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Pakistan: पाकिस्तानी पीएम शरीफ और सेना प्रमुख को नोबेल पुरस्कार देने की मांग, पंजाब विधानसभा में प्रस्ताव पेश
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
Published by: Nitin Gautam
Updated Fri, 10 Apr 2026 01:42 AM IST
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सार
आतंक को पालने-पोसने वाला देश आज शांति का दूत बनने का दिखावा कर रहा है। दरअसल पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की विधानसभा में एक प्रस्ताव पेश किया गया है, जिसमें ईरान-अमेरिका के बीच कथित मध्यस्थता कराने के लिए पीएम शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर को नोबेल शांति पुरस्कार देने की मांग की गई है।
आसिम मुनीर और शहबाज शरीफ
- फोटो : ANI
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विस्तार
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, सेना प्रमुख आसिम मुनीर और विदेश मंत्री इशाक डार को नोबेल शांति पुरस्कार देने की मांग की गई है। दरअसल पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की विधानसभा में गुरुवार को एक प्रस्ताव पेश किया गया, जिसमें सेना प्रमुख फील्ड मार्शल जनरल आसिम मुनीर, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और विदेश मंत्री इशाक डार को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित करने की मांग की गई। इसे पाकिस्तान की अपने मुंह मियां मिट्ठू बनने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है, जहां उसके नेता खुद ही अपनी पीठ थपथपा रहे हैं।
क्या है प्रस्ताव में?
यह प्रस्ताव पाकिस्तान की सत्तारूढ़ पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) के नेता राणा अरशद द्वारा पेश किया गया। प्रस्ताव में कहा गया कि ईरान, इस्राइल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के दौरान पाकिस्तान के नेतृत्व ने प्रभावी कूटनीति का परिचय दिया। प्रस्ताव में कहा गया है कि यह बढ़ता तनाव वैश्विक शांति के लिए खतरा बन रहा था। प्रस्ताव के अनुसार, सदन प्रधानमंत्री शरीफ, फील्ड मार्शल मुनीर और विदेश मंत्री इशाक डार की प्रभावी कूटनीति की सराहना करता है, जिसने क्षेत्र में शांति और स्थिरता को बढ़ावा देने का मार्ग प्रशस्त किया।
पाकिस्तान का ईरान-अमेरिका के बीच मध्यस्थता कराने का दावा
गौरतलब है कि अमेरिका और ईरान ने बुधवार को दो सप्ताह के सशर्त युद्धविराम पर सहमति जताई। जिससे ईरान और अमेरिका के बीच बीते एक महीने से ज्यादा समय से जारी युद्ध कुछ दिन के लिए टल गया है। दोनों देशों के बीच हुए इस युद्ध विराम में पाकिस्तान, तुर्किये और मिस्र ने भी भूमिका निभाई है। हालांकि पाकिस्तान का मध्यस्थता का दावा सवालों के घेरे में है और उसे महज अमेरिका का एक संदेशवाहक माना जा रहा है। खुद पाकिस्तानी अधिकारियों ने स्पष्ट किया, 'हम केवल मध्यस्थ थे, गारंटर नहीं। असली भूमिका चीन ने निभाई। चीन ने गारंटी दी कि अमेरिका समझौते पर कायम रहेगा। ट्रंप प्रशासन ने भी पुष्टि की कि चीन ने ईरान को बातचीत के लिए मनाया।'
अब शुक्रवार को अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधिमंडल की बैठक पाकिस्तान में होने जा रही है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस शुक्रवार को इस्लामाबाद में प्रस्तावित बातचीत में अमेरिका की तरफ से शामिल होंगे। 2011 के बाद वेंस पाकिस्तान का दौरा करने वाले सबसे वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी होंगे।पश्चिमी देशों की मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो अगर बातचीत की कोशिशों में चीन की एंट्री नहीं होती, तो पाकिस्तान कभी कामयाब नहीं हो पाता। पाकिस्तान की भूमिका पर इस्राइल को अब भी संदेह है।
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क्या है प्रस्ताव में?
यह प्रस्ताव पाकिस्तान की सत्तारूढ़ पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) के नेता राणा अरशद द्वारा पेश किया गया। प्रस्ताव में कहा गया कि ईरान, इस्राइल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के दौरान पाकिस्तान के नेतृत्व ने प्रभावी कूटनीति का परिचय दिया। प्रस्ताव में कहा गया है कि यह बढ़ता तनाव वैश्विक शांति के लिए खतरा बन रहा था। प्रस्ताव के अनुसार, सदन प्रधानमंत्री शरीफ, फील्ड मार्शल मुनीर और विदेश मंत्री इशाक डार की प्रभावी कूटनीति की सराहना करता है, जिसने क्षेत्र में शांति और स्थिरता को बढ़ावा देने का मार्ग प्रशस्त किया।
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पाकिस्तान का ईरान-अमेरिका के बीच मध्यस्थता कराने का दावा
गौरतलब है कि अमेरिका और ईरान ने बुधवार को दो सप्ताह के सशर्त युद्धविराम पर सहमति जताई। जिससे ईरान और अमेरिका के बीच बीते एक महीने से ज्यादा समय से जारी युद्ध कुछ दिन के लिए टल गया है। दोनों देशों के बीच हुए इस युद्ध विराम में पाकिस्तान, तुर्किये और मिस्र ने भी भूमिका निभाई है। हालांकि पाकिस्तान का मध्यस्थता का दावा सवालों के घेरे में है और उसे महज अमेरिका का एक संदेशवाहक माना जा रहा है। खुद पाकिस्तानी अधिकारियों ने स्पष्ट किया, 'हम केवल मध्यस्थ थे, गारंटर नहीं। असली भूमिका चीन ने निभाई। चीन ने गारंटी दी कि अमेरिका समझौते पर कायम रहेगा। ट्रंप प्रशासन ने भी पुष्टि की कि चीन ने ईरान को बातचीत के लिए मनाया।'
अब शुक्रवार को अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधिमंडल की बैठक पाकिस्तान में होने जा रही है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस शुक्रवार को इस्लामाबाद में प्रस्तावित बातचीत में अमेरिका की तरफ से शामिल होंगे। 2011 के बाद वेंस पाकिस्तान का दौरा करने वाले सबसे वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी होंगे।पश्चिमी देशों की मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो अगर बातचीत की कोशिशों में चीन की एंट्री नहीं होती, तो पाकिस्तान कभी कामयाब नहीं हो पाता। पाकिस्तान की भूमिका पर इस्राइल को अब भी संदेह है।