यूक्रेन पर रूस का ड्रोन हमला: दो की मौत, कई घायल; जेलेंस्की ने बताया ऊर्जा ढांचे को ही क्यों बनाया गया निशाना?
रूस ने यूक्रेन पर रातभर 200 से ज्यादा ड्रोन से हमला किया, जिसमें दो लोगों की मौत और दर्जनों के घायल होने की पुष्टि हुई है। हमलों से ऊर्जा ढांचा बुरी तरह प्रभावित हुआ है और कड़ाके की ठंड में बिजली संकट गहरा गया है। राष्ट्रपति जेलेंस्की ने दुनिया से एयर डिफेंस सहायता बढ़ाने की अपील की है। आइए जानते हैं, जेलेंस्की ने क्या कुछ कहा।
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रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध के बीच एक बार फिर हालात बेहद गंभीर हो गए हैं। रातभर रूस की ओर से किए गए ड्रोन हमलों में यूक्रेन में कम से कम दो लोगों की मौत हो गई, जबकि दर्जनों लोग घायल हुए हैं। इन हमलों का सबसे बड़ा असर देश की ऊर्जा व्यवस्था पर पड़ा है। भीषण ठंड के बीच कई इलाकों में बिजली गुल हो गई है, जिससे आम लोगों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने बताया कि रूस ने एक ही रात में 200 से ज्यादा ड्रोन से हमला किया। सुमी, खारकीव, द्नीप्रो, जापोरिज्जिया, ख्मेलनित्सकी और ओडेसा जैसे कई बड़े इलाकों को निशाना बनाया गया। इन हमलों में एक बच्चे समेत कई लोग घायल हुए हैं। राष्ट्रपति ने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना जताई है।
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ऊर्जा ढांचे को क्यों बनाया गया निशाना?
राष्ट्रपति जेलेंस्की के अनुसार, रूस ने जानबूझकर यूक्रेन की ऊर्जा व्यवस्था पर हमला तेज कर दिया है। बिजली संयंत्रों और ग्रिड को नुकसान पहुंचा है। सरकार का कहना है कि हालात कठिन हैं, लेकिन सेवाएं बहाल करने की हरसंभव कोशिश की जा रही है। सिर्फ इसी सप्ताह में यूक्रेन पर 1,300 से ज्यादा ड्रोन, 1,050 गाइडेड बम और 29 मिसाइलों से हमले किए गए हैं।
जेलेंस्की की दुनिया से अपील
- रूसी हमलों के बीच राष्ट्रपति जेलेंस्की ने दुनिया के नेताओं से मदद की अपील की।
- उन्होंने कहा कि यूक्रेन को एयर डिफेंस सिस्टम के लिए और ज्यादा मिसाइलों की जरूरत है।
- जेलेंस्की का कहना है कि रूस जानबूझकर कूटनीतिक प्रक्रिया को लंबा खींच रहा है।
- ऐसे में अंतरराष्ट्रीय समुदाय को निर्णायक जवाब देना चाहिए।
- उन्होंने यूक्रेन को ज्यादा सैन्य सहायता देने की मांग की।
- साथ ही रूस पर दबाव और बढ़ाने की अपील भी की।
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कड़ाके की ठंड में लोगों की परेशानी
यूक्रेन इस समय भीषण सर्दी से जूझ रहा है। कई शहरों में तापमान शून्य से नीचे चला गया है। बिजली गुल होने से घरों को गर्म रखना मुश्किल हो गया है। सरकार ने ऊर्जा आपातकाल घोषित कर दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, क्षतिग्रस्त बिजली ढांचा देश की सिर्फ 60 प्रतिशत जरूरतें ही पूरी कर पा रहा है। कीव, खारकीव और जापोरिज्जिया सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में शामिल हैं।
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