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Trump: यौन उत्पीड़न और मानहानि मामले में ट्रंप को झटका, 1996 में की गई गलती के लिए अब क्यों देंगे 58 लाख डॉलर?
Thu, 09 Jul 2026 11:42 AM IST
नितिन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
Published by: नितिन गौतम
Updated Thu, 09 Jul 2026 11:42 AM IST
सार
ईरान युद्ध को लेकर पहले ही अपने देश में घिरे ट्रंप को एक मानहानि मामले में झटका लगा है। दरअसल संघीय अदालत ने पीड़िता को 58 लाख रुपये देने का आदेश जारी कर दिया है, जिन्हें ट्रंप ने 2023 में एक एस्क्रो खाते में जमा किया था।
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Donald Trump
- फोटो : ANI
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विस्तार
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को यौन उत्पीड़न और मानहानि मामले में बड़ा कानूनी झटका लगा है। एक संघीय न्यायाधीश ने बुधवार को आदेश दिया कि लेखिका ई. जीन कैरोल को वह 58 लाख अमेरिकी डॉलर की राशि जारी की जाए, जिसे वर्ष 2023 में जूरी के फैसले के बाद एस्क्रो खाते में जमा कराया गया था। ट्रंप के वकीलों ने तुरंत इस आदेश के खिलाफ अपील दायर की, लेकिन भुगतान पर रोक लगाने की उनकी याचिका खारिज कर दी गई।
2023 में जमा रकम अब कैरोल को मिलेगी
जूरी के 2023 के फैसले के तुरंत बाद ट्रंप ने यह राशि एक एस्क्रो खाते में जमा करा दी थी। हाल ही में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने भी निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा, जिसके बाद संघीय न्यायाधीश लुईस ए. कैपलन ने राशि जारी करने का रास्ता साफ कर दिया। शुरुआती 50 लाख डॉलर की क्षतिपूर्ति राशि ब्याज जुड़ने के बाद बढ़कर करीब 58 लाख डॉलर हो गई है।
जूरी ने माना था कि ट्रंप ने साल 1996 में मैनहैटन के एक लग्जरी डिपार्टमेंट स्टोर के ट्रायल रूम में लेखिका कैरोल का यौन उत्पीड़न किया था। साल 2019 में प्रकाशित अपनी आत्मकथा में कैरोल द्वारा इस घटना का सार्वजनिक रूप से उल्लेख किए जाने के बाद ट्रंप ने उनके खिलाफ मानहानिकारक बयान दिए थे। उस समय ट्रंप अपने पहले राष्ट्रपति कार्यकाल में थे। उन्होंने कैरोल के आरोपों को झूठा बताते हुए एक साक्षात्कार में कहा था, 'वह मेरी पसंद की महिला नहीं हैं।'
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ट्रंप ने अपने बचाव में दीं ये दलीलें
फैसले के बाद बुधवार को ट्रंप के वकीलों ने कहा कि वे कानूनी लड़ाई जारी रखेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके मुवक्किल के राजनीतिक विरोधी न्यायिक व्यवस्था का इस्तेमाल उनके खिलाफ कर रहे हैं। अपील में उन्होंने दलील दी कि न्यायाधीश कैपलन का आदेश लागू नहीं होना चाहिए, क्योंकि ट्रंप ने सुप्रीम कोर्ट से उसके हालिया फैसले पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया है। हालांकि, बुधवार देर रात द्वितीय अमेरिकी सर्किट कोर्ट ऑफ अपील्स की न्यायाधीश यूनिस सी. ली ने कैरोल को भुगतान रोकने की ट्रंप की याचिका खारिज कर दी।
कैरोल के वकीलों ने अपीलीय अदालत में दाखिल दस्तावेज में कहा, 'अब इस मामले का अंत होना चाहिए।' उन्होंने लिखा, 'कैरोल तीन वर्षों से अधिक समय से जूरी द्वारा तय की गई क्षतिपूर्ति राशि का इंतजार कर रही हैं। उन्हें अब और इंतजार नहीं करना चाहिए।' इस मुकदमे में ट्रंप स्वयं अदालत में उपस्थित नहीं हुए थे। सुनवाई के दौरान कैरोल ने गवाही दी थी कि डिपार्टमेंट स्टोर में ट्रंप से हुई एक सामान्य और दोस्ताना मुलाकात अचानक हिंसक हो गई थी।
1996 की गलती का अब क्यों हर्जाना दे रहे ट्रंप?
वहीं, अब 82 साल की हो चुकीं कैरोल को लेकर ट्रंप लगातार कहते रहे कि वह उन्हें जानते तक नहीं थे। उन्होंने कैरोल पर अपनी किताबों की बिक्री बढ़ाने और राजनीतिक मकसद से आरोप लगाने का भी आरोप लगाया। कैरोल ने ट्रंप के खिलाफ मुकदमा उस समय दायर किया था, जब न्यूयॉर्क ने कानून में बदलाव कर यौन उत्पीड़न के पीड़ितों को वर्षों पुराने मामलों में भी मुकदमा दायर करने का नया अवसर दिया था। न्यायाधीश कैपलन ने अपने आदेश में लिखा, 'ट्रंप वर्षों से इस मामले को लटकाते रहे हैं। अब समय आ गया है कि वे न्यायसंगत व्यवहार करें और अदालत द्वारा तय राशि का भुगतान करें।'
इस बीच, ट्रंप एक अन्य मानहानि मामले में कैरोल को दिए गए 8.3 करोड़ अमेरिकी डॉलर के हर्जाने के खिलाफ भी अपील कर रहे हैं। यह राशि वर्ष 2024 में मैनहैटन की एक अलग जूरी ने तय की थी, जिसमें ट्रंप ने संक्षिप्त रूप से गवाही भी दी थी।
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2023 में जमा रकम अब कैरोल को मिलेगी
जूरी के 2023 के फैसले के तुरंत बाद ट्रंप ने यह राशि एक एस्क्रो खाते में जमा करा दी थी। हाल ही में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने भी निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा, जिसके बाद संघीय न्यायाधीश लुईस ए. कैपलन ने राशि जारी करने का रास्ता साफ कर दिया। शुरुआती 50 लाख डॉलर की क्षतिपूर्ति राशि ब्याज जुड़ने के बाद बढ़कर करीब 58 लाख डॉलर हो गई है।
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जूरी ने माना था कि ट्रंप ने साल 1996 में मैनहैटन के एक लग्जरी डिपार्टमेंट स्टोर के ट्रायल रूम में लेखिका कैरोल का यौन उत्पीड़न किया था। साल 2019 में प्रकाशित अपनी आत्मकथा में कैरोल द्वारा इस घटना का सार्वजनिक रूप से उल्लेख किए जाने के बाद ट्रंप ने उनके खिलाफ मानहानिकारक बयान दिए थे। उस समय ट्रंप अपने पहले राष्ट्रपति कार्यकाल में थे। उन्होंने कैरोल के आरोपों को झूठा बताते हुए एक साक्षात्कार में कहा था, 'वह मेरी पसंद की महिला नहीं हैं।'
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ट्रंप ने अपने बचाव में दीं ये दलीलें
फैसले के बाद बुधवार को ट्रंप के वकीलों ने कहा कि वे कानूनी लड़ाई जारी रखेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके मुवक्किल के राजनीतिक विरोधी न्यायिक व्यवस्था का इस्तेमाल उनके खिलाफ कर रहे हैं। अपील में उन्होंने दलील दी कि न्यायाधीश कैपलन का आदेश लागू नहीं होना चाहिए, क्योंकि ट्रंप ने सुप्रीम कोर्ट से उसके हालिया फैसले पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया है। हालांकि, बुधवार देर रात द्वितीय अमेरिकी सर्किट कोर्ट ऑफ अपील्स की न्यायाधीश यूनिस सी. ली ने कैरोल को भुगतान रोकने की ट्रंप की याचिका खारिज कर दी।
कैरोल के वकीलों ने अपीलीय अदालत में दाखिल दस्तावेज में कहा, 'अब इस मामले का अंत होना चाहिए।' उन्होंने लिखा, 'कैरोल तीन वर्षों से अधिक समय से जूरी द्वारा तय की गई क्षतिपूर्ति राशि का इंतजार कर रही हैं। उन्हें अब और इंतजार नहीं करना चाहिए।' इस मुकदमे में ट्रंप स्वयं अदालत में उपस्थित नहीं हुए थे। सुनवाई के दौरान कैरोल ने गवाही दी थी कि डिपार्टमेंट स्टोर में ट्रंप से हुई एक सामान्य और दोस्ताना मुलाकात अचानक हिंसक हो गई थी।
1996 की गलती का अब क्यों हर्जाना दे रहे ट्रंप?
वहीं, अब 82 साल की हो चुकीं कैरोल को लेकर ट्रंप लगातार कहते रहे कि वह उन्हें जानते तक नहीं थे। उन्होंने कैरोल पर अपनी किताबों की बिक्री बढ़ाने और राजनीतिक मकसद से आरोप लगाने का भी आरोप लगाया। कैरोल ने ट्रंप के खिलाफ मुकदमा उस समय दायर किया था, जब न्यूयॉर्क ने कानून में बदलाव कर यौन उत्पीड़न के पीड़ितों को वर्षों पुराने मामलों में भी मुकदमा दायर करने का नया अवसर दिया था। न्यायाधीश कैपलन ने अपने आदेश में लिखा, 'ट्रंप वर्षों से इस मामले को लटकाते रहे हैं। अब समय आ गया है कि वे न्यायसंगत व्यवहार करें और अदालत द्वारा तय राशि का भुगतान करें।'
इस बीच, ट्रंप एक अन्य मानहानि मामले में कैरोल को दिए गए 8.3 करोड़ अमेरिकी डॉलर के हर्जाने के खिलाफ भी अपील कर रहे हैं। यह राशि वर्ष 2024 में मैनहैटन की एक अलग जूरी ने तय की थी, जिसमें ट्रंप ने संक्षिप्त रूप से गवाही भी दी थी।