लेबनान में मूर्ति विवाद पर बवाल: इस्राइली सैनिक के शामिल होने का दावा, नेतन्याहू ने किया खारिज; जांच के आदेश
इस्राइल-लेबनान तनाव के बीच दक्षिण लेबनान में मूर्ति तोड़फोड़ का मामला भड़क गया। वायरल वीडियो में गलत दावा फैलने के बाद नई तस्वीर से इस्राइली सैनिक की भूमिका सामने आई।इस्राइली पीएम नेतन्याहू ने घटना को गंभीर बताते हुए जांच और सख्त कार्रवाई के आदेश दिए, साथ ही धार्मिक भावनाओं को ठेस पर खेद जताया।
विस्तार
इस्राइल और लेबनान के बीच जारी भीषण संघर्ष के बीच एक नया विवाद भड़क उठा है, जिसने हालात को और तनावपूर्ण बना दिया है। धर्म से जुड़े इस मामले ने राजनीतिक और सामाजिक टकराव का रूप ले लिया है। सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में दावा किया गया कि मुसलमानों ने ईसा मसीह की मूर्ति को नुकसान पहुंचाया है, जिसके बाद आरोप-प्रत्यारोप और विरोध प्रदर्शन तेज हो गए। इस वीडियो ने आग में घी डालने का काम किया और क्षेत्र में पहले से मौजूद तनाव को और उग्र कर दिया। अब यह मामला सिर्फ घटना नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बहस का विषय भी बन चुका है।
पूरी घटना को ऐसे समझिए कि सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल होने के बाद बड़ा विवाद खड़ा हो गया, जिसमें आरोप लगाया गया था कि मुसलमानों ने ईसा मसीह की मूर्ति को नुकसान पहुंचाया है। हालांकि बाद में सामने आई एक नई तस्वीर ने इन दावों को गलत साबित कर दिया और नया दावा यह सामने आया कि घटना में एक इस्राइल सैनिक शामिल था। बता दें कि यह घटना दक्षिण लेबनान की बताई जा रही है, जहां एक धार्मिक प्रतीक (कैथोलिक मूर्ति) को नुकसान पहुंचाया गया। वायरल तस्वीर में एक सैनिक को हथौड़े से मूर्ति पर हमला करते हुए देखा गया, जिसके बाद मामला तेजी से फैल गया।
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नेतन्याहू ने दी कड़ी प्रतिक्रिया
इस घटना पर इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि यह घटना गंभीर और दुखद है और इस पर देश के लगभग सभी लोग हैरान और दुखी हैं। उन्होंने बताया कि सेना इस मामले की आपराधिक जांच कर रही है और दोषी सैनिक के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। नेतन्याहू ने कहा कि इस्राइल सभी धर्मों के लिए धार्मिक स्वतंत्रता का सम्मान करता है और इस घटना से जो भी आहत हुआ है, उसके लिए खेद व्यक्त किया गया है।
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इस्राइली राजदूत ने भी दी कड़ी प्रतिक्रिया
इस मामले पर अमेरिका के इस्राइल में राजदूत माइक हकाबी ने भी प्रतिक्रिया दी और कहा कि इस घटना पर तुरंत और सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। कुल मिलाकर, यह मामला सोशल मीडिया पर गलत जानकारी फैलने और वास्तविक घटना के बीच अंतर को लेकर बड़ा विवाद बन गया है, जिसकी अब आधिकारिक जांच चल रही है।
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