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US: 'अवैध रूप से ट्रांसजेंडर सैनिकों को प्रतिबंधित किया', अदालत का बड़ा फैसला; क्या ट्रंप सरकार के लिए झटका?
पीटीआई, वॉशिंगटन
Published by: Devesh Tripathi
Updated Tue, 02 Jun 2026 01:05 PM IST
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सार
ट्रंप प्रशासन द्वारा ट्रांसजेंडर व्यक्तियों की सैन्य सेवा पर लगाए गए प्रतिबंध को अमेरिकी संघीय अपील अदालत के बहुमत ने कानूनी रूप से संदिग्ध माना है। अदालत ने निचली अदालत के उस निष्कर्ष को काफी हद तक बरकरार रखा, जिसमें कहा गया था कि यह नीति समान अधिकारों और संवैधानिक सुरक्षा के सिद्धांतों से टकरा सकती है। हालांकि, अपील अदालत ने राहत का दायरा सीमित करते हुए इसे केवल मौजूदा ट्रांसजेंडर सैन्यकर्मियों तक रखा।
ट्रांसजेंडर सैनिकों को लेकर अमेरिकी अदालत का बड़ा फैसला
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स/ANI
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विस्तार
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की वह नीति, जिसके तहत ट्रांसजेंडर सैनिकों को सैन्य सेवा से बाहर रखा गया था, अवैध है। संघीय अपील अदालत के न्यायाधीशों के एक विभाजित पैनल ने सोमवार को यह फैसला सुनाया।
अमेरिकी अपील अदालत के डिस्ट्रिक्ट ऑफ कोलंबिया सर्किट के तीन न्यायाधीशों के पैनल के बहुमत वाले फैसले में मार्च 2025 में वॉशिंगटन डीसी की अमेरिकी जिला न्यायाधीश एना रेयेस के फैसले को बड़े पैमाने पर बरकरार रखा गया।
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वॉशिंगटन डीसी की कोर्ट ने क्या सुनाया था फैसला?
रेयेस ने अपने फैसले में कहा था कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का ट्रांसजेंडर सैनिकों को सैन्य सेवा से बाहर करने संबंधी कार्यकारी आदेश संभवतः उनके संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन करता है। रेयेस द्वारा छह सक्रिय ट्रांसजेंडर सैन्यकर्मियों और सेना में शामिल होने की इच्छा रखने वाले दो अन्य लोगों की ओर से दायर याचिका पर प्रारंभिक निषेधाज्ञा जारी किए जाने के बाद प्रशासन ने इसके खिलाफ अपील की थी।
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अपील अदालत के बहुमत ने फैसला दिया कि निषेधाज्ञा का दायरा सीमित किया जाए और यह केवल उन वादियों पर लागू हो जो वर्तमान में सेना में सेवा दे रहे हैं। सेना में शामिल होने की कोशिश कर रहे लोगों को इसमें शामिल नहीं किया गया। यह फैसला तत्काल प्रभाव से लागू नहीं होगा, जिससे ट्रंप प्रशासन को पूरे अपील न्यायालय से मामले की सुनवाई कराने का अनुरोध करने के लिए समय मिल जाएगा।
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट दे चुका है ट्रांसजेंडर सैन्य प्रतिबंध को लागू रहने की अनुमति
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट पिछले वर्ष ट्रांसजेंडर सैन्य प्रतिबंध को लागू रहने की अनुमति दे चुका है, जबकि इस मामले से जुड़ी कानूनी प्रक्रिया अभी जारी है। इस प्रतिबंध को चुनौती देने वाला एक अन्य मुकदमा वॉशिंगटन राज्य में भी दायर किया गया था, जिसमें अदालत ने नीति को चुनौती देने वाले वादियों के पक्ष में फैसला सुनाया था।
जनवरी 2025 में ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए थे, जिसमें कहा गया था कि ट्रांसजेंडर सैन्यकर्मियों की यौन पहचान 'एक सैनिक की सम्मानजनक, सत्यनिष्ठ और अनुशासित जीवनशैली के प्रति प्रतिबद्धता से टकराती है, यहां तक कि उसके निजी जीवन में भी' और यह सैन्य तैयारियों के लिए हानिकारक है।
ट्रंप प्रशासन की नीति में जेंडर डिस्फोरिया से पीड़ित लोग माने गए अयोग्य
इस आदेश के जवाब में रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने ऐसी नीति जारी की, जिसके तहत जेंडर डिस्फोरिया से पीड़ित लोगों को सैन्य सेवा के लिए सामान्य रूप से अयोग्य माना गया। जेंडर डिस्फोरिया वह मानसिक परेशानी है, जो तब महसूस होती है जब किसी व्यक्ति को जन्म के समय निर्धारित लिंग और उसकी लैंगिक पहचान में मेल नहीं होता। इस चिकित्सीय स्थिति को अवसाद और आत्महत्या के विचारों से भी जोड़ा गया है।
बहुमत की ओर से लिखते हुए न्यायाधीश रॉबर्ट विल्किंस ने कहा कि यह नीति ऐसा प्रतीत होती है कि इसे केवल एक राजनीतिक रूप से अलोकप्रिय समूह, यानी स्वयं को ट्रांसजेंडर के रूप में पहचानने वाले लोगों को नुकसान पहुंचाने की इच्छा से प्रेरित होकर बनाया गया है। विल्किंस को डेमोक्रेट राष्ट्रपति बराक ओबामा ने अदालत में नामित किया था।
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ट्रंप की ओर से नामित न्यायाधीश ने जताई असहमति
अपने असहमति वाले मत में न्यायाधीश जस्टिन वॉकर ने कहा कि अदालतों के पास ट्रांसजेंडर सैनिकों को बाहर रखने के फैसले पर पुनर्विचार करने का अधिकार नहीं है। वॉकर ने लिखा, ''हमारे पास न तो यह विशेषज्ञता है और न ही यह अधिकार कि हम तय करें कि सेना वादियों को अपनी पंक्तियों से बाहर रख सकती है या नहीं। संविधान यह अधिकार कांग्रेस और कमांडर इन चीफ को देता है।''
वॉकर को रिपब्लिकन नेता ट्रंप ने अदालत में नामित किया था। डेमोक्रेट राष्ट्रपति बिल क्लिंटन द्वारा नामित न्यायाधीश जूडिथ रोजर्स ने विल्किंस की राय का समर्थन किया, हालांकि उन्होंने आंशिक रूप से असहमति भी जताई।