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पेट्रोल-डीजल का खर्च कम करने की तैयारी: 2027 तक देशभर में फैल जाएगा इथेनॉल नेटवर्क, जानें सरकार का प्लान
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Rahul Kumar
Updated Thu, 04 Jun 2026 07:21 PM IST
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सार
फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक ऐसे वाहनों के लिए विकसित की गई है, जो पेट्रोल और इथेनॉल के विभिन्न मिश्रणों पर आसानी से चल सकते हैं। केंद्रीय मंत्री के मुताबिक, यदि देश में बिकने वाले नए वाहनों में से 50 फीसदी भी फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक अपनाते हैं, तो करीब 400 करोड़ लीटर अतिरिक्त इथेनॉल की खपत संभव हो सकती है।
केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
भारत में ऑटोमोबाइल और ईंधन क्षेत्र तेजी से बदलाव के दौर से गुजर रहा है। इस दिशा में केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने देशभर में करीब 5,200 इथेनॉल डिस्पेंसिंग स्टेशनों का नेटवर्क तैयार करने की घोषणा की है। यह कदम पेट्रोल पर निर्भरता घटाने, स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देने और फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के इस्तेमाल को बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा है।
सरकार का मानना है कि इससे न केवल हरित परिवहन को बढ़ावा मिलेगा। बल्कि गन्ना और अन्य कृषि उत्पादों से जुड़े किसानों को भी नया बाजार मिलेगा। जिससे उनकी आय बढ़ाने में मदद मिलेगी। इस योजना के तहत पहले चरण में दिल्ली-एनसीआर, मुंबई, पुणे और नागपुर जैसे प्रमुख शहरों में इथेनॉल डिस्पेंसिंग स्टेशनों का नेटवर्क तेजी से विकसित किया जाएगा।
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मारुति सुजुकी फ्लेक्स-फ्यूल वैगन आर के लॉन्च कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा, पहले ई100 इथेनॉल स्टेशनों को बढ़ावा देने की कोशिशें इसलिए अपेक्षित सफलता नहीं हासिल कर सकीं। क्योंकि बाजार में फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों की संख्या बेहद सीमित थी। हालांकि अब स्थिति बदल रही है और कई ऑटो कंपनियां ऐसे नए मॉडल पेश कर रही हैं, जो इथेनॉल आधारित ईंधन पर चलने में सक्षम हैं। ऐसे में इथेनॉल इंफ्रास्ट्रक्चर और फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों का विस्तार एक-दूसरे को गति देगा।
केंद्रीय मंत्री के अनुसार, इसकी शुरुआत चुनिंदा शहरों से की जाएगी, लेकिन अगले चरण में इस नेटवर्क का विस्तार पूरे देश में किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य 2026 के अंत तक इथेनॉल डिस्पेंसिंग स्टेशनों की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी करना है, जबकि दिसंबर 2027 तक इसे और व्यापक स्तर पर फैलाकर देश के प्रमुख शहरों और राजमार्गों को इस नेटवर्क से जोड़ने की योजना है। इससे वैकल्पिक ईंधन के उपयोग को गति मिलेगी और ऊर्जा आयात पर भारत की निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।
दरअसल, फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक ऐसे वाहनों के लिए विकसित की गई है, जो पेट्रोल और इथेनॉल के विभिन्न मिश्रणों पर आसानी से चल सकते हैं। केंद्रीय मंत्री के मुताबिक, यदि देश में बिकने वाले नए वाहनों में से 50 फीसदी भी फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक अपनाते हैं, तो करीब 400 करोड़ लीटर अतिरिक्त इथेनॉल की खपत संभव हो सकती है। इससे पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता कम होगी, कच्चे तेल के आयात में कमी आएगी और विदेशी मुद्रा की बड़ी बचत हो सकेगी। साथ ही, इथेनॉल की बढ़ती मांग किसानों और घरेलू जैव-ईंधन उद्योग के लिए भी नए अवसर पैदा करेगी।