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Russia: NATO के ‘पूर्वव्यापी हमले’ वाले बयान पर भड़का रूस, पश्चिमी देशों को दी चेतावनी; तनाव बढ़ने की आशंका
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, मॉस्को
Published by: हिमांशु चंदेल
Updated Mon, 01 Dec 2025 10:26 PM IST
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सार
Russia warns on Preemptive Strike Remark: रूस ने नाटो अधिकारी एडमिरल कैवो ड्रागोने द्वारा मॉस्को पर संभावित प्रीएम्पटिव स्ट्राइक की अनुमति संबंधी बयान को बेहद गैर-जिम्मेदाराना बताया है। रूस ने चेतावनी दी कि ऐसे वक्तव्य यूरोप की सुरक्षा को सीधा खतरा पैदा करते हैं।
रूस के राष्ट्रपति पुतिन
- फोटो : ANI
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विस्तार
रूस ने नाटो के एक शीर्ष सैन्य अधिकारी द्वारा मॉस्को पर संभावित पूर्वव्यापी हमले की अनुमति संबंधी टिप्पणी पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। मास्को ने इसे बेहद गैर-जिम्मेदाराना बयान बताया है और कहा है कि ऐसे वक्तव्य सीधे तौर पर यूरोप और पश्चिमी देशों की सुरक्षा को खतरे में डालते हैं। रूस के विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि ऐसी भाषा न केवल तनाव बढ़ाती है बल्कि यूक्रेन संकट को सुलझाने की मौजूदा कोशिशों को भी कमजोर करती है।
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रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जखारोवा ने यह प्रतिक्रिया नाटो मिलिट्री कमेटी के चेयर और इटली के एडमिरल ग्यूसेप्पे कैवो ड्रागोने के उस इंटरव्यू पर दी है, जिसमें उन्होंने कहा था कि कुछ परिस्थितियों में रूस पर पूर्वव्यापी हमले को डिफेंसिव एक्शन माना जा सकता है। यह इंटरव्यू लंदन की फाइनेंशियल टाइम्स को दिया गया था। जखारोवा ने कहा कि ड्रागोने का बयान पूरी तरह उकसाने वाला है और इसे नाटो की रूस के खिलाफ आक्रामक नीति के संकेत के रूप में देखा जाना चाहिए।
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रूस ने बयान को बताया ‘खतरनाक संकेत’
जखारोवा ने आरोप लगाया कि नाटो जानबूझकर यह माहौल बना रहा है कि रूस किसी बड़े खतरे की तैयारी कर रहा है, जबकि ऐसा कोई तथ्य मौजूद नहीं है। उन्होंने कहा कि ऐसे बयान नाटो के उस पुराने दावे की पोल खोलते हैं जिसमें वह खुद को “सिर्फ रक्षात्मक संगठन” बताता है। ज़खारोवा ने कहा कि प्रीएम्पटिव स्ट्राइक की ‘स्वीकार्यता’ पर बात करना इस बात का सबूत है कि नाटो नेतृत्व खुद अपने ही बयान की सच्चाई उजागर कर रहा है। उन्होंने कहा कि इस तरह की भाषा यूरोप में संघर्ष को और गहरा कर सकती है।
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रूसी परमाणु सिद्धांत से जुड़ी चेतावनी
रूस ने यह भी संकेत दिया कि नाटो देशों को अपने बयानों के नतीजों को समझना होगा, खासकर तब जब रूस के परमाणु सिद्धांत में हाल ही में संशोधन किया गया है। नए सिद्धांत के अनुसार, यदि कोई गैर-परमाणु देश किसी ऐसे समूह का हिस्सा है जिसके पास सामूहिक विनाश के हथियार हैं और वह रूस के खिलाफ आक्रामकता का हिस्सा बनता है, तो रूस उसके खिलाफ भी परमाणु विकल्प इस्तेमाल कर सकता है।
जखारोवा ने कहा कि नाटो अधिकारियों को यह समझना चाहिए कि जोखिम सिर्फ रूस के लिए नहीं बल्कि उनके अपने सदस्य देशों के लिए भी पैदा हो सकते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि नाटो लगातार रूस पर ‘हाइब्रिड हमले’ और ‘परमाणु धमकी’ जैसे आरोप लगाता है, जबकि उसके पास कोई सबूत नहीं है।
यूक्रेन संकट समाधान की कोशिशों को नुकसान
रूस का कहना है कि इस तरह के बयान उन प्रयासों को भी नुकसान पहुंचाते हैं जिनका लक्ष्य यूक्रेन संकट का शांतिपूर्ण समाधान ढूंढना है। ज़खारोवा ने कहा कि यह वक्तव्य जानबूझकर माहौल खराब करने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि अभी कई स्तरों पर बातचीत की कोशिशें जारी हैं, ऐसे में नाटो अधिकारियों की उग्र भाषा स्थिति को और जटिल बनाती है। रूस ने यह भी कहा कि नाटो की वास्तविक मंशा यूक्रेन में युद्ध को लंबे समय तक खींचना है और रूस को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर घेरने की रणनीति इसी दिशा का हिस्सा है।
ट्रंप के विशेष दूत से बातचीत की तैयारी
इस बीच मास्को अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ की रूस यात्रा की तैयारी कर रहा है। विटकॉफ राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ यूक्रेन शांति वार्ता पर चर्चा करने मास्को पहुंचेंगे। यह बैठक ट्रंप की भारत यात्रा से पहले होने की संभावना है। रूस का कहना है कि अगर पश्चिम वास्तव में तनाव कम करना चाहता है, तो उसे सैन्य टकराव की भाषा छोड़कर बातचीत के रास्ते पर आना चाहिए। मॉस्को ने उम्मीद जताई कि उच्च स्तरीय संपर्कों से स्थिति में कुछ सकारात्मक बदलाव आ सकता है।
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