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US का मिशन चांद: 54 साल बाद इतिहास की दहलीज पर नासा, आर्टेमिस-II से भेजे गए चार अंतरिक्ष यात्री, जानें सबकुछ

स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: Kirtivardhan Mishra Updated Thu, 02 Apr 2026 07:31 AM IST
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सार

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी- नासा ने आर्टेमिस II मिशन के तहत चार अंतरिक्ष यात्रियों को चांद की तरफ पर भेजा है। नासा ने इन चार अंतरिक्ष यात्रियों को फ्लोरिडा में ट्रेनिंग देने के बाद अंतरिक्ष में भेजा है। इन यात्रियों में कमांडर रीड वाइसमैन, पायलट विक्टर ग्लोवर, क्रिस्टीना कोच और कनाडाई जेरेमी हैनसेन शामिल हैं। इन सभी अंतरिक्ष यात्रियों का मिशन क्यों खास है? नासा इस मिशन से क्या हासिल करना चाहता है? जानिए इन सवालों के जवाब 

US Artemis 2  Manned Moon Mission Launching date Apollo 17 Astronauts Records and target explained news
आर्टेमिस-2 मिशन - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार

अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी- नेशनल एयरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (नासा) ने अगले कुछ वर्षों में चांद पर एक स्थायी बेस स्थापित करने की योजना रखी है। बीते हफ्ते ही एजेंसी ने अगले एक दशक के चांद से जुड़े मिशन्स का रोड मैप सामने रखा था। इसमें ही चांद पर बेस बनाने और इसके लिए कुछ आधारभूत ढांचों को लगाने की समयसीमा का भी खुलासा किया गया।
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नासा की तरफ से आर्टेमिस-2 मिशन लॉन्च किए जाने के बाद चार अंतरिक्ष यात्रियों वाले इस पहले चंद्र मिशन को लेकर कई सवाल मन में कौंध रहे हैं। दरअसल, करीब 54 साल बाद अमेरिका एक बार फिर चांद पर इंसान भेजने की रेस में शामिल हुआ है। ऐसे में अंतरिक्ष एजेंसी ने क्या तैयारियां की हैं? जानिए तमाम सवालों के जवाब 
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नासा जिस आर्टेमिस-2 मिशन को लेकर सुर्खियों में है, वह है क्या? कौन-कौन इस मिशन का हिस्सा होगा? इसकी लॉन्चिंग की तैयारियां कितने लंबे कब से की जा रही हैं? आर्टेमिस-2 का लक्ष्य क्या तय किया गया है? इसके चांद पर लैंडिंग कराने की क्या तैयारी है? इस मिशन के बाद क्या होगा? आइये विस्तार से जानते हैं...

क्या है नासा का आर्टेमिस-2 मिशन?

नासा का आर्टेमिस-2 मिशन उनके आर्टेमिस कार्यक्रम की दूसरी निर्धारित उड़ान है और 1972 (अपोलो 17) के बाद चंद्रमा के करीब जाने वाला पहला मानव मिशन है। यह लगभग 10 दिन का मिशन है, जो स्पेस लॉन्च सिस्टम (एसएलएस) रॉकेट और ओरायन अंतरिक्ष यान का इस्तेमाल करेगा।

बता दें कि आर्टेमिस-1 मिशन को 2022 में लॉन्च किया गया था, तब यह चांद के चक्कर लगाने वाला मानवरहित मिशन था। इसके जरिए रॉकेट और स्पेसशिप के लिए अंतरिक्ष और चांद के करीब की स्थितियों को परखा गया था। उस मिशन के आधार पर ही आर्टेमिस-2 मानव मिशन की तैयारी की गई है। 

इस मिशन में चार अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा का चक्कर लगाएंगे। यह उड़ान एक 'फ्री-रिटर्न' ट्रैजक्टरी (मार्ग) का इस्तेमाल करेगी। इसका अर्थ है कि एक बार पृथ्वी की कक्षा से बाहर निकलने के बाद, यान चंद्रमा के पीछे से होकर गुजरेगा और उसके गुरुत्वाकर्षण की मदद से स्वाभाविक रूप से पृथ्वी की ओर वापस लौट आएगा।

आर्टेमिस-2 के दौरान चालक दल चंद्रमा के उस सुदूर हिस्से के पार जाएगा, जो पृथ्वी से कभी दिखाई नहीं देता। इस उड़ान के दौरान संभव है कि इंसान पृथ्वी से अपनी सबसे अधिक दूरी का नया रिकॉर्ड बनाए जो मौजूदा समय में 1970 के अपोलो 13 मिशन (लगभग 248,655 मील) के नाम दर्ज है।

आर्टेमिस-2 से कौन-कौन जा रहा चांद के करीब?

नासा ने 3 अप्रैल 2023 को ही आर्टेमिस-2 मिशन के लिए चुने गए उड़ान दल यानी क्रू का एलान कर दिया था। इनमें तीन अंतरिक्षयात्री नासा के होंगे, जबकि एक एस्ट्रोनॉट कनाडाई स्पेस एजेंसी (सीएसए) से शामिल होगा। इन चारों अंतरिक्ष यात्रियों की अलग-अलग भूमिकाएं भी तय हैं।

1. रीड वाइसमैन: यह इस मिशन के कमांडर हैं। वह नासा के अंतरिक्ष यात्री, अमेरिकी नौसेना के एविएटर और टेस्ट पायलट हैं। आर्टेमिस-2 उनकी दूसरी अंतरिक्ष उड़ान होगी।

2. विक्टर ग्लोवर: यह यान के पायलट हैं। नासा के यह अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा का चक्कर लगाने वाले इतिहास के पहले अश्वेत व्यक्ति होंगे।

3. क्रिस्टीना कॉश: यह मिशन विशेषज्ञ के रूप में शामिल हैं। नासा की यह इंजीनियर और वैज्ञानिक एक महिला द्वारा सबसे लंबी एकल अंतरिक्ष उड़ान (328 दिन) का रिकॉर्ड रखती हैं और इन्होंने किसी महिला द्वारा की गई पहली स्पेस वॉक में भी हिस्सा लिया था।

4. जेरेमी हैनसेन: यह भी मिशन विशेषज्ञ हैं, लेकिन यह नासा के बजाय कनाडाई अंतरिक्ष एजेंसी का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। रॉयल कनाडाई वायुसेना के इस फाइटर पायलट की यह पहली अंतरिक्ष उड़ान होगी। इसी के साथ वह चंद्रमा के करीब जाने वाले पहले कनाडाई नागरिक बन जाएंगे।

अंतरिक्ष यात्रियों का यह दल इतिहास रचेगा, क्योंकि यह पहली बार होगा जब कोई महिला, कोई अश्वेत व्यक्ति और कोई कनाडाई नागरिक पृथ्वी की निचली कक्षा के पार यात्रा करेगा।

कितनी बार टाली जा चुकी है आर्टेमिस-2 की लॉन्चिंग?

आर्टेमिस-2 मिशन की लॉन्चिंग की तारीखों में हाल ही में कुछ बदलाव किए गए हैं। मूल रूप से इस मिशन को फरवरी 2026 (6 से 8 फरवरी के बीच) में लॉन्च करने की योजना थी। लेकिन रॉकेट में ईंधन भरने के परीक्षणों के दौरान आई कुछ समस्याओं के कारण नासा को इसकी लॉन्चिंग टालनी पड़ी। इसके बाद नासा ने मार्च (6 से 9 मार्च और 11 मार्च) के लिए भी संभावित लॉन्च विंडो तय की थी, लेकिन मिशन उन तारीखों पर उड़ान नहीं भर सका। 

लगातार परीक्षणों और तैयारियों के बाद अब नासा इस ऐतिहासिक मिशन को 1 अप्रैल 2026 को लॉन्च करने की तैयारी कर ली है। 1 अप्रैल की शाम को इसे फ्लोरिडा के कैनेडी स्पेस सेंटर से लॉन्च किया जा सकता है। जिस वक्त आर्टेमिस-2 की लॉन्चिंग होगी, भारत में 2 अप्रैल को सुबह होगी।

इस बीच अगर मौसम या किसी अन्य तकनीकी कारण से 1 अप्रैल को लॉन्चिंग संभव नहीं हो पाती है, तो नासा के पास अप्रैल में ही कुछ अन्य बैकअप तारीखें मौजूद हैं, जिनमें 3 से 6 अप्रैल और 30 अप्रैल शामिल हैं। कुल मिलाकर, नासा अब अप्रैल 2026 में ही इस मिशन को अंतरिक्ष में भेजने का लक्ष्य लेकर चल रहा है।

आर्टेमिस-2 मिशन में क्या-क्या होगा?

नासा का आर्टेमिस-2 लगभग 10 दिन का मिशन है। यानी 1 अप्रैल को लॉन्चिंग के बाद यह मिशन 10-11 अप्रैल तक पृथ्वी पर लौट सकता है। 

लॉन्च और पृथ्वी की कक्षा: अंतरिक्ष यान (एसएलएस रॉकेट और ओरायन कैप्सूल) को फ्लोरिडा के कैनेडी स्पेस सेंटर के लॉन्च पैड 39बी से प्रक्षेपित किया गया। पहले चरण में पृथ्वी की निचली कक्षा में स्थापना हुई। इसके बाद इंजन को फायर करके अंतरिक्ष यान को ऊपरी कक्षा की तरफ भेजा गया।

सिस्टम और लाइफ-सपोर्ट चेक: चंद्रमा की ओर बढ़ने से पहले यान कुछ समय पृथ्वी की परिक्रमा करेगा। इस दौरान अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ओरायन कैप्सूल की जीवन रक्षक प्रणालियों और अन्य तकनीकी उपकरणों की अच्छी तरह से जांच की जाएगी। 

चंद्रमा की ओर प्रस्थान: एक अप्रैल तड़के 04.05 बजे (भारतीय समयानुसार) शुरू हुई उड़ान के लगभग 26 घंटे बाद एक बड़ा इंजन बर्न किया जाएगा। इस प्रक्रिया में यान को पृथ्वी की कक्षा से निकालकर चंद्रमा की दिशा में भेजा जाएगा। चंद्रमा तक पहुंचने की इस यात्रा में लगभग चार दिन का समय लगेगा।

चंद्रमा का फ्लाइबाय और वैज्ञानिक अध्ययन: यह यान चंद्रमा की सतह पर नहीं उतरेगा, बल्कि उसकी सतह से अधिकतम 5,523 मील (8,889 किमी) ऊपर से गुजरेगा। चंद्रमा के उस सुदूर हिस्से से गुजरते हुए अंतरिक्ष यात्री लगभग तीन घंटे तक चंद्रमा की भूवैज्ञानिक विशेषताओं- जैसे इम्पैक्ट क्रेटर और प्राचीन लावा प्रवाह का विश्लेषण करेंगे और तस्वीरें लेंगे। इसके अलावा वे अंतरिक्ष के मौसम, कोरोनल मास इजेक्शन (सीएमई) और सौर ज्वालाओं (सोलर फ्लेयर्स) की भी निगरानी करेंगे।

पृथ्वी की ओर स्वतः वापसी: यह उड़ान एक फ्री-रिटर्न ट्रैजेक्टरी पर आधारित है। इसका मतलब यह है कि चंद्रमा का गुरुत्वाकर्षण यान को स्वाभाविक रूप से वापस पृथ्वी की ओर धकेल देगा, जिसके लिए किसी अन्य बड़े इंजन बर्न्स की आवश्यकता नहीं होगी। 

वायुमंडल में प्रवेश और स्प्लैशडाउन: पृथ्वी के करीब पहुंचने पर अंतरिक्ष यात्रियों वाला मुख्य 'क्रू मॉड्यूल' सर्विस मॉड्यूल से अलग हो जाएगा। पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करते समय यान की हीट शील्ड के प्रदर्शन का कड़ा परीक्षण होगा। मिशन का अंत प्रशांत महासागर में ओरायन कैप्सूल के सुरक्षित रूप से गिरने के साथ होगा।

आर्टेमिस-2 का लक्ष्य क्या तय किया गया है? 

नासा के आर्टेमिस-2 मिशन के लिए कई अहम लक्ष्य तय किए गए हैं। इनके जरिए अमेरिका भविष्य के गहरे अंतरिक्ष अभियानों के लिए पुख्ता तैयारी करने की योजना बना रहा है। दरअसल, नासा की योजना है कि अंतरिक्ष के सुदूर इलाकों तक सफर सुनिश्चित करने के लिए चांद पर एक बेस तैयार किया जाए। इसके जरिए आगे के मिशन में चांद को भी एक संभावित लॉन्च पैड के तौर पर इस्तेमाल करने की योजना तैयार की जा सकती है। 

लक्ष्य-1: चालक दल की सुरक्षा और स्वास्थ्य 
नासा की सबसे पहली प्राथमिकता अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और उन्हें सुरक्षित पृथ्वी पर वापस लाना है। चूंकि ओरायन कैप्सूल में इंसान पहली बार उड़ान भरेंगे, इसलिए यान की जीवन रक्षक प्रणालियों और पर्यावरण नियंत्रण का अंतरिक्ष के वास्तविक वातावरण में परीक्षण किया जाएगा।

लक्ष्य-2: यान की प्रणालियों का परीक्षण
मिशन का एक अन्य प्रमुख लक्ष्य ओरायन अंतरिक्ष यान और स्पेस लॉन्च सिस्टम (एसएलएस) रॉकेट के प्रदर्शन को जांचना भी है। इसके तहत यान की थर्मल स्थिरता, नैविगेशन, संचार और प्रोपल्शन प्रणालियों की जांच की जाएगी। 

लक्ष्य-3: भविष्य के चंद्र और मंगल अभियानों की तैयारी
यह मिशन चंद्रमा की सतह पर दोबारा इंसानों को उतारने (जैसे आर्टेमिस-3 मिशन) और अंततः मंगल ग्रह तक मानव मिशन भेजने के लिए एक अहम परीक्षण है। इस कार्यक्रम का दीर्घकालिक लक्ष्य चंद्रमा पर एक स्थायी मानव बेस स्थापित करना है, जो अंतरिक्ष स्टेशन की तरह लगातार काम कर सके।

लक्ष्य-4: वैज्ञानिक अनुसंधान और भूवैज्ञानिक अध्ययन
जब यान चंद्रमा के उस सुदूर हिस्से से गुजरेगा जो पृथ्वी से दिखाई नहीं देता, तब अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा की भूवैज्ञानिक विशेषताओं, जैसे इम्पैक्ट क्रेटर और प्राचीन लावा प्रवाह का विश्लेषण करेंगे और तस्वीरें लेंगे। इसके जरिए नासा को आर्टेमिस-3 मानव मिशन में अंतरिक्ष यान की लैंडिंग के लिए सही अनुमान लगाने में मदद मिलेगी।

लक्ष्य-5: अंतरिक्ष के मौसम का अध्ययन
आर्टेमिस-2 के जरिए गहरे अंतरिक्ष के विकिरण से अंतरिक्ष यात्रियों को बचाने के लिए, मिशन के दौरान अंतरिक्ष के मौसम, कोरोनल मास इजेक्शन और सौर ज्वालाओं की ट्रैकिंग और विश्लेषण किया जाएगा।

अब जानें- चांद पर क्यों नहीं उतरेगा आर्टेमिस-2?

नासा ने आर्टेमिस-2 के मानव मिशन होने के बावजूद इसके चांद पर न उतरने की बात पहले ही कही थी। एजेंसी के मुताबिक...
  • इस मिशन में इस्तेमाल होने वाला ओरायन अंतरिक्ष यान एक लूनर लैंडर यानी चंद्रमा पर उतरने वाला यान नहीं है। इसलिए इसमें चंद्रमा की सतह पर उतरने की क्षमता ही नहीं है। 
  • आर्टेमिस कार्यक्रम के तहत चांद पर इंसानों की लैंडिंग के लिए जिस पहले लूनर लैंडर का इस्तेमाल होना है, वह अभी विकास के चरण में है। 
  • नए लैंडर को एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स तैयार कर रही है और इसे स्टारशिप एचएलएस का नाम दिया गया है। इसका इस्तेमाल आर्टेमिस-3 मिशन में किया जाएगा।
  • अपोलो-8 मिशन के दौरान भी लूनर मॉड्यूल तैयार नहीं था। इस लिहाज से आर्टेमिस-2 चांद पर उतरने की तैयारी परखने और जांच के लिए एक अहम मिशन है।

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