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'इस्लामिक नाटो' का गठन?: तुर्किये, सऊदी अरब-पाकिस्तान के बीच जल्द होगा संयुक्त रक्षा समझौता, रिपोर्ट में दावा
Fri, 07 Aug 2026 09:14 AM IST
Pavan
एएनआई, रियाद
एएनआई, रियाद
Published by: Pavan
Updated Fri, 07 Aug 2026 09:14 AM IST
सार
सैन्य सहयोग को और मजबूत करते हुए तुर्किये, सऊदी अरब और पाकिस्तान एक बड़े संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर करने जा रहे हैं। इस कदम से रणनीतिक हलकों में एक नए रक्षा गठबंधन की चर्चा तेज हो गई है, जिसे कई जगह 'इस्लामिक नाटो' भी कहा जा रहा है।
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पाकिस्तानी पीएम और सऊदी क्राउन प्रिंस
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
तुर्किये, सऊदी अरब और पाकिस्तान शुक्रवार को सऊदी अरब में एक संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर कर सकते हैं। इस खबर के बाद इन देशों के बीच सैन्य सहयोग बढ़ने और कथित 'इस्लामिक नाटो' जैसी सुरक्षा व्यवस्था बनने की अटकलें फिर तेज हो गई हैं। हालांकि, पाकिस्तान पहले ही साफ कर चुका है कि यह व्यवस्था किसी देश के खिलाफ नहीं होगी। उसका कहना है कि इसका मकसद क्षेत्रीय शांति को मजबूत करना और बाहरी देशों पर निर्भरता कम करना है।
यह भी पढ़ें- US: जन्म से मिलने वाली अमेरिकी नागरिकता पर डोनाल्ड ट्रंप का नया वार, 'बर्थ टूरिज्म' रोकने के लिए दो आदेश जारी
पहले भी जताई थी बड़े गठबंधन की संभावना
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने मई में एक इंटरव्यू में कहा था कि पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच पहले से मौजूद रक्षा और आर्थिक सहयोग के ढांचे का विस्तार किया जा सकता है। इसमें भविष्य में कतर और तुर्किये को भी शामिल किया जा सकता है। उन्होंने कहा था कि इस प्रस्ताव पर अलग-अलग स्तर पर चर्चा चल रही है और इसे अंतिम रूप देने की प्रक्रिया जारी है। यदि कतर और तुर्किये इसमें शामिल होते हैं तो यह क्षेत्र के लिए एक मजबूत आर्थिक और रक्षा सहयोग मंच बन सकता है।
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'किसी के खिलाफ नहीं है यह समझौता'
ख्वाजा आसिफ ने कहा था कि इस तरह का समझौता किसी देश को निशाना बनाने के लिए नहीं है। इसका उद्देश्य क्षेत्र में शांति बनाए रखना और सुरक्षा के मामलों में बाहरी देशों पर निर्भरता कम करना है। उन्होंने कहा कि दुनिया के सभी देश एक-दूसरे से जुड़े हैं, लेकिन अपने क्षेत्र की शांति और सुरक्षा के लिए ऐसा सहयोग जरूरी है।
पिछले साल हुआ था पाकिस्तान-सऊदी रक्षा समझौता
पिछले साल पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सऊदी अरब यात्रा के दौरान दोनों देशों ने 'स्ट्रैटेजिक म्यूचुअल डिफेंस एग्रीमेंट' पर हस्ताक्षर किए थे। संयुक्त बयान में कहा गया था कि लगभग आठ दशक पुराने रिश्तों, इस्लामी एकजुटता, साझा रणनीतिक हितों और रक्षा सहयोग को और मजबूत करने के लिए यह समझौता किया गया है। इसके तहत दोनों देशों ने एक-दूसरे की सुरक्षा के प्रति सहयोग बढ़ाने का संकल्प लिया था।
यह भी पढ़ें- अंतरिक्ष में भारतवंशी अनिल मेनन का कमाल: पहले ही स्पेसवॉक से ISS को दी नई ताकत; और ताकतवर होगा स्पेस स्टेशन
भारत ने जताई थी चिंता
इस समझौते के बाद भारत ने कहा था कि वह इसके प्रभावों का सावधानी से अध्ययन करेगा। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा था कि भारत इस रक्षा समझौते के अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा, क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिरता पर पड़ने वाले असर का आकलन करेगा। उन्होंने कहा था कि भारत अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
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पहले भी जताई थी बड़े गठबंधन की संभावना
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने मई में एक इंटरव्यू में कहा था कि पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच पहले से मौजूद रक्षा और आर्थिक सहयोग के ढांचे का विस्तार किया जा सकता है। इसमें भविष्य में कतर और तुर्किये को भी शामिल किया जा सकता है। उन्होंने कहा था कि इस प्रस्ताव पर अलग-अलग स्तर पर चर्चा चल रही है और इसे अंतिम रूप देने की प्रक्रिया जारी है। यदि कतर और तुर्किये इसमें शामिल होते हैं तो यह क्षेत्र के लिए एक मजबूत आर्थिक और रक्षा सहयोग मंच बन सकता है।
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'किसी के खिलाफ नहीं है यह समझौता'
ख्वाजा आसिफ ने कहा था कि इस तरह का समझौता किसी देश को निशाना बनाने के लिए नहीं है। इसका उद्देश्य क्षेत्र में शांति बनाए रखना और सुरक्षा के मामलों में बाहरी देशों पर निर्भरता कम करना है। उन्होंने कहा कि दुनिया के सभी देश एक-दूसरे से जुड़े हैं, लेकिन अपने क्षेत्र की शांति और सुरक्षा के लिए ऐसा सहयोग जरूरी है।
पिछले साल हुआ था पाकिस्तान-सऊदी रक्षा समझौता
पिछले साल पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सऊदी अरब यात्रा के दौरान दोनों देशों ने 'स्ट्रैटेजिक म्यूचुअल डिफेंस एग्रीमेंट' पर हस्ताक्षर किए थे। संयुक्त बयान में कहा गया था कि लगभग आठ दशक पुराने रिश्तों, इस्लामी एकजुटता, साझा रणनीतिक हितों और रक्षा सहयोग को और मजबूत करने के लिए यह समझौता किया गया है। इसके तहत दोनों देशों ने एक-दूसरे की सुरक्षा के प्रति सहयोग बढ़ाने का संकल्प लिया था।
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भारत ने जताई थी चिंता
इस समझौते के बाद भारत ने कहा था कि वह इसके प्रभावों का सावधानी से अध्ययन करेगा। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा था कि भारत इस रक्षा समझौते के अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा, क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिरता पर पड़ने वाले असर का आकलन करेगा। उन्होंने कहा था कि भारत अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।