UNGA : संयुक्त राष्ट्र महासभा में रखा प्रस्ताव- रूस नुकसान का यूक्रेन को दे मुआवजा, भारत वोटिंग से दूर रहा
इस साल फरवरी के अंत में यूक्रेन में शुरू हुए रूसी अभियान में अब तक हजारों सैन्य कर्मी मारे जा चुके हैं। यूक्रेन में जारी युद्ध ने वैश्विक खाद्य सुरक्षा को भी प्रभावित किया है और कच्चे तेल की कीमतों में अचानक वृद्धि हुई है।
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संयुक्त राष्ट्र महासभा में सोमवार को एक बार फिर यूक्रेन पर हमले के लिए रूस को जवाबदेह ठहराने का आह्वान किया गया। इसके साथ ही हमले की वजह यूक्रेन में हुए नुकसान का रूस से मुआवजा मांगने की बात भी उठाई गई। इसके बाद मसौदा प्रस्ताव लाकर उस पर वोटिंग कराई गई।
संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) में सोमवार को एक बार फिर यूक्रेन पर हमलों का रूस को जवाबदेह ठहराने और इससे हुए नुकसान की भरपाई के एक तंत्र बनाने व मुआवजा देने को लेकर मसौदा प्रस्ताव पर वोटिंग कराई गई। कुल 94 देशों ने प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया जबकि 14 ने इसके विरोध में मतदान किया। भारत सहित 73 देशों ने मतदान में भाग नहीं लिया।
संयुक्त राष्ट्र में यूरोपीय संघ के मिशन ने एक ट्वीट कर कहा कि आज यूएन महासभा ने मान्यता दी है कि रूस को यूक्रेन के खिलाफ अपनी आक्रामकता के लिए जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। 94 से 14 वोटों से इसे अपनाया गया। यूएनजीए का यह संकल्प नुकसान का दस्तावेजीकरण करने तंत्र स्थापित करनेऔर नुकसान के लिए उचित मुआवजे की सिफारिश करता है।
पश्चिमी देशों की ओर से प्रस्तुत किए गए मसौदे में यूक्रेन में किए गए कार्यों के लिए रूस की निंदा करने का आह्वान किया गया था। प्रस्ताव लाने में सहभागी रहे चेक गणराज्य ने कहा कि यूक्रेन में युद्ध के कारण हुए उल्लंघनों और क्षति के लिए रूस को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।
संयुक्त राष्ट्र में चेक गणराज्य के मिशन ने ट्वीट कर कहा कि आज यूएन के सदस्य देशों ने मतदान किया कि रूस को यूक्रेन में युद्ध के दौरान हुए उल्लंघनों और क्षति के लिए जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। चेक गणराज्य महासभा में के इस प्रस्ताव को लाने में सहभागी रहा, जिसमें क्षति और उसकी पूर्ति के लिए तंत्र की स्थापना की सिफारिश की गई थी।
बता दें कि इस साल फरवरी के अंत में यूक्रेन में शुरू हुए रूसी अभियान में अब तक हजारों सैन्य कर्मी मारे जा चुके हैं। यूक्रेन में जारी युद्ध ने वैश्विक खाद्य सुरक्षा को भी प्रभावित किया है और कच्चे तेल की कीमतों में अचानक वृद्धि हुई है।
भारत की स्थायी प्रतिनिधि रुचिरा कंबोज ने कहा- क्या यह प्रक्रिया टकराव का हल निकाल पाएगी
भारत संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) में पेश उस मसौदा प्रस्ताव पर मतदान से दूर रहा, जिसमें रूस को यूक्रेन पर हमला करके अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करने के लिए जवाबदेह ठहराने और कीव को युद्ध से हुए नुकसान की क्षतिपूर्ति का आह्वान किया गया था। यूक्रेन द्वारा पेश मसौदा प्रस्ताव ‘फरदरेंस ऑफ रेमेडी एंड रिपेरेशन फॉर अग्रेशन अगेंस्ट यूक्रेन’ को 193 सदस्यीय यूएनजीए ने मंजूरी दे दी।
यूक्रेन द्वारा पेश इस प्रस्ताव के पक्ष में 94 वोट पड़े जबकि 14 मत इसके खिलाफ पड़े। वहीं, 73 सदस्य इस मतदान के दौरान अनुपस्थित रहे। अनुपस्थित रहने वाले सदस्य देशों में भारत के अलावा बांग्लादेश, भूटान, ब्राजील, मिस्र, इस्राइल, नेपाल, पाकिस्तान आदि शामिल रहे। भारत ने मतदान से दूरी के फैसले के बाद सवाल किया कि क्या क्षतिपूर्ति की प्रक्रिया टकराव का हल निकालने की कोशिशों में योगदान देगी?
भारत ने इस तरह के प्रस्तावों के माध्यम से मिसाल कायम करने के प्रयासों के प्रति आगाह भी किया। यूएन में भारत की स्थायी प्रतिनिधि रुचिरा कंबोज ने कहा, हमें निष्पक्ष रूप से विचार करने की जरूरत है। उन्होंने कहा, महासभा में लाए गए एक प्रस्ताव के जरिये इस तरह की प्रक्रिया की कानूनी वैधता को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है।
वार्ता की संभावना घटाने वाले कदमों से बचें
भारत की यूएन में स्थायी प्रतिनिधि रुचिरा कंबोज ने कहा, हमें अंतरराष्ट्रीय कानून के पर्याप्त पुनरीक्षण के बिना ऐसी कोई व्यवस्था नहीं बनानी चाहिए जिसका संयुक्त राष्ट्र के भविष्य के कामकाज और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक प्रणाली पर प्रभाव पड़ता है। हमें उन कदमों से बचने की जरूरत है, जो इस संघर्ष के अंत के लिए बातचीत की संभावना को घटाते हैं या फिर खतरे में डालते हैं।
फ्रांस-चीन सहयोग यूक्रेन में युद्ध के प्रभाव को घटाने के लिए अहम
यूक्रेन में युद्ध के प्रभाव को कम करने के लिए फ्रांस और चीन के बीच घनिष्ठ सहयोग महत्वपूर्ण हैं जो यूरोपीय सीमाओं से परे हैं। फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ हुई बैठक के बाद ट्विटर पर लिखा, उत्तेजना खत्म करने, यूक्रेन युद्ध परिणामों का सामना करने और जैव विविधता की रक्षा के लिए काम करने को लेकर फ्रांस और चीन दृढ़ हैं।
दूसरे विश्व युद्ध जैसी है खेरसान जीत
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने खेरसान पर अपनी सेनाओं के दोबारा कब्जे को दूसरे विश्व युद्ध के दौरान मित्र देशों की सेनाओं के अवरोहण जैसा करार दिया है, जिसके बाद उनकी जीत सुनिश्चित हुई थी। इंडोनेशिया के बाली में चल रहे जी-20 सम्मेलन में वीडियो लिंक से दिए संबोधन में जेलेंस्की ने कहा, यह कामयाबी अतीत की कई लड़ाइयों की याद दिलाती है, जो उस समय रुख बदलने वाली साबित हुई थीं। हमें लगता है कि यह अंतिम जीत नहीं है, लेकिन भविष्य के घटनाक्रम की राह जरूर तय करती है।
रूस ने खेरसान को बर्बाद किया
यूक्रेन के खेरसान प्रांत पर अवैध कब्जे के दौरान रूसी सेना ने यहां कई चीजें बर्बाद की हैं। रूस द्वारा खेरसान छोड़ने के बाद यूक्रेनी सेना के नियंत्रण में आने के बाद यहां की काफी डरावनी तस्वीरें सामने आई हैं। कुछ निवासियों ने कहा कि रूसी सेना एक जगह जुटी और उन्होंने टीवी टॉवर ध्वस्त कर दिया। इसके साथ हीटिंग और बिजली के बुनियादी ढांचे को भी क्षतिग्रस्त कर दिया। एक निवासी ने बताया, यह देखना दर्दनाक था कि हमारी आंखों के सामने शहर को कैसे नष्ट किया जा रहा था।
