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US-Europe Tension: ट्रंप बोले- शांति मेरी जिम्मेदारी नहीं; यूरोपीय नेताओं ने कहा- हम पर दबाव नहीं डाला जा सकता
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
Published by: निर्मल कांत
Updated Tue, 20 Jan 2026 01:16 AM IST
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सार
US-Europe Tension: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड को लेकर अपने सख्त रुख को नोबेल शांति पुरस्कार न मिलने से जोड़ते हुए यूरोप की चिंता बढ़ा दी है। टैरिफ की धमकियों और सैन्य कार्रवाई के संकेतों के बीच अमेरिका और उसके सहयोगियों में तनाव गहराता जा रहा है, जबकि ग्रीनलैंड खुलकर विरोध में खड़ा है। पढ़िए रिपोर्ट-
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप
- फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड को लेकर अपने आक्रामक रुख को पिछले साल उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार न दिए जाने के फैसले जोड़ा है। उन्होंने नॉर्वे के प्रधानमंत्री से कहा कि अब उन्हें 'केवल शांति के बारे में सोचने की कोई बाध्यता महसूस नहीं होती।' यह बात उन्होंने एक लिखित (टेक्स्ट) संदेश में कही, जिसे सोमवार को सार्वजनिक किया गया।
यूरोपीय अधिकारियों के मुताबिक, ट्रंप ने यह संदेश नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गाहर स्टोरे को भेजा। ग्रीनलैंड को अपने कब्जे में लेने की धमकियों के लेकर अमेरिका और उसके करीबी सहयोगियों के बीच तनाव बढ़ा हुआ है। ग्रीनलैंड, नाटो सदस्य डेनमार्क का एक स्वशासित क्षेत्र है।
शनिवार को ट्रंप ने घोषणा की थी कि फरवरी में उन आठ देशों से आने सामान पर दस फीसदी टैरिफ लगाया जाएगा, जिन्होंने डेनमार्क और ग्रीनलैंड के समर्थन में एकजुटता दिखाई है। इन देशों में नॉर्वे भी शामिल है। इन देशों ने ट्रंप के धमकियों की कड़ी आलोचना की है।
ये भी पढ़ें: ट्रंप ने यूरोप की बढ़ाई बेचैनी: नॉर्वे PM को भी लिखा पत्र; बोले- नोबेल नहीं दिया, शांति मेरी जिम्मेदारी नहीं
अमेरिका के कई पुराने सहयोगी इस बात पर कायम रहे कि ग्रीनलैंड बिक्री के लिए नहीं है। हालांकि उन्होंने अमेरिका से बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की। सोशल मीडिया पर एक बयान में यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख काजा कल्लास ने कहा कि यूरोपीय संघ 'टकराव नहीं चाहता', लेकिन वह 'अपनी स्थिति पर डटा रहेगा।'
व्हाइट हाउस ने रणनीतिक रूप से अहम आर्कटिक द्वीप ग्रीनलैंड पर बलपूर्वक नियंत्रण की संभावना से भी इनकार नहीं किया है। जब पूछा गया कि क्या ट्रंप ग्रीनलैंड पर हमला कर सकते हैं, तो डेनमार्क के विदेश मंत्री लार्स लोके रासमुसेन ने सोमवार को कहा, जब तक राष्ट्रपति खुद किसी विकल्प को खारिज नहीं करते, तब तक किसी भी संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने भी सोमवार को तनाव कम करने की कोशिश की। उन्होंने कहा, मुझे लगता है कि इस मामले को शांत बातचीत के जरिए सुलझाया जा सकता है और सुलझाया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें सैन्य कार्रवाई की संभावना नहीं लगती।
ट्रंप की धमकियों के खिलाफ ग्रीनलैंड में विरोध
पिछले सप्ताहांत में हजारों ग्रीनलैंडवासियों ने अपने द्वीप पर कब्जे की किसी भी कोशिश के खिलाफ प्रदर्शन किया। ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेंस-फ्रेडरिक नील्सन ने सोमवार को फेसबुक पोस्ट में कहा कि टैरिफ की धमकियां उनके रुख को नहीं बदलेंगी। उन्होंने लिखा, हम पर दबाव नहीं डाला जा सकता।
ये भी पढ़ें: Earthquake Pakistan: पीओके में भूकंप से दहशत, व्यक्ति की मौत; दर्जनों घरों को नुकसान
ग्रीनलैंड की व्यापार और उर्जा मंत्री ने क्या कहा?
इस बीच, ग्रीनलैंड की व्यापार, खनिज, ऊर्जा, न्याय और समानता मंत्री नाजा नाथानिएल्सन ने एसोसिएटेड प्रेस से कहा कि उन्हें सहयोगी देशों की त्वरित प्रतिक्रिया से हौसला मिला है। उन्होंने कहा कि इससे साफ होता है कि यह मामला सिर्फ ग्रीनलैंड का नहीं है। उन्होंने कहा, मुझे लगता है कि कई देश डरते हैं कि अगर उन्होंने ग्रीनलैंड को जाने दिया, तो अगला कदम क्या होगा?
नॉर्वे के नेता को संदेश में ट्रंप ने क्या लिखा?
नॉर्वे सरकार की ओर से जारी किए गए ट्रंप के रविवार के संदेश में कहा गया, यह देखते हुए कि आपके देश ने मुझे आठ से अधिक युद्ध रोकने के बावजूद नोबेल शांति पुरस्कार नहीं दिया, अब मुझे सिर्फ शांति के बारे में सोचने की बाध्यता महसूस नहीं होती। हालांकि शांति हमेशा प्राथमिकता रहेगी, लेकिन अब मैं यह भी सोच सकता हूं कि अमेरिका के लिए क्या अच्छा और उचित है। संदेश के अंत में लिखा था, ग्रीनलैंड पर पूर्ण और संपूर्ण नियंत्रण के बिना दुनिया सुरक्षित नहीं है।
नॉर्वे के प्रधानमंत्री ने क्या कहा?
नॉर्वे के प्रधानमंत्री ने कहा कि ट्रंप का यह संदेश उनके और फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब की ओर से पहले भेजे गए संदेश के जवाब में था। उस संदेश में टैरिफ की घोषणा का विरोध किया गया था, तनाव कम करने की जरूरत पर जोर दिया गया था और तीनों नेताओं के बीच फोन पर बातचीत का प्रस्ताव रखा गया था। उन्होंने कहा, ग्रीनलैंड पर नॉर्वे का रुख बिल्कुल स्पष्ट है। ग्रीनलैंड डेनमार्क साम्राज्य का हिस्सा है और इस मुद्दे पर नॉर्वे पूरी तरह डेनमार्क का समर्थन करता है।
ये भी पढ़ें: जेल में इमरान खान पर सैकड़ों पाबंदिया?: दावा- तीन महीने से अलग जेल में रखा, वकीलों से भी मिलने की अनुमति नहीं
नोबेल शांति पुरस्कार को लेकर उन्होंने कहा कि उन्होंने ट्रंप को पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि यह पुरस्कार एक स्वतंत्र नोबेल समिति की ओर से दिया जाता है, न कि नॉर्वे सरकार द्वारा। यह समिति एक स्वतंत्र संस्था है, जिसके पांच सदस्य नॉर्वे की संसद की ओर से नियुक्त किए जाते हैं।
अमेरिकी वित्त मंत्री ने किया ट्रंप का बचाव?
इस बीच, अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने स्विट्जरलैंड के दावोस में विश्व आर्थिक मंच की बैठक के दौरान पत्रकारों से बातचीत में ग्रीनलैंड को लेकर राष्ट्रपति के रुख का बचाव किया। उन्होंने कहा, यह कहना पूरी तरह गलत है कि राष्ट्रपति यह सब नोबेल पुरस्कार के कारण कर रहे हैं। हालांकि, इसके तुरंत बाद उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें नॉर्वे को लिखे गए राष्ट्रपति के संदेश के बारे में कुछ भी जानकारी नहीं है। बेसेंट ने जोर देकर कहा कि ट्रंप ग्रीनलैंड को अमेरिका के लिए एक रणनीतिक संपत्ति के रूप में देख रहे हैं। उन्होंने कहा, हम अपनी क्षेत्रीय सुरक्षा किसी और पर नहीं छोड़ेंगे।
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यूरोपीय अधिकारियों के मुताबिक, ट्रंप ने यह संदेश नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गाहर स्टोरे को भेजा। ग्रीनलैंड को अपने कब्जे में लेने की धमकियों के लेकर अमेरिका और उसके करीबी सहयोगियों के बीच तनाव बढ़ा हुआ है। ग्रीनलैंड, नाटो सदस्य डेनमार्क का एक स्वशासित क्षेत्र है।
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शनिवार को ट्रंप ने घोषणा की थी कि फरवरी में उन आठ देशों से आने सामान पर दस फीसदी टैरिफ लगाया जाएगा, जिन्होंने डेनमार्क और ग्रीनलैंड के समर्थन में एकजुटता दिखाई है। इन देशों में नॉर्वे भी शामिल है। इन देशों ने ट्रंप के धमकियों की कड़ी आलोचना की है।
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अमेरिका के कई पुराने सहयोगी इस बात पर कायम रहे कि ग्रीनलैंड बिक्री के लिए नहीं है। हालांकि उन्होंने अमेरिका से बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की। सोशल मीडिया पर एक बयान में यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख काजा कल्लास ने कहा कि यूरोपीय संघ 'टकराव नहीं चाहता', लेकिन वह 'अपनी स्थिति पर डटा रहेगा।'
व्हाइट हाउस ने रणनीतिक रूप से अहम आर्कटिक द्वीप ग्रीनलैंड पर बलपूर्वक नियंत्रण की संभावना से भी इनकार नहीं किया है। जब पूछा गया कि क्या ट्रंप ग्रीनलैंड पर हमला कर सकते हैं, तो डेनमार्क के विदेश मंत्री लार्स लोके रासमुसेन ने सोमवार को कहा, जब तक राष्ट्रपति खुद किसी विकल्प को खारिज नहीं करते, तब तक किसी भी संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने भी सोमवार को तनाव कम करने की कोशिश की। उन्होंने कहा, मुझे लगता है कि इस मामले को शांत बातचीत के जरिए सुलझाया जा सकता है और सुलझाया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें सैन्य कार्रवाई की संभावना नहीं लगती।
ट्रंप की धमकियों के खिलाफ ग्रीनलैंड में विरोध
पिछले सप्ताहांत में हजारों ग्रीनलैंडवासियों ने अपने द्वीप पर कब्जे की किसी भी कोशिश के खिलाफ प्रदर्शन किया। ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेंस-फ्रेडरिक नील्सन ने सोमवार को फेसबुक पोस्ट में कहा कि टैरिफ की धमकियां उनके रुख को नहीं बदलेंगी। उन्होंने लिखा, हम पर दबाव नहीं डाला जा सकता।
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ग्रीनलैंड की व्यापार और उर्जा मंत्री ने क्या कहा?
इस बीच, ग्रीनलैंड की व्यापार, खनिज, ऊर्जा, न्याय और समानता मंत्री नाजा नाथानिएल्सन ने एसोसिएटेड प्रेस से कहा कि उन्हें सहयोगी देशों की त्वरित प्रतिक्रिया से हौसला मिला है। उन्होंने कहा कि इससे साफ होता है कि यह मामला सिर्फ ग्रीनलैंड का नहीं है। उन्होंने कहा, मुझे लगता है कि कई देश डरते हैं कि अगर उन्होंने ग्रीनलैंड को जाने दिया, तो अगला कदम क्या होगा?
नॉर्वे के नेता को संदेश में ट्रंप ने क्या लिखा?
नॉर्वे सरकार की ओर से जारी किए गए ट्रंप के रविवार के संदेश में कहा गया, यह देखते हुए कि आपके देश ने मुझे आठ से अधिक युद्ध रोकने के बावजूद नोबेल शांति पुरस्कार नहीं दिया, अब मुझे सिर्फ शांति के बारे में सोचने की बाध्यता महसूस नहीं होती। हालांकि शांति हमेशा प्राथमिकता रहेगी, लेकिन अब मैं यह भी सोच सकता हूं कि अमेरिका के लिए क्या अच्छा और उचित है। संदेश के अंत में लिखा था, ग्रीनलैंड पर पूर्ण और संपूर्ण नियंत्रण के बिना दुनिया सुरक्षित नहीं है।
नॉर्वे के प्रधानमंत्री ने क्या कहा?
नॉर्वे के प्रधानमंत्री ने कहा कि ट्रंप का यह संदेश उनके और फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब की ओर से पहले भेजे गए संदेश के जवाब में था। उस संदेश में टैरिफ की घोषणा का विरोध किया गया था, तनाव कम करने की जरूरत पर जोर दिया गया था और तीनों नेताओं के बीच फोन पर बातचीत का प्रस्ताव रखा गया था। उन्होंने कहा, ग्रीनलैंड पर नॉर्वे का रुख बिल्कुल स्पष्ट है। ग्रीनलैंड डेनमार्क साम्राज्य का हिस्सा है और इस मुद्दे पर नॉर्वे पूरी तरह डेनमार्क का समर्थन करता है।
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नोबेल शांति पुरस्कार को लेकर उन्होंने कहा कि उन्होंने ट्रंप को पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि यह पुरस्कार एक स्वतंत्र नोबेल समिति की ओर से दिया जाता है, न कि नॉर्वे सरकार द्वारा। यह समिति एक स्वतंत्र संस्था है, जिसके पांच सदस्य नॉर्वे की संसद की ओर से नियुक्त किए जाते हैं।
अमेरिकी वित्त मंत्री ने किया ट्रंप का बचाव?
इस बीच, अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने स्विट्जरलैंड के दावोस में विश्व आर्थिक मंच की बैठक के दौरान पत्रकारों से बातचीत में ग्रीनलैंड को लेकर राष्ट्रपति के रुख का बचाव किया। उन्होंने कहा, यह कहना पूरी तरह गलत है कि राष्ट्रपति यह सब नोबेल पुरस्कार के कारण कर रहे हैं। हालांकि, इसके तुरंत बाद उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें नॉर्वे को लिखे गए राष्ट्रपति के संदेश के बारे में कुछ भी जानकारी नहीं है। बेसेंट ने जोर देकर कहा कि ट्रंप ग्रीनलैंड को अमेरिका के लिए एक रणनीतिक संपत्ति के रूप में देख रहे हैं। उन्होंने कहा, हम अपनी क्षेत्रीय सुरक्षा किसी और पर नहीं छोड़ेंगे।