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रो खन्ना को बनाया बंधक: इस्राइली सेना ने दिया प्रवासियों का साथ, क्या आम फलस्तीनियों का दर्द समझेगा अमेरिका?
Sat, 11 Jul 2026 10:40 PM IST
राकेश कुमार
पीटीआई, वाशिंगटन।
पीटीआई, वाशिंगटन।
Published by: राकेश कुमार
Updated Sat, 11 Jul 2026 10:40 PM IST
सार
फलस्तीन के दौरे पर गए अमेरिकी सांसद रो खन्ना को इस्राइली प्रवासियों ने 90 मिनट तक रोक कर रखा। अमेरिकी दूतावास और पुलिस के दखल के बाद उन्हें छोड़ा गया। इस घटना ने 2028 के राष्ट्रपति चुनाव के दावेदारों और वेस्ट बैंक के हालातों पर एक नई बहस छेड़ दी है।
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रो खन्ना,अमेरिकी सांसद
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद रो खन्ना को फलस्तीन में बंदूकधारी इस्राइली प्रवासियों ने कुछ देर के लिए रोक लिया। रो खन्ना कैलिफोर्निया से डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसद हैं। वे साल 2028 में होने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के दावेदार भी हैं। यह घटना शनिवार को सामने आई। बुधवार को वे दक्षिणी वेस्ट बैंक के 'खिरबेट जानुता' गांव गए थे। यह एक बेडौइन गांव है।
इस्राइली प्रवासियों के हमलों के बाद यह गांव पूरी तरह उजड़ गया है। रो खन्ना वहां के खंडहर देखने गए थे। तभी अमेरिकी निर्मित एम4 राइफलों से लैस प्रवासियों ने उन्हें हिरासत में ले लिया। रो खन्ना ने 'एक्स' पर लिखा कि जब इस्राइली सेना (आईडीएफ) वहां पहुंची, तो उन्होंने प्रवासियों का ही साथ दिया। सेना ने हमारी हिरासत जारी रखी। उन्होंने बहुत बड़ी गलती की।
इस्राइल-फलस्तीन संघर्ष का अमेरिकी चुनाव पर क्या होगा असर?
'द न्यूयॉर्क टाइम्स' के एक फोटोग्राफर भी इस यात्रा में रो खन्ना के साथ थे। उन्होंने ही इस घटना की रिपोर्ट दी। रो खन्ना ने कहा कि उस स्थिति में मैंने खुद को बेहद असहाय महसूस किया। मेरे पास जीवन में बहुत विशेषाधिकार हैं, फिर भी मुझे ऐसा महसूस हुआ। अमेरिकी दूतावास और इस्राइली पुलिस को फोन करने के बाद उन्हें आगे जाने दिया गया।
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रो खन्ना ने कहा कि अगर वे एक अमेरिकी सांसद को 90 मिनट तक लाचार महसूस करा सकते हैं, तो सोचिए कब्जे में रहने वाले आम फलस्तीनी हर दिन कैसा महसूस करते होंगे? सात अक्टूबर 2023 को हमास के हमले और युद्ध शुरू होने के बाद से अमेरिकी नेता लगातार इस क्षेत्र का दौरा कर रहे हैं।
यह भी पढ़ें: 'आपके पाक लहू का हिसाब होगा': पिता खामेनेई की मौत के महीनों बाद खौला मोजतबा का खून, अमेरिका को दे डाली चेतावनी
क्या वेस्ट बैंक का यह दौरा अमेरिकी राजनीति की दिशा बदल देगा?
अमेरिका के कई बड़े नेता समय-समय पर वेस्ट बैंक का दौरा कर रहे हैं। पिछले साल रिपब्लिकन पार्टी के हाउस स्पीकर माइक जॉनसन ने यहां का दौरा किया था। डेमोक्रेट सांसद क्रिस वान होलेन और जेफ मर्कले भी पिछले साल यहां आए थे। शिकागो के पूर्व मेयर रहम इमैनुएल भी इस समय इस्राइल के दौरे पर हैं।
इमैनुएल पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल में ह्वाइट हाउस के चीफ ऑफ स्टाफ रह चुके हैं। उन्हें भी राष्ट्रपति पद का संभावित दावेदार माना जा रहा है। इस घटना ने अमेरिकी राजनीति में वेस्ट बैंक के मुद्दे को गरमा दिया है। इस घटना के बाद एक सवाल और उठ रहा है कि क्या अब आम फलस्तीनियों का दर्द अमेरिका समझेगा या नहीं?
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इस्राइली प्रवासियों के हमलों के बाद यह गांव पूरी तरह उजड़ गया है। रो खन्ना वहां के खंडहर देखने गए थे। तभी अमेरिकी निर्मित एम4 राइफलों से लैस प्रवासियों ने उन्हें हिरासत में ले लिया। रो खन्ना ने 'एक्स' पर लिखा कि जब इस्राइली सेना (आईडीएफ) वहां पहुंची, तो उन्होंने प्रवासियों का ही साथ दिया। सेना ने हमारी हिरासत जारी रखी। उन्होंने बहुत बड़ी गलती की।
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इस्राइल-फलस्तीन संघर्ष का अमेरिकी चुनाव पर क्या होगा असर?
'द न्यूयॉर्क टाइम्स' के एक फोटोग्राफर भी इस यात्रा में रो खन्ना के साथ थे। उन्होंने ही इस घटना की रिपोर्ट दी। रो खन्ना ने कहा कि उस स्थिति में मैंने खुद को बेहद असहाय महसूस किया। मेरे पास जीवन में बहुत विशेषाधिकार हैं, फिर भी मुझे ऐसा महसूस हुआ। अमेरिकी दूतावास और इस्राइली पुलिस को फोन करने के बाद उन्हें आगे जाने दिया गया।
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रो खन्ना ने कहा कि अगर वे एक अमेरिकी सांसद को 90 मिनट तक लाचार महसूस करा सकते हैं, तो सोचिए कब्जे में रहने वाले आम फलस्तीनी हर दिन कैसा महसूस करते होंगे? सात अक्टूबर 2023 को हमास के हमले और युद्ध शुरू होने के बाद से अमेरिकी नेता लगातार इस क्षेत्र का दौरा कर रहे हैं।
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क्या वेस्ट बैंक का यह दौरा अमेरिकी राजनीति की दिशा बदल देगा?
अमेरिका के कई बड़े नेता समय-समय पर वेस्ट बैंक का दौरा कर रहे हैं। पिछले साल रिपब्लिकन पार्टी के हाउस स्पीकर माइक जॉनसन ने यहां का दौरा किया था। डेमोक्रेट सांसद क्रिस वान होलेन और जेफ मर्कले भी पिछले साल यहां आए थे। शिकागो के पूर्व मेयर रहम इमैनुएल भी इस समय इस्राइल के दौरे पर हैं।
इमैनुएल पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल में ह्वाइट हाउस के चीफ ऑफ स्टाफ रह चुके हैं। उन्हें भी राष्ट्रपति पद का संभावित दावेदार माना जा रहा है। इस घटना ने अमेरिकी राजनीति में वेस्ट बैंक के मुद्दे को गरमा दिया है। इस घटना के बाद एक सवाल और उठ रहा है कि क्या अब आम फलस्तीनियों का दर्द अमेरिका समझेगा या नहीं?