिक दलों का लंबे समय से इस क्षेत्र की राजनीति पर प्रभाव रहा है, जबकि स्थानीय संगठनों की भूमिका लगातार सीमित होती गई है।पाकिस्तान प्रशासन पर क्या आरोप लगाए जा रहे हैं?
- प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि आंदोलन को दबाने के लिए सुरक्षा बलों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
- प्रदर्शनकारियों का दावा है कि कार्रवाई में कई लोगों की जान जा चुकी है।
- जेएएसी का आरोप है कि शांतिपूर्ण आंदोलन पर सख्ती की जा रही है।
- संगठन ने कहा कि यदि मांगों का जवाब गोलियों से दिया गया, तो आंदोलन और तेज होगा।
- कई इलाकों में सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है।
- क्षेत्र में तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है।
- पाकिस्तान प्रशासन की ओर से इन आरोपों पर विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है।