US: सोशल मीडिया की लत पर ऐतिहासिक मुकदमा, बच्चों को नुकसान के लिए मेटा-यूट्यूब को जिम्मेदार ठहराने की मांग
लॉस एंजिलिस में सोशल मीडिया की लत को लेकर ऐतिहासिक मुकदमे की सुनवाई शुरू हुई है। वादी पक्ष ने मेटा और यूट्यूब पर आरोप लगाया कि उनके प्लेटफॉर्म जानबूझकर बच्चों को लती बनाने वाले डिजाइन का इस्तेमाल करते हैं। कंपनियों के आंतरिक दस्तावेज भी पेश किए गए। आइए इस मामले को विस्तार से जानते हैं।
विस्तार
बच्चों और किशोरों में सोशल मीडिया की बढ़ती लत को लेकर अमेरिका में बड़ा कानूनी मोर्चा खुल गया है। लॉस एंजिलिस में एक ऐतिहासिक मुकदमे की शुरुआती सुनवाई हुई, जिसमें आरोप लगाया गया कि बड़े सोशल मीडिया मंच जानबूझकर बच्चों को स्क्रीन का आदी बना रहे हैं। इस मामले में इंस्टाग्राम की मालिक कंपनी मेटा और गूगल के यूट्यूब को बच्चों को हुए मानसिक और व्यवहारिक नुकसान के लिए जिम्मेदार ठहराने की मांग उठी है।
सुनवाई के दौरान वादी पक्ष के वकील मार्क लैनियर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की तुलना कैसीनो और नशे की लत से की। उन्होंने कहा कि इन प्लेटफॉर्म का डिजाइन ऐसा बनाया गया है कि बच्चे ज्यादा से ज्यादा समय तक जुड़े रहें। मुकदमे में दावा किया गया कि एल्गोरिदम, ऑटो-प्ले, अनंत स्क्रोल और रिवार्ड पैटर्न जैसे फीचर लत पैदा करने वाले तरीके से तैयार किए गए।
डिजाइन से लत लगाने का आरोप
वादी पक्ष ने अदालत में कहा कि मेटा और यूट्यूब ने ऐसे डिजाइन विकल्प अपनाए जो बच्चों को बार-बार प्लेटफॉर्म पर लौटने के लिए उकसाते हैं। आरोप है कि यह केवल तकनीकी सुविधा नहीं बल्कि सोच-समझकर बनाई गई रणनीति है। पहले इस मुकदमे में टिकटॉक और स्नैप का नाम भी शामिल था, लेकिन दोनों कंपनियों ने अज्ञात राशि पर समझौता कर लिया। अब मुख्य सुनवाई मेटा और यूट्यूब पर केंद्रित है।
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कंपनियों का जवाब और वैज्ञानिक बहस
मेटा की ओर से पेश वकील पॉल श्मिट ने अदालत में कहा कि सोशल मीडिया लत पर वैज्ञानिक समुदाय में एक राय नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि लत का दावा अभी भी बहस का विषय है। यूट्यूब की ओर से वकील ने भी अपने प्रारंभिक जवाब की तैयारी की। अदालत में दोनों पक्षों के बीच प्लेटफॉर्म के असर और जिम्मेदारी को लेकर तीखी बहस देखने को मिली।
आंतरिक दस्तावेजों का हवाला
वादी पक्ष के वकील ने गूगल और मेटा के आंतरिक दस्तावेज और ईमेल का भी जिक्र किया। अदालत में बताया गया कि कुछ आंतरिक नोट्स में उत्पादों की तुलना कैसीनो मॉडल से की गई थी। मेटा कर्मचारियों के बीच संवाद का हवाला देते हुए कहा गया कि इंस्टाग्राम को नशे जैसा बताया गया था। वकील ने सोशल मीडिया कंपनियों की तुलना तंबाकू कंपनियों से भी की।
बच्चों की मानसिक कमजोरी पर फोकस
सुनवाई में यह भी कहा गया कि कंपनियों को पता था कि तनाव और भावनात्मक दबाव झेल रहे बच्चे लत के प्रति ज्यादा संवेदनशील होते हैं। एक आंतरिक शोध का जिक्र करते हुए बताया गया कि किशोरों और उनके माता-पिता पर सर्वे में यह बात सामने आई थी। आरोप है कि कंपनियों ने इन जानकारियों के बावजूद डिजाइन नहीं बदला। मुकदमे को बच्चों की डिजिटल सुरक्षा से जुड़ा बड़ा कानूनी परीक्षण माना जा रहा है।
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