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होर्मुज संकट की चपेट में श्रीलंका: पेट्रोल की कीमतें 400 श्रीलंकाई रुपये के पार, फिर बढ़ा महंगाई का खतरा

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो Published by: Himanshu Singh Chandel Updated Sun, 22 Mar 2026 08:03 PM IST
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सार

पश्चिम एशिया युद्ध के असर से श्रीलंका में ईंधन की कीमतें करीब 25 प्रतिशत बढ़ा दी गई हैं। यह एक हफ्ते में दूसरी बढ़ोतरी है। होर्मुज जलडमरूमध्य पर असर के कारण वैश्विक तेल सप्लाई प्रभावित हुई है। इससे देश में महंगाई बढ़ने और 2022 जैसे आर्थिक संकट के हालात बनने की आशंका है।

Sri Lanka fuel price hike West Asia conflict impact global oil crisis 2026  Hormuz Strait impact economy news
पश्चिम एशिया संकट का असर - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार

पश्चिम एशिया में जारी युद्ध का सीधा असर अब श्रीलंका की अर्थव्यवस्था पर दिखने लगा है। वैश्विक तेल बाजार में उथल-पुथल के बीच श्रीलंका सरकार ने ईंधन की कीमतों में करीब 25 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी कर दी है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब होर्मुज जलडमरूमध्य पर संकट गहरा गया है और तेल सप्लाई प्रभावित हो रही है।

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सरकार ने आधी रात से नई कीमतें लागू कर दीं। यह एक हफ्ते में दूसरी और 1 मार्च के बाद तीसरी बढ़ोतरी है। इस फैसले से पेट्रोल, डीजल और केरोसीन सभी महंगे हो गए हैं। इससे आम जनता, ट्रांसपोर्ट और उद्योग पर सीधा असर पड़ने वाला है।
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कितना महंगा हुआ ईंधन?
नई कीमतों के अनुसार ऑटो डीजल 303 श्रीलंकाई रुपये से बढ़कर 382 रुपये प्रति लीटर हो गया, यानी करीब 79 श्रीलंकाई रुपये की बढ़ोतरी। सुपर डीजल 353 से बढ़कर 443 श्रीलंकाई रुपये हो गया, यानी 90 श्रीलंकाई रुपये महंगा। पेट्रोल 92 ऑक्टेन 317 से बढ़कर 398 श्रीलंकाई रुपये हुआ, यानी 81 श्रीलंकाई रुपये की वृद्धि। पेट्रोल 95 ऑक्टेन 365 से बढ़कर 455 श्रीलंकाई रुपये हो गया, यानी 90 रुपये महंगा। वहीं, केरोसीन 195 से बढ़कर 255 श्रीलंकाई रुपये पहुंच गया, यानी 60 श्रीलंकाई रुपये की बढ़ोतरी हुई।

क्यों बढ़े दाम?
इस बढ़ोतरी की बड़ी वजह पश्चिम एशिया में बढ़ता युद्ध है। अमेरिका और इस्राइल के हमलों के बाद ईरान की जवाबी कार्रवाई से खाड़ी क्षेत्र में तनाव फैल गया है। होर्मुज जलडमरूमध्य, जहां से दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल गुजरता है, प्रभावित हुआ है। इससे वैश्विक सप्लाई बाधित हुई और कीमतें तेजी से बढ़ गईं।

जनता और परिवहन पर क्या असर?
ईंधन महंगा होने से सबसे ज्यादा असर ट्रांसपोर्ट सेक्टर पर पड़ा है। निजी बस ऑपरेटरों ने चेतावनी दी है कि अगर किराया नहीं बढ़ाया गया तो 90 प्रतिशत बसें बंद हो सकती हैं। उन्होंने कम से कम 15 प्रतिशत किराया बढ़ाने की मांग की है। ऑटो और थ्री-व्हीलर चालक भी किराया बढ़ाने को मजबूर हो गए हैं, जिससे आम लोगों की परेशानी बढ़ेगी।

सरकार का कहना है कि वह अब भी ईंधन पर भारी सब्सिडी दे रही है और हर महीने बड़ा खर्च उठा रही है। अगर कीमतें नहीं बढ़ाई जातीं तो देश पर अरबों डॉलर का अतिरिक्त बोझ पड़ता। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से महंगाई 5 से 8 प्रतिशत तक बढ़ सकती है। ऐसे में श्रीलंका फिर से 2022 जैसे आर्थिक संकट की ओर बढ़ता दिख रहा है।

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